महाराष्ट्र के नासिक जिले में चल रहे आदिवासी छात्रों की भूख हड़ताल 12वें दिन पहुंच गई है। इस दौरान गुरुवार रात को कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके जिले के ईदगाह ग्राउंड जाकर विरोध कर रहे आदिवासी छात्रों से मुलाकात की। उन्होंने वहां छात्रों से बातचीत की और उनकी परेशानियां सुनीं।
इसे लेकर अभिजीत दीपके ने कहा, “छात्र 12 दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे हैं और इसके बावजूद सरकार ने उनकी मदद के लिए कुछ नहीं किया है। उनकी किसी भी माँग पर कोई कार्रवाई नहीं हुई है इसीलिए मैं इन छात्रों का समर्थन करने यहाँ आया हूँ।
‘सरकार कब जागेगी?’
अभिजीत दीपके ने आगे कहा, “एक छात्र की हालत अब गंभीर है और उसे अस्पताल ले जाया गया है। मैं उससे मिलने जा रहा हूँ। सबसे जरूरी सवाल यह है कि ये छात्र 12 दिनों से भूख हड़ताल पर हैं, लेकिन वे क्या माँग रहे हैं? कि उन्हें अच्छा खाना मिले, हॉस्टल अच्छे मिले, स्कूल अच्छे हो जाएं। इसके लिए आपको 12 दिन भूखा रहना पड़ेगा? क्या हो रहा इस देश में, सरकार कब जागेगी? इन लोगों के आप वोट लेते हो, जमीन लेते हो, जमीन हड़पते हो और जब ये बस अच्छी शिक्षा मांगते हैं, अच्छे स्कूल मांगते हैं, अच्छे हॉस्टल मांगते हैं तो आप इन पर मामले दर्ज करते हैं, इन पर केस दर्ज किए गए। जब आदिवासी बच्चे अपने हक के लिए लड़ेंगे तो आप (सरकार) केस दर्ज करेंगे?”
‘मंत्री के बच्चे खाएंगे यह खाना?’
उन्होंने सरकार से सवाल पूछते हुए कहा, “क्या आप अपने बच्चों को वही खाना खिलाएंगे जो इन बच्चों को मिलता है? रात के दो बजे खाना बनता है और इन बच्चों को वह दोपहर में खाने को मिलता है। मैं मंत्रियों से पूछना चाहता हूं कि क्या आपके बच्चे यह खाना खाएंगे? अगर नहीं तो इन बच्चों को क्यों खाना चाहिए? इनकी जान की कीमत कम है, क्या इन बच्चों की अहमियत कम है? देश को आजाद हुए 80 साल हो चुके हैं लेकिन ये भेदभाव कब तक चलेगा?”
आदिवासी विकास मंत्री को हटाने की मांग
अभिजीत ने आदिवासी विकास मंत्री डॉ. अशोक उईके को हटाने की मांग की। उन्होंने कहा,”आदिवासी मंत्री ने कहा कि सेंट्रलाइज़्ड किचन अच्छी शिक्षा देते हैं। अगर आदिवासी विकास मंत्री को यह भी नहीं पता कि सेंट्रलाइज़्ड किचन खाना देते हैं या शिक्षा, तो वे अपने पद पर कैसे बने रह सकते हैं?”
‘मुंबई जाने का फैसला करते हैं छात्र तो मैं उनके साथ जाऊंगा’
आगे अभिजीत दीपके ने बच्चों से आग्रह किया कि वे भूख हड़ताल खत्म करें लेकिन प्रदर्शन जारी रखें। उन्होंने कहा, “मैंने यहाँ के छात्रों से अपनी भूख हड़ताल खत्म करने की अपील की, लेकिन अपना विरोध-प्रदर्शन वापस न लेने को कहा। इसके बजाय, मैंने उनसे आंदोलन को और मजबूत और बड़ा बनाने का आग्रह किया ताकि आदिवासी छात्रों की आवाज पूरे मुंबई में सुनी जा सके। वे अब अपनी माँगें उठाने के लिए मुंबई जाने पर विचार कर रहे हैं। अगर वे मुंबई जाने का फैसला करते हैं, तो मैं उनके साथ जाऊँगा और उनकी लड़ाई में उनके साथ खड़ा रहूँगा।”
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