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वीडियो: नहीं था एम्बुलेंस, महिलाओं को जवानों ने लादकर पहुंचाया अस्पताल, आईईडी ब्लास्ट में हुई थीं घायल

जब जवान जा रहे थे तभी एक जवान का पैर जमीन के नीचे लगी बारूदी सुरंग पर पड़ गया और ब्लास्ट हो गया।

जंगल के टेढ़े-मेढ़े और पथरीले रास्तों से निकलते हुए ये लोग घायल महिलाओं को बीजापुर के अस्पताल में भर्ती कराने में कामयाब हुए।

देश चरमपंथ, उग्रवाद, नक्सलवाद और आतंकवाद का सामना कर रहा है। हमारे जवान अपनी जान की बाजी लगाकर नागरिकों की सुरक्षा में मुस्तैद हैं। नक्सल प्रभावित छत्तीसगढ़ में भी जवानों ने अपनी जान जोखिम में डालकर न केवल नक्सलियों को खदेड़ा बल्कि इंसानियत का परिचय देते हुए ग्रामीण महिलाओं को समय पर अस्पताल पहुंचाया। दरअसल, छत्तीसगढ़ के बस्तर इलाके में नक्सलियों के खिलाफ चलाए गए अभियान के दौरान बारूदी सुरंग विस्फोट हो गया। इसमें दो स्थानीय महिला घायल हो गईं लेकिन घनघोर जंगल के बीच एम्बुलेन्स नहीं होने से उन्हें तुरंत इलाज मुहैया कराना मुश्किल हो रहा था। ऐसे में जवानों ने हौसले और जज्बात की कहानी लिखी। उनलोगों ने जंगलों से लकड़ी और बांस इकट्ठा कर कांवड़ बनाया और दोनों घायल महिलाओं के उसमें लादकर पैदल ही अस्पताल की ओर चल पड़े। रास्ते में भी नक्सलियों ने बारूदी सुरंग बिछा रखे थे। विस्फोट भी हुए। जवान घायल भी हुए मगर उनकी इंसानियत की लौ बुझ न सकी। वे सकुशल उन घायल महिलाओं को अस्पताल पहुंचाने में कामयाब रहे।

घटना  रविवार (07 जनवरी) की है, जब जवानों का एक दल बस्तर के घोर नक्सल प्रभावित इलाके गंगालूर में सर्च ऑपेरशन पर था लेकिन बीच मे ही नक्सलियों ने एक के बाद एक कई आईईडी ब्लास्ट कर दिए। ब्लास्ट की चपेट में आने से जवान तो बच गए लेकिन पुंसर गांव की दो महिलाएं घायल हो गईं। जब जवान महिलाओं तक पंहुचे तो वे दर्द से कराह रही थीं लेकिन महिलाओं को अस्पताल पंहुचाने के लिए वहां न तो कोई एम्बुलेंस था और ना ही कोई और जरिया। इसके बाद जवानों ने जंगल की लकड़ियों से ही एक कांवड़ बनाई और अपनी जान की परवाह किये बगैर बारूदी सुरंगों के खतरे के बीच महिलाओं को कांवड़ पर लादकर अस्पताल पहुंचाने निकल पड़े।

जब जवान जा रहे थे तभी एक जवान का पैर जमीन के नीचे लगी बारूदी सुरंग पर पड़ गया और ब्लास्ट हो गया। इसमें एक जवान भी घायल हो गया। बावजूद इसके जवानों ने बहादुरी और मानवता का परिचय देते हुए घने जंगलों से निकालकर महिलाओं को अस्पताल पहुंचाया। वीडियो में साफ तौर पर देखा जा सकता है कि दोनों कांवड़ के साथ करीब पांच-छह लोग लच रहे हैं। कांवड़ को दोनों तरफ से डिस्ट्रिक रिजर्व गार्ड के जवान ढो रहे हैं। उनके साथ कुछ महिलाएं पैदल चल रही हैं। जंगल के टेढ़े-मेढ़े और पथरीले रास्तों से निकलते हुए ये लोग घायल महिलाओं को बीजापुर के अस्पताल में भर्ती कराने में कामयाब हुए, जहां उनका इलाज चल रहा है।

यहां देखिए वीडियो:

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