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प्राचीन गणेश प्रतिमा को पहाड़ी से गिराकर खंडित किया, नक्सलियों पर शक 

छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित दंतेवाड़ा जिले में लगभग एक हजार वर्ष पुरानी भगवान गणेश की प्रतिमा को पहाड़ी से गिराकर खंडित कर दिया गया।

Author       रायपुर | January 29, 2017 6:40 AM
भगवान गणेश की एक हजार साल पुरानी प्रतिमा।

छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित दंतेवाड़ा जिले में लगभग एक हजार वर्ष पुरानी भगवान गणेश की प्रतिमा को पहाड़ी से गिराकर खंडित कर दिया गया। पुलिस के मुताबिक इस घटना में नक्सलियों का हाथ हो सकता है। दंतेवाड़ा जिले के पुलिस अधीक्षक कमलोचन कश्यप ने बताया कि जिले के फरसपाल थाना क्षेत्र के अंतर्गत ढोलकल पहाड़ी में स्थित भगवान गणेश की प्रतिमा को लगभग एक हजार फुट ऊंची दुर्गम पहाड़ी से गिराकर खंडित कर दिया गया है। कश्यप ने बताया कि 26 जनवरी को गांव के कुछ लोग पहाड़ी पर गए थे तब उन्होंने देखा की प्रतिमा अपनी जगह पर नहीं है। इसके बाद उन्होंने इसकी सूचना पुलिस को दी। पुलिस को जब घटना की जानकारी मिली तब क्षेत्र में पुलिस दल रवाना किया गया और प्रतिमा की तलाश शुरू की गई। बाद में पुलिस दल ने पहाड़ी के नीचे खंडित मूर्ति को बरामद कर लिया। पुलिस अधिकारी ने बताया कि पहाड़ी पर जाकर मुआयना किया गया तब पाया गया कि गणेश प्रतिमा को पहाड़ी के नीचे गिराया गया है। उन्होंने बताया कि इस घटना के पीछे नक्सलियों का हाथ हो सकता है। क्षेत्र में प्राचीण गणेश प्रतिमा होने की जानकारी मिलने के बाद क्षेत्र में लोगों की आवाजाही बढ़ गई है। इससे नक्सलियों को परेशानी महसूस हो रही थी, जिसके कारण उन्होंने प्रतिमा को नुकसान पहुंचाया।

पुलिस अधीक्षक ने बताया कि आसपास के ग्रामीणों से जब पूछताछ की गई तब उन्होंने भी बताया कि क्षेत्र में पिछले कुछ दिनों से नक्सली गतिविधि बढ़ी है तथा वह पहाड़ी के आसपास देखे गए हैं। वैसे भी लगभग चार फुट ऊंची पत्थर की प्रतिमा जिसे दुर्गम पहाड़ी के ऊपर स्थापित किया गया था उसे एक स्थान से अन्य स्थान पर ले जाना मुश्किल है। प्रतिमा को नुकसान पहुंचाने के लिए उसे वहां से हटाया गया है। कश्यप ने बताया कि इसके साथ ही अन्य वजहों को भी तलाशा जा रहा है, जिससे घटना के बारे में सही जानकारी मिल सके। जानकारों के मुताबिक फरसपाल से लगभग 14 किलोमीटर दूर जंगल के भीतर ढोल की आकृति वाली पहाड़ी के ऊपर नागवंशीय राजाओं ने लगभग चार फुट उंची गणेश प्रतिमा की स्थापना की थी। नागवंशीय राजाओं ने इस प्रतिमा की स्थापना नौवीं या दसवीं शताब्दी में की गयी थी। दुर्गम पहाड़ी वाले इस इलाके में पैदल ही पहुंचा जा सकता है। यही कारण है कि यहां कम सैलानी ही जा सकते हैं। वहीं सीधी चढ़ाई वाले इस पहाड़ी पर चढ़ना मुश्किल है।

इधर, घटना के बाद राज्य सरकार ने दुख व्यक्त करते हुए मामले की जांच शुरू कर दी है। आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि राज्य के पर्यटन और संस्कृति मंत्री दयाल दास बघेल ने दंतेवाड़ा जिले में ढोलकल की पहाड़ियों में पुरातात्विक महत्व की गणेश प्रतिमा क्षतिग्रस्त होने पर दुख व्यक्त किया है। बघेल ने कहा है कि पहाड़ी से गिरने पर प्रतिमा के लगभग आठ टुकड़े हो गए हैं। प्रथम दृष्टि में यह असामाजिक तत्वों की आपराधिक हरकत प्रतीत हो रही है। पुरातत्व विभाग और जिला प्रशासन के अधिकारियों सहित पुलिस ने भी तत्परता से मामले की जांच शुरू कर दी है। जांच में जो भी दोषी पाया जाएगा, उस पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। मंत्री ने बताया कि राज्य सरकार ने प्रतिमा गिरने की घटना को अत्यंत गंभीरता से लिया है। राज्य सरकार के संस्कृति और पुरातत्व विभाग तथा जिला प्रशासन दंतेवाड़ा के अधिकारियों की टीम को तत्काल दंतेवाड़ा कलेक्टर के नेतृत्व में मौके पर भेजा गया। टीम में शामिल अधिकारियों ने स्थल निरीक्षण किया है।

बघेल ने यह भी बताया कि पुरातत्व विशेषज्ञ अरूण कुमार शर्मा जल्द घटना स्थल पहुंचने वाले हैं। घटना की जानकारी मिलते ही राज्य सरकार के निर्देश पर संचालक पुरातत्व एवं संस्कृति आशुतोष मिश्रा पहले दंतेवाड़ा के लिए रवाना हो गए है। शर्मा और मिश्रा स्थानीय अधिकारियों के साथ सम्पूर्ण तथ्यों का पता लगाएंगे। मंत्री ने बताया कि राज्य शासन द्वारा दंतेवाड़ा जिला प्रशासन के सहयोग से ढोलकल की पहाड़ी को एक प्रमुख ट्रैकिंग स्थल के रूप में विकसित किया जा रहा है। बड़ी संख्या में पर्यटक वहां आने लगे हैं। गणतंत्र दिवस के अवसर पर भी सैलानी वहां पहुंचे थे। प्रतिमा गिरने और क्षतिग्रस्त होने पर सबको दु:ख पहुंचा है।

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