प्रदेश सरकार की ‘मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार योजना’ के अंतर्गत चल रहे मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान का उद्देश्य शिक्षित युवाओं को अपना कारोबार शुरू करने के लिए प्रोत्साहित करना है, लेकिन प्रदेश के सबसे विकसित माने जाने वाले शहरों नोएडा और गाजियाबाद में इस योजना की रफ्तार बेहद धीमी दिखाई दे रही है।
स्थिति यह है कि प्रदेश के 75 जिलों की सूची में गौतमबुद्धनगर सबसे अंतिम स्थान पर पहुंच गया है, जबकि गाजियाबाद 61वें पायदान पर है। इस अभियान के तहत उद्योग क्षेत्र के लिए अधिकतम 25 लाख रुपए और सेवा क्षेत्र के लिए 10 लाख रुपए तक का ऋण उपलब्ध कराया जाता है। वहीं युवा उद्यमी विकास अभियान के अंतर्गत पांच लाख रुपए तक की आर्थिक सहायता दी जाती है। योजना का उद्देश्य युवाओं को रोजगार तलाशने के बजाय खुद रोजगार देने वाला बनाना है। इसके लिए आवेदक का प्रदेश का मूल निवासी होना, आयु 18 से 40 वर्ष के बीच होना और न्यूनतम योग्यता हाईस्कूल पास होना अनिवार्य है।
गाजियाबाद में 5123 आवेदन आए, केवल 1274 आवेदनों को ही मंजूरी
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, गौतमबुद्ध नगर जिले को 1800 लाभार्थियों का लक्ष्य दिया गया था। इसके लिए 2905 आवेदन प्राप्त हुए, जिनमें से 2674 आवेदन बैंकों को भेजे गए, लेकिन केवल 721 युवाओं को ही ऋण स्वीकृत हो सका। गाजियाबाद में भी 2000 के लक्ष्य के मुकाबले 5123 आवेदन आए, मगर अंतत: केवल 1274 आवेदनों को ही मंजूरी मिल सकी।
इसके विपरीत आजमगढ़ जिले ने 2500 के लक्ष्य के मुकाबले 3437 ऋण स्वीकृत कराकर प्रदेश में पहला स्थान हासिल किया है। वहीं, मुख्यमंत्री के गृह जनपद गोरखपुर में 2700 के लक्ष्य के सापेक्ष 1945 आवेदन ही स्वीकृत हो पाए, जिससे वह 36वें स्थान पर रहा। विशेषज्ञों के अनुसार, बड़े शहरों में इस योजना की धीमी प्रगति के पीछे बैंकों का सख्त रवैया और परियोजनाओं को जोखिम भरा मानना मुख्य कारण है।
प्रशासन का कहना है कि कई आवेदनों में दस्तावेजों की त्रुटियां पाई जाती हैं, जबकि युवाओं का आरोप है कि बैंक तकनीकी कारणों का हवाला देकर फाइलें लंबित रख देते हैं। जानकारों का मानना है कि यदि बैंकों और विभागों के बीच बेहतर समन्वय नहीं हुआ तो हाइटेक शहरों के युवाओं के लिए स्वरोजगार का सपना अधूरा रह सकता है।
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केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना के तहत रोजगार आधारित प्रोत्साहन (ईएलआइ) का लाभ जिले में सुस्त रफ्तार से लागू हो पा रहा है। जिले की लगभग 1,700 पात्र कंपनियों ने अब तक योजना के लिए अनिवार्य पंजीकरण नहीं कराया है, जिससे अगले महीने नए कर्मचारियों को मिलने वाली पहली किश्त अटकने की आशंका बढ़ गई है। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां पर करें क्लिक
