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वीडियो: किसानों ने एक लाख किलो सब्जी बांटी मुफ्त, कहा- नोटबंदी से हुआ ये हाल

किसानों का कहना है की नोटबंदी की वजह से लोगों की खरीदारी में कमी आई है जिसकी वजह सब्जियों के दाम एक-डेढ़ रुपये प्रति किलो तक गिर गए हैं।

सब्जियों के दाम कम होने के विरोध में सोमवार (दो जनवरी) को छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में किसान संघ के नेता आम लोगों को मुफ्त सब्जी बांटते हुए। (वीडियो स्क्रानशॉट)

सब्जी के गिरते दामों से परेशान छत्तीसगढ़ के किसानों ने सोमवार (दो जनवरी) को रायपुर में करीब एक लाख किलो सब्जी लोगों में मुफ्त बांट दी। किसान संघ ने कुछ दिनों पहले ही फ्री में सब्जी बांटने का ऐलान कर दिया था। संघ ने अपनी घोषणा में कहा था कि हर व्यक्ति को 5 किलो सब्जी मुफ्त दी जायेगी। इसलिए जैसे ही सोमवार को किसान मुफ्त की सब्जी बांटने रायपुर के इंडोर स्टेडियम पहुंचे लोग सब्जी लेने के लिए टूट पड़े और सडकों में जाम लग गया। मुफ्त सब्जी लेने के लिए उमड़ी भीड़ को काबू करने के लिए पुलिस बल तैनात करना पड़ा। किसानों का कहना है की नोटबंदी की वजह से लोगों की खरीदारी में कमी आई है जिसकी वजह से ऐसे हालात हुए हैं।

इससे पहले छत्तीसगढ़  के किसानों ने दाम गिरने के विरोध में सड़क पर टमाटर फेंक कर विरोध जताया था। जिसके बाद किसानों ने यह फैसला किया कि अब वो अपनी सब्जी फेंकेंगे नहीं बल्कि सरकार का ध्यान आकर्षित करने के लिए लोगों को मुफ्त में सब्जी बाटेंगे। सोमवार को छत्तीसगढ़ के दुर्ग, राजनांदगाव, बालोद जिले समेत पूरे प्रदेश से किसान 40 गाड़ियों में करीब एक लाख किलो सब्जी लेकर रायपुर पहुंचे। किसानों का कहना है की उन्हें घर से पैसा लगाना पड़ रहा है। एक से डेढ़ रुपए प्रति किलो के दर से सब्जियां बिक रही हैं।

मुफ्त में सब्जी लेने के लिए महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों के बड़ी संख्या में पहुंचने से सुबह-सुबह पुलिस बल बुलाना पड़ा। सब्जी लेने आये लोगों का कहना था कि उन्हें पहले ही इस बात की ख़बर थी कि फ्री में सब्जी बंटेगी इसलिए वो पहले ही लाइन लगाने पहुँच गए। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह की राजनांदगांव विधानसभा के कई किसानों ने भी सब्जी फ्री में बांटी। इससे पहले किसान सरकार के लोगों से मिलकर अपनी परेशानी बता चुके हैं।

नोटबंदी की वजह से किसान की कोई नहीं सुन रहा है। ऐसे में सरकार के रैवैये को देखते हुए किसानो ने फ्री में ही सब्जी बांटने का फैसला कर लिया। मामला चाहे जो भी हो पर इतना तो तय है कि इस नोटबंदी के चलते आम आदमी और किसान बुरी तरह टूट रहा है। किसानों के इस कदम के बाद अब देखना यह होगा कि सरकार किसानों के हित में क्या फैसला लेती है।

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