राजस्थान विश्वविद्यालय में भूख हड़ताल पर बैठे छात्र नेता शुभम रेवार को गुरुवार को पुलिस ने बलपूर्वक हटाकर अस्पताल पहुंचा दिया। 26 वर्षीय रेवार की मांग है कि छात्रसंघ चुनाव फिर से शुरू किए जाएं, ताकि युवाओं को राजनीति में आगे आने का अवसर मिले। इसके साथ ही वह विश्वविद्यालय में राजस्थानी भाषा का एक अलग विभाग स्थापित करने की भी मांग कर रहे हैं।

उन्हें प्रदर्शन स्थल से हटाए जाने की यह कार्रवाई Cockroach Janta Party (CJP) के नेता आशुतोष रांका से उनकी मुलाकात के ठीक दो दिन बाद हुई।

जयपुर के एसएमएस अस्पताल में अपने बिस्तर से रेवार ने कहा, “आज पुलिस प्रशासन ने लाठीचार्ज करते हुए हमें जबरन हटाया और एसएमएस अस्पताल में भर्ती करा दिया। मुझे लगातार ड्रिप लगाकर भूख हड़ताल खत्म कराने का दबाव बनाया जा रहा है। लेकिन मैंने लिखित में दे दिया है कि जब तक राज्य में छात्रसंघ चुनाव बहाल नहीं होते और विश्वविद्यालय में राजस्थानी भाषा का विभाग नहीं बनता, तब तक मेरी भूख हड़ताल जारी रहेगी।”

उन्होंने कहा, “युवाओं को जागना होगा। इस तानाशाही सरकार के खिलाफ उन्हें अपने घरों से बाहर निकलना होगा। जेन-जी ने दिखा दिया है कि हम जो सोचते हैं, उसे हासिल कर सकते हैं। इसलिए हम सभी को एकजुट होकर इस अन्याय के खिलाफ लड़ना होगा और सरकार से पूछना होगा कि वह छात्रसंघ चुनाव क्यों बहाल नहीं कर रही है।”

गांधी नगर थाने के एसएचओ भजन लाल ने कहा, “हमने पहले उन्हें समझाया था कि उनकी सेहत का ध्यान रखना हमारी जिम्मेदारी है, इसलिए उन्हें वहां से हटाना पड़ेगा। वह कई दिनों से भूख हड़ताल पर थे और उनकी तबीयत लगातार बिगड़ रही थी। इसी वजह से उन्हें अस्पताल ले जाया गया।”

एसएचओ ने बताया कि अस्पताल में रेवार पर लगातार नजर रखी जा रही है। इस दौरान नाटकीय दृश्य भी देखने को मिले। भारी पुलिस बल की मौजूदगी में जब रेवार को जबरन एंबुलेंस में बैठाया जा रहा था, तब उनके तीन समर्थक उन्हें ले जाने से रोकने के लिए एंबुलेंस की छत पर चढ़ गए।

नागौर जिले के रहने वाले रेवार राजस्थान विश्वविद्यालय में लॉ (एलएलएम) के दूसरे वर्ष के छात्र हैं। गुरुवार को उनकी भूख हड़ताल का आठवां दिन था।

मंगलवार को, जिस दिन उनकी मुलाकात रांका से हुई थी, उसी दिन रेवार ने कहा था, “महाराष्ट्र से आने वाले राज्यपाल यहां राजस्थान में मराठी पढ़ाने का निर्देश लेकर आए हैं। लेकिन हम छात्र तब तक अपनी भूख हड़ताल समाप्त नहीं करेंगे, जब तक विश्वविद्यालय में राजस्थानी भाषा का विभाग नहीं खोला जाता।”

लगातार दबाव

रेवार ने कहा था कि छात्रों पर लगातार आंदोलन खत्म करने का दबाव बनाया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें चेतावनी दी जा रही है कि यदि आंदोलन समाप्त नहीं किया गया तो उन्हें जबरन हटा दिया जाएगा।

सीजेपी के समर्थन पर उन्होंने कहा, “हम उनके समर्थन का स्वागत करते हैं, क्योंकि युवाओं को यह लड़ाई मिलकर लड़नी होगी।”

कांग्रेस से जुड़े नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (NSUI) और आरएसएस से जुड़े अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP), दोनों ही छात्रसंघ चुनाव बहाल करने की मांग कर रहे हैं। इस पर रेवार ने कहा, “हम सभी बिना किसी मंच के एकजुट हैं। पूरे राज्य के युवा छात्रसंघ चुनाव बहाल कराने की मांग पर एक साथ हैं।”

रेवार से मुलाकात के बाद सीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता आशुतोष रांका ने कहा था कि प्रदर्शन कर रहे छात्रों की मांगें पूरी तरह जायज हैं। उन्होंने कहा, “छात्रसंघ चुनाव छात्रों का लोकतांत्रिक अधिकार है। पिछले कई वर्षों से चुनाव नहीं होना बेहद शर्मनाक है। और यदि राजस्थान विश्वविद्यालय ही राजस्थानी भाषा को बढ़ावा नहीं देगा, तो फिर कौन देगा?”

छात्रों की विभिन्न मांगों का उल्लेख करते हुए रांका ने कहा कि वे विश्वविद्यालय को समस्याओं के समाधान के लिए तीन महीने का अल्टीमेटम दे रहे हैं। यदि ऐसा नहीं हुआ तो वे विश्वविद्यालय की कुलपति प्रोफेसर अल्पना कटेजा के इस्तीफे की मांग करेंगे।

आंदोलन को मिला व्यापक समर्थन

रांका की यात्रा के बाद रेवार के आंदोलन को और समर्थन मिलने लगा। बुधवार शाम को कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा, पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट ने भी उनके आंदोलन का समर्थन किया।

इसके अलावा कांग्रेस विधायक मुकेश भाकर, निर्दलीय विधायक रविंद्र सिंह भाटी, पूर्व कांग्रेस विधायक इंद्राज गुर्जर सहित कई अन्य नेताओं ने भी रेवार के समर्थन में अपनी बात रखी।

गुरुवार को जयपुर में एनएसयूआई से जुड़े तीन छात्र भी छात्रसंघ चुनाव बहाल करने और जंतर-मंतर पर छात्रों के साथ हुई कथित बर्बरता को लेकर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के इस्तीफे की मांग करते हुए पानी की टंकी पर चढ़ गए।

यह भी पढ़ें: Now, Gen Alpha: बिहार में स्कूल की सुविधाओं की कमी पर छात्रों ने 4 किमी मार्च किया, कर्मचारियों की एक दिन की सैलरी रोकी गई

देशभर में कथित नीट (NEET) पेपर लीक और शिक्षा से जुड़े मुद्दों को लेकर छात्रों के विरोध प्रदर्शनों के बीच बिहार के गया जिले के सिमुआरा मिडिल स्कूल के छात्रों ने भी मंगलवार को अपनी समस्याओं को लेकर प्रदर्शन किया। छात्रों ने स्कूल में बुनियादी सुविधाओं की कमी के विरोध में करीब 4 किलोमीटर पैदल मार्च करते हुए टिकारी अनुमंडल कार्यालय तक पहुंचकर अपनी मांगें रखीं। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां पर करें क्लिक