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सीआरपीएफ जवानों पर एफआईआर- स्कूली लड़कियों के पीछे बाथरूम गए और तलाशी के नाम पर कपड़े उतरवाए

जिलाधिकारी के अनुसार करीब 500 स्कूली लड़कियां रक्षाबंधन के मौके पर सीआरपीएफ के जवानों को राखी बांधने आई थीं।
तस्वीर का इस्तेमाल प्रतीक के तौर पर किया गया है।

छत्तीसगढ़ में सीआरपीएफ के जवानों पर नाबालिग लड़कियों के यौन शोषण की एफआईआर दर्ज की गई है। राज्य के माओवाद प्रभावित दंतेवाड़ा जिले में राज्य सरकार द्वारा चलाए जाने वाले पलनाम स्थित आश्रम में रक्षाबंधन के मौके पर आयोजित कार्यक्रम में तलाशी के नाम पर लड़कियों के कपड़े उतरवाकर उनकी तलाशी ली गई। दंतेवाड़ा के जिलाधिकारी सौरभ कुमार ने मीडिया से कहा कि उन्हें अज्ञात सीआरपीएफ जवानों द्वारा कुछ लड़कियों के संग यौन शोषण किया गया है। जिलाधिकारी के अनुसार करीब 500 स्कूली लड़कियां रक्षाबंधन के मौके पर सीआरपीएफ के जवानों को राखी बांधने आई थीं। जिलाधिकारी के अनुसार लड़कियों के शौचालय के पास तैनात सीआरपीएफ के जवानों पर ऐसी हरकत करने का आरोप है। घटना 31 जुलाई की बतायी जा रही है।

जिलाधिकारी, पुलिस एसपी और सीआरपीएफ के डीआईजी ने शिकायत के बाद आश्रम का दौरा किया है। मामले की जांच के लिए एक टीम बनायी गयी है जिसमें दो महिला सदस्य भी हैं। सोमवार (सात अगस्त) को सीआरपीएफ ने शिकायत के बाद आंतरिक जांच की भी संस्तुति की है। शिकायत करने वाली लड़कियां कक्षा 11 की छात्र हैं। पुलिस ने सोमवार को अज्ञात लोगों के खिलाफ बाल यौन शोषण के पोस्को कानून के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया है। शिकायत के अनुसार सीआरपीएफ के दो जवानों ने लड़कियों की कपड़े उतरवाकर तलाशी ली थी।

न्यू इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार लड़कियों को स्कूल में रक्षाबंधन के दिन मौजूद सभी सीआरपीएफ जवानों की तस्वीर दिखाकर आरोपियों की शिनाख्त की जाएगी। सामाजिक कार्यकर्ता हिमांशु कुमार ने इस मामले को फेसबुक पर उठाते हुए लिखा कि कम से कम चार लड़कियों का रक्षाबंधन के मौके पर आयोजित कार्यक्रम में यौन शोषण हुआ है। कुमार ने आरोप लगाया है कि लड़कियों के अलावा ग्रामीणों ने भी घटना की पुष्टि की है।

जनवरी 2017 में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने पाया था कि 2015 में बीजापुर में कम से कम 16 महिलाओं के संग बलात्कार और यौन उत्पीड़न हुआ था जिसके लिए सुरक्षा बल जिम्मेदार बताए गए। छत्तीसगढ़ में पुलिस और सुरक्षा बलों द्वारा मानवाधिकार हनन के मामले राष्ट्रीय मीडिया में आते रहे हैं। पुलिस द्वारा आदिवासी महिला सोनी सूरी के गुप्तांग में पत्थर भरने का मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा था।

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