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यूपी: अस्पताल के बाहर बच्ची ने तोड़ा दम, बाल अधिकार आयोग ने कहा- हो कार्रवाई

उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में एक निजी अस्पताल के बाहर तीन वर्षीया बच्ची के दम तोड़ने के बाद ये जानकारी सामने आई है कि डॉक्टरों ने सर्जरी के बाद बच्ची के जख्म खुले छोड़ दिए थे।

hospitalतस्वीर का इस्तेमाल प्रतीकात्मक तौर पर किया गया है। (Pixabay)।

उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में एक निजी अस्पताल के बाहर तीन वर्षीया बच्ची के दम तोड़ने के बाद ये जानकारी सामने आई है कि डॉक्टरों ने सर्जरी के बाद बच्ची के जख्म खुले छोड़ दिए थे। अस्पताल के किसी कर्मचारी ने इतनी छोटी बच्ची की देखभाल भी नहीं की। वो भी इसलिए क्योंकि बच्ची के मां-ंबाप अस्पताल के बिल का भुगतान नहीं कर सके थे। मामले में संज्ञान लेते हुए राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने मामले में जांच की मांग की है। राज्य की योगी आदित्यनाथ सरकार ने भी मामले में जांच के आदेश दे दिए हैं। मामले से जुड़ा एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल भी हो रहा है।

राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने मामले में तुरंत कार्रवाई किए जाने की मांग की है। कमीशन ने अस्पताल के खिलाफ जरूरी कार्रवाई की मांग भी की है। कमीशन ने कहा कि अगर अस्पताल और डॉक्टरों की ओर से कोई लापरवाही सामने आती है तो मामले में एक्शन लिया जाए। बच्ची के माता-पिता का आरोप है कि अस्पताल ने उनसे पांच लाख रुपये मांगे थे। अस्पताल का रवैया ऐसा कि उन्होंने पैसे न मिलने पर बच्ची को बिना टांके लगाए ऐसी ही डिस्चार्ज कर दिया। हालांकि इस आरोप से अस्पताल ने अपना पल्ला झाड़ा है।

पुलिस ने बताया, शुरुआती जांच में ये जानकारी सामने आई है कि बच्ची को 16 फरवरी को अस्पताल में भर्ती कराया गया था। बच्ची का ऑपरेशन हुआ इसके बाद उसे SRM अस्पताल रेफर कर दिया गया। लेकिन बच्ची के मां-बाप उसे बच्चों के अस्पताल ले गए। वहां उसका इलाज हुआ फिर यहां ले आया गया। लेकिन उसकी मौत हो गई। शव का पोस्टमार्टम कराया जा रहा है।

जो वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है उसमें दिख रहा है कि बेबस बाप अपने हालात बता रहा है और बच्ची उसकी गोद में दर्द से तड़प रही है। वीडियो में बच्ची के पिता कहते दिख रहे हैं,सारा पैसा लेने के बाद डॉक्टरों ने कहा कि अब ये हमारे बस के बाहर है। उन्होंने पांच लाख मांगे, हमने पैसे दिए।तीन बार खून मांगा वो भी दिया।

अस्पताल ने कहा कि बच्ची तीन दिनों से अस्पताल में भर्ती ही नहीं थी। दूसरे अस्पताल में रेफर किए जाने से पहले उसका यहां 15 दिन इलाज चला था। बच्ची के माता-पिता से बस 6 हजार रुपये लिए गए थे।

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