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डॉक्टरों की लापरवाही से गई बच्चे की जान, AIIMS प्रशासन ने झाड़ा पल्ला

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान(एम्स) के इमरजंसी और ओपीडी से लेकर वार्ड तक भटकता लाचार पिता अपने बेटे को बचाने की गुहार डॉक्टरों और नर्सों से लेकर स्वास्थ्य सेवा अधिकारियों तक से लगाता रहा लेकिन कुछ काम नहीं आया।

Author नई दिल्ली | July 19, 2016 2:21 AM
Child died, carelessness, doctors, AIIMS management, delhi newsAIIMS का फाइल फोटो

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान(एम्स) के इमरजंसी और ओपीडी से लेकर वार्ड तक भटकता लाचार पिता अपने बेटे को बचाने की गुहार डॉक्टरों और नर्सों से लेकर स्वास्थ्य सेवा अधिकारियों तक से लगाता रहा लेकिन कुछ काम नहीं आया। सुबह से लेकर रात तक विशेषज्ञ डॉक्टरों के पास भटकने के बावजूद बच्चे को बचाया न जा सका। बीमार बच्चे ने भारी रक्तस्राव के कारण दम तोड़ दिया।

परिजनों का आरोप है कि डॉक्टरों की लापरवाही से बच्चे की जान गई है। बच्चे की मौत बीमारी की गंभीरता के चलते हुई है या इलाज में देरी के कारण यह तो जांच का विषय है पर अपनी गति से चलने वाले इस अस्पताल की जीवन रक्षक सेवा इमरजंसी में कितनी जल्दी सेवा मिलती है इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है। यहां इमरजेंसी इलाज के लिए भी लंबी लाइन में लगनी पड़ती है और इसके बाद भी कोई जरूरी नहीं कि इमरजंसी में इलाज मिल ही जाए। पटना से आए से विनय कुमार झा ने बताया कि बच्चे के मल के रास्ते से रक्तस्राव हो रहा था। जब पटना के डॉक्टरों ने उनके बच्चे पुष्पक कुमार झा(करीब 15) को एम्स रेफर कर दिया तो वे19 सितंबर को सुबह आठ बजे एम्स के इमरजंसी वार्ड में पहुंच गए। यहां डॉक्टरों ने बच्चे की हालत देख कर उसे मेन इमरजेंसी वार्ड में ले जाने को कहा। लेकिन मेन इमरजंसी वार्ड में भी सुनवाई नहीं हुई। बच्चे का खून बहता जा रहा था। हार कर इमरजंसी सीएमओ से गुहार लगाई। पर उन्होंने डांट कर भगा दिया। काफी बार अपील करने पर सिस्टर से एक इंजेक्शन लगाने को कह दिया गया।

उन्होंने बताया कि जब ओपीडी में डॉक्टर को दिखाया तो वहां कहा गया कि बच्चे को इमरजंसी में ले चलो। हम लोग मिन्नतें करने लगे कि बच्चे को खून चढ़ा दिया जाए। हम लोग खून दान करने के लिए भी तैयार थे पर डाक्टरों ने एक न सुनी और गार्ड से धक्के मार कर निकलवा दिया। बच्चे की हालत देख कर चुप रहना ही बेहतर लगा। पर इलाज कुछ शुरू नहीं हो पाया। दिल्ली पुलिस के डीसीपी दक्षिणी दिल्ली को भी इसकी लिखित शिकायत देने वाले विनय ने कहा कि बहुत गुहार लगाने पर अंतत: शाम साढे पांच बजे बच्चे को एक बोतल पानी (सैलाइन वाटर)चढ़ा दिया गया। सुबह से शाम तक न तो बच्चे को कुछ खाने के दिया गया, न इलाज किया गया। बीमारी व भूख से बच्चा तड़प रहा था।

इस बीच डाक्टर रात आठ बजे सफदर जंग अस्पताल भेजने की बात कहने लगे। उसके लिए भी हम तैयार हो गए थे। पर बाद में नहीं भेजा तो काफी कोशिश के बाद नौ बजे बिना जांच किए एक यूनिट खून चढ़ाया जाने लगा। रात डेढ़ बजे सीटी स्कैन की तैयारी हुई। इस बीच लगातार बच्चे की हालत बिगड़ रही थी। करीब साढे चार बजे भोर में बच्चे की हालत और बिगड़ गई। जब तक डाक्टर आए मेरा बच्चा तब तक हमें छोड़ कर जा चुका था। इस मामले में एम्स प्रशासन का कहना है कि मामले की जांच के लिए पांच सदस्यीय समिति बना दी गई है। जांच रपट आने पर कार्रवार्ई होगी।

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