केंद्रीय मंत्री और लोक जनशक्ति पार्टी (राम विलास) के अध्यक्ष चिराग पासवान बिहार के बाद अब उत्तर प्रदेश में अपनी पार्टी के लिए जगह बनाने के फिराक में दिख रहे हैं। रविवार को अपने पिता राम विलास पासवान की जयंती के मौक पर उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में अपने पार्टी कार्यकर्ताओं और समर्थकों को संबोधित किया। जबकि पिछले साल यह आयोजन बिहार के हाजीपुर में किया गया था।
यह आयोजन इसलिए अहम माना जा रहा है क्योंकि आगामी वर्ष 2027 में प्रदेश में विधानसभा चुनाव होने हैं, ऐसे में एनडीए के सहयोगी के रूप में लड़ने की योजना बना रही है।
छह महीने से यूपी में सक्रिय
पिछले छह महीनों से चिराग की एलजेपी पार्टी राज्य में काफी सक्रिय रही है। पार्टी सांसद अरुण भारती को यूपी के लिए चुनाव प्रभारी नियुक्त किया गया है। एलजेपी के प्रवक्ता धीरेंद्र कुमार मुन्ना ने ईटी को बताया, “हमने राज्य के विभिन्न जिलों में 80 से अधिक दलित पंचायतों का आयोजन किया है। हम यहां मतदाताओं में अपना हिस्सा लेने आए हैं।”
उन्होंने आगे कहा, पासी-पासवान समाज आमतौर पर बीजेपी से दूर रहता है। हम यहाँ अपने पार्टी के जरिए एनडीए के पक्ष में उस 9.5 प्रतिशत मतदाता आधार को मजबूत करने के लिए आए हैं।
बिहार से बाहर विस्तार करने चाहते हैं चिराग
चिराग बिहार से बाहर भी अपनी पार्टी का विस्तार करने के फिराक में हैं। पार्टी के पास वर्तमान में बिहार में 19 विधायक, नागालैंड में दो और झारखंड में एक विधायक हैं। हालांकि यह राह थोड़ी आसान नहीं हैं क्योंकि यूपी में भाजपा के पहले की तीन सहयोगी दल है- अपना दल, एसबीएसपी और निषाद पार्टी।
भाजपा के लिए खड़ी करेंगे चुनौती
ऐसे में राजनीतिक विद्वान कयास लगा रहे हैं कि एनडीए के भरोसेमंद नेता चिराग पासवान यूपी विधानसभा चुनाव के मद्देनजर अपनी पार्टी की पैठ बनाना चाहते हैं। 2024 के लोकसभा चुनाव में चिराग पासवान चुनाव प्रचार के दौरान खुद को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का खुद को हनुमान होने का दावा किया था। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि क्या ये यूपी के आगामी 2027 के विधानसभा चुनाव में सीट शेयरिंग करने का दबाव तो नहीं बनाने के फिराक में हैं?
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यूपी में जाट बेल्ट की पार्टी कहे जाने वाली रालोद राज्य में करीब-करीब हर बड़ी पार्टी के साथ मिलकर चुनाव लड़ चुकी है। इस बार यूपी विधानसभा चुनाव 2027 में रालोद किसके मिलकर चुनाव लड़ेगी, यह अंदाजा लगाना बेहद मुश्किल है लेकिन फिलहाल हालातों को देखकर ऐसा कहा जा सकता है कि अजित सिंह के वारिस केंद्रीय मंत्री जयंत चौधरी को बीजेपी का साथ बेहद पसंद आ रहा है। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें
