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यूपी: मदरसे में पढ़ाई जा रही तुलसी की चौपाइयां, राम के आदर्शों से भी करा रहे रूबरू

उत्तर प्रदेश में एक मदरसे के बच्चे उर्दू के साथ-साथ संस्कृत और हिंदी की भी पढ़ाई कर रहे हैं। वे रहीम के दोहे भी पढ़ रहे हैं और तुलसी की चौपाइयां भी।

मदरसे में पढ़ाई जा रही तुलसी की चौपाइयां (प्रतीकात्मक तस्वीर)

उत्तर प्रदेश का एक मदरसा ऐसा भी है जो देश में मॉब लिंचिंग और गौहत्या पर छिड़े बहस के बीच सांप्रदायिक सौहार्द का संदेश दे रहा है। यहां के बच्चे उर्दू के साथ-साथ संस्कृत और हिंदी की भी पढ़ाई कर रहे हैं। वे रहीम के दोहे भी पढ़ रहे हैं और तुलसी की चौपाइयां भी। उन्हें भगवान श्रीराम के आदर्शों से रूबरू भी करवाया जा रहा है। बच्चे हिंदू और मुस्लिम दोनों धर्मों की अच्छी बातें सीख रहे हैं। यह मदरसा यूपी के अमरोहा के जब्बारपुर गांव में स्थित है। इसका नाम है तालीमुल कुरान मदरसा। यह गंगा जमुनी संस्कृति की मिसाल पेश करते हुए धर्म के नाम पर नफरत फैलाने वाले लोगों के बीच शांति का संदेश दे रहा है।

अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार, तालीमुल कुरान मदरसा को वर्ष 2009 में मदरसा बोर्ड से मान्यता मिली थी। यहां आलिया तक की पढ़ाई होती है। सबसे खास बात यह है कि यहां पढ़ने वाले कुल बच्चों में से आधे गैर मुस्लिम हैं। मदरसे की खूबसूरती यह है कि यहां गैर मुस्लिम बच्चे भी उर्दू पढ़ते हैं और मुस्लिम बच्चे संस्कृत। मदरसे के संचानक मोहम्मद राहिल का कहना है कि यहां दस शिक्षक पढ़ाने के काम में लगे हैं। बच्चों को हिंदी, उर्दू, संस्कृत, गणित, विज्ञान की पढ़ाई करवायी जाती है। यहां के सभी बच्चों को यह छूट है कि वे जिस विषय को पढ़ना चाहते हैं, पढें। किसी तरह की अनिवार्यता नहीं है। यहां हर बच्चे यूनिफार्म में आते हैं। उनके बैठने के लिए बेंच लगे हैं।

यहां पढ़ाने वाले शिक्षकों का मानना है कि, “शिक्षा सबके लिए होनी चाहिए। धार्मिक आधार पर इसका बंटवारा नहीं किया जा सकता। हमें सभी धर्मों की अच्छी-अच्छी बातें जाननी चाहिए और उसे अपने जीवन में इस्तेमाल करना चाहिए। इस मदरसे में किसी तरह का धार्मिक भेदभाव नहीं होता। सभी बच्चे मिलकर एक साथ पढ़ाई करते हैं।” आज के समय में जब पूरे देश में धर्म के नाम पर उन्माद फैलाने की कोशिश हो रही है। जानवरों को भी धर्म के आधार पर विभाजित किया जा रहा है। एनआरसी ड्राफ्ट रिपोर्ट को भी हिंदू और मुस्लिम नजरिए से विशलेषण किया जाने लगा है। वैसी स्थिति में यह एक सकारात्मक पहल है। धर्मों के बीच बढ़ी दूरी को कम करने का काम रहा है।

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