पुण्यतिथि पर भी रामविलास पासवान की विरासत की जंग अलग-अलग लड़ेंगे चिराग पासवान और पशुपति पारस

रामविलास पासवान की सियासी विरासत को लेकर आमने-सामने हुए चिराग पासवान और पशुपति पारस, पुण्यतिथि को लेकर भी एक दूसरे के सामने नजर आ रहे हैं।

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रामविलास पासवान की बरसी पर साथ होंगे चिराग पासवान और पशुपति पारस लेकिन चलती रहेगी विरासत की जंग। Photo Source- ANI and Indian Express

रामविलास पासवान की सियासी विरासत को लेकर आमने-सामने हुए चिराग पासवान और पशुपति पारस, पुण्यतिथि को लेकर भी एक दूसरे के सामने नजर आ रहे हैं। पशुपति पारस ने भतीजे के आमंत्रण को कबूल कर लिया, वह 12 सितंबर को परिवार की तरह पासवान के मेहमानों का मेजबान बनकर स्वागत करेंगे लेकिन 8 अक्टूबर को खुद भी एक बड़ा कार्यक्रम करेंगे। 12 सितंबर की तरह इस कार्यक्रम में भी राजनीति जगत के तमाम दिग्गजों को आमंत्रित किया जा रहा है।

चिराग पासवान द्वारा आयोजित 12 सिंतबर के कार्यक्रम में प्रधानमंत्री से लेकर सोनिया गांधी, नीतीश कुमार और लालू प्रसाद यादव शामिल होंगे। चिराग की लिस्ट में देश के वरिष्ठ नेताओं के साथ-साथ चाचा पारस और चचेरे भाइयों को भी आमंत्रण भेजा गया था। सभी ने इस कार्यक्रम में शामिल होने में सहमति जताई थी। पार्टी टूट के बाद यह पहला मौका होगा जब पूरा परिवार एक साथ नजर आएगा, लेकिन राजनीतिक तौर पर यहां भी पशपति पारस और चिराग की राहें अलग-अलग नजर आ रही हैं।

पशुपति पारस से जब चिराग संग मतभेदों को लेकर सवाल किए गए तो इसके जवाब में उन्होंने कहा कि राजनीति एक चीज है और पारिवारिक मामला दूसरी चीज है, दोनों दो अलग-अलग चीजे हैं। उन्होंने बताया कि 8 अक्टूबर को पार्टी भी एक मेगा इवेंट की तैयारी में है। पारस ने कहा कि मैं इस कार्यक्रम में प्रधानमंत्री, केंद्रीय गृहमंत्री समेत सभी मुख्यमंत्रियों और अन्य दलों के नेताओं को भी बुलाउंगा। मसलन, विरासत की जंग जारी रहेगी।

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि चिराग पासवान और पशुपति पारस के बीच भले ही राजनीतिक द्वंद चल रहा हो लेकिन उन्होंने अपनी तरफ से सम्मान दिया है। पिता की बरसी के लिए उन्हें न्योता देने भी पहुंचे थे। इसके अलावा चिराग ने जो कार्ड छपवाए हैं उनमें प्रमुखता से चाचा पशुपति पारस का नाम लिखवाया है। वहीं चचेरे भाइयों का भी नाम इस कार्ड पर छपा हुआ है।

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि रामविलास पासवान की पुण्यतिथि का कार्यक्रम 12 सितंबर को पटना में आयोजित किया जाएगा। पासवान का निधन आठ अक्टूबर को हुआ था लेकिन पारंपरिक कैलेंडर के हिसाब से यह तिथि 12 सितंबर को पड़ रही है। रामविलास पासवान के निधन के बाद उनका राजनीतिक दल ‘लोक जनशक्ति पार्टी’ दो खेमों में बंट गई थी। पार्टी का बड़ा धड़ा चिराग के विपरीत चाचा पशुपति पारस के साथ खड़ा हो गया था।

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