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वीडियो: एयरपोर्ट पर यात्री को आया अचानक कार्डियक अरेस्ट, CISF जवान बने भगवान, ऐसे बचाई जान!

इस पूरी घटना का सीसीटीवी वीडियो सामने आया है। शख्स की जान बचाने वाले सीआईएसएफ जवानों के लिए ट्विटर पर लोगों का प्यार उमड़ रहा है और वे उन्हें सलाम कर रहे हैं। सीआईएसएफ एएसआई मोहित कुमार शर्मा ने दो और जवानों के साथ शख्स को सीपीआर दिया था।

एएनआई के द्वारा ट्वीट किए गए वीडियो से लिया गया स्क्रीनशॉट।

मुंबई एयरपोर्ट पर एक यात्री को कार्डियक अरेस्ट आया और वह जमीन पर गिर पड़ा। इसी बीच ड्यूटी पर तैनात सीआईएसएफ जवान शख्स के लिए किसी भगवान की तरह काम आए। जवान जमीन पर पड़े शख्स की तरफ लपके और उसे कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन (सीपीआर) दिया। घटना बीते शुक्रवार (26 अक्टूबर) की है। बाद में शख्स को नानावती अस्पताल में भर्ती कराया गया जहां उसकी हालत स्थिर बनी हुई है। इस पूरी घटना का सीसीटीवी वीडियो सामने आया है। समाचार एजेंसी एएनआई ने घटना का वीडियो ट्वीट किया है। शख्स की जान बचाने वाले सीआईएसएफ जवानों के लिए ट्विटर पर लोगों का प्यार उमड़ रहा है और वे उन्हें सलाम कर रहे हैं। एएनआई के मुताबिक सीआईएसएफ एएसआई मोहित कुमार शर्मा ने दो और जवानों के साथ शख्स को सीपीआर दिया था। बता दें कि सीपीआर यानी कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन एक प्रकार की प्राथमिक चिकित्सा है जो हार्ट अटैक और कार्डियक अरेस्ट की आशंका में मरीज को दी जाती है। आम लोगों को भी जागरूक करने के लिए अक्सर कई सामाजिक संस्थाओं के द्वारा इस थेरेपी का प्रशिक्षण दिया जाता है।

सीपीआर कैसे दिया जाता है: इंटरनेट से प्राप्त जानकारी के अनुसार आपातकालीन स्थिति में किसी व्यक्ति की धड़कन या सांस रुक जाने पर सीपीआर दिया जाता है। इसमें संबंधित व्यक्ति की छाती को दबाया जाता है। मुंह से सांस दी जाती है। सबसे पहले व्यक्ति को समतल जगह पर पीठ के बल लिटाया जाता है। पीड़ित के कन्धों के पास घुटनों के बल बैठकर एक हाथ की हथेली को व्यक्ति की छाती के बीच में रखकर और दूसरी हथेली को उसके ऊपर रखकर दबाया जाता है।

व्यक्ति की छाती को कम से कम 2 इंच से 2.5 इंच तक दबाया जाता है। ऐसा एक मिनट में 100 से 120 बार किया जाता है। अगर सीपीआर देना नहीं आता हो तो संबंधित व्यक्ति के लिए मदद आने तक उसकी छाती दबाते रहें। सीपीआर देना आता है तो कम से कम 30 बार व्यक्ति की छाती को दबाने के बाद उसकी ठोड़ी को उठाकर सांस देनी होती है क्योंकि इससे उसका सिर पीछे की ओर झुकता है और श्वसन नली खुलती है। सांस देने के भी दो तरीके होते हैं, मुंह से मुंह में सांस दी जाती है या मुंह से नाक में सांस दी जाती है। जब तक चिकित्सा सुविधा न पहुंचे और व्यक्ति सांस लेना शुरू न कर दे तब तक सीपीआर दिया जाता है।

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