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छत्तीसगढ़ में थम नही रही नक्सली घटनायें, सम्भावित इलाकों में शासन क्यों नहीं कर रहा ड्रोन से निरीक्षण : सिंहदेव

बस्तर में ड्रोन से कौन निरीक्षण कर रहा है? यह सवाल गुरुवार को छत्तीसगढ़ विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टी.एस. सिंहदेव ने सत्ता पक्ष से पूछा। वह बस्तर के कोत्ताचेरू में हुए नक्सली हमले के मुद्दे को लेकर काम रोको प्रस्ताव पर बोल रहे थे।

Author रायपुर | March 17, 2017 1:35 AM
बस्तर में ड्रोन से कौन निरीक्षण कर रहा है? यह सवाल गुरुवार को छत्तीसगढ़ विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टी.एस. सिंहदेव ने सत्ता पक्ष से पूछा। वह बस्तर के कोत्ताचेरू में हुए नक्सली हमले के मुद्दे को लेकर काम रोको प्रस्ताव पर बोल रहे थे।

बस्तर में ड्रोन से कौन निरीक्षण कर रहा है? यह सवाल गुरुवार को छत्तीसगढ़ विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टी.एस. सिंहदेव ने सत्ता पक्ष से पूछा। वह बस्तर के कोत्ताचेरू में हुए नक्सली हमले के मुद्दे को लेकर काम रोको प्रस्ताव पर बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि सदन में कई बार शासन ने अपने ड्रोन तंत्र की बात कही तो बस्तर में ड्रोन से निरीक्षण क्यों नहीं हो रहा? नक्सली जवानों के हथियार और सामान लूट कर ले गए? बीच भाजपा सदस्य प्रेमप्रकाश पाण्डेय ने कहा कि घटना से संबंधित मूल बातें तो हो नहीं रही। इतिहास पर कहा जा रहा है। इस कारण इसे ग्रा’ क्यों किया जाए? इस पर नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि शासन चाहती ही नहीं सदन में मूलभूत बातें रखी जाएं।

नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि मूल बातें ही तो कही जा रही हैं। इतिहास बताना इसलिए भी आवश्यक है कि बार-बार पुनरावृत्ति के बाद भी सीख नहीं ली जा रही है। घटनाएं थम नहीं रही है। घटनास्थल से डेढ़ किलोमीटर पहले कैंप हैं और यहां से डेढ़ किलोमीटर दूर ही हमारी सुरक्षा व्यवस्था में सेंध लगी। तीन माह से घटना की प्लानिंग हो रही थी। बैठकें हो गईं और सरकार के खुफिया तंत्र को भनक तक नहीं लगी। सुकमा जिले कोत्तचेरू के जंगल में सीआरपीएफ 219 वीं बटालियन पर 11 मार्च को हुए नक्सली हमले पर आज विपक्ष ने काम रोको प्रस्ताव लाकर ग्रा’ता पर चर्चा की मांग की।

नेता प्रतिपक्ष सिंहदेव ने कहा कि शासन की प्राथमिकता और जवाबदारी लगातार फेल हो रही है। बार-बार दावे करने के बाद भी घटनाओं का पुनरावृत्ति हुई है। कांग्रेस सदस्यों ने शून्य काल के दौरान उस घटना पर चर्चा की मांग को उठाया। शासन का पक्ष जानकर विधानसभा अध्यक्ष गौरीशंकर अग्रवाल ने प्रस्ताव को नामंजूर कर दिया। कांग्रेस सदस्य मोहन मरकाम ने कहा कि एक तरफ छत्तीसगढ़ सरकार कहती है कि यहां नक्सली गतिविधियों में 15 फीसदी कमी आयी है वहीं केन्द्र ने माना है कि छत्तीसगढ़ में नक्सली घटनाओं में 42 फीसदी की बढ़ोत्तरी हुई है। कांग्रेस सदस्य कवासी लखमा ने कहा कि कैंप क्षेत्र में जंगल नहीं है, मैदान है। यहां पूर्व में मुख्यमंत्री गए थे, मोटरसाइकिल से दौरा भी किया था, फिर कैसे नक्सली जवानों के हथियार साथ ले गए।

गृहमंत्री रामसेवक पैकरा ने कहा कि ऐसा कहना सही नहीं है कि सरकार की नक्सल रणनीति कारगार नहीं है, बल्कि 2016 में 135 तथा इस वर्ष 13 मार्च तक 160 नक्सली मुठभेड़ में मारे गए हैं। 348 हथियार जब्त किये गए तथा 1121 नक्सलियों को गिरफ्तार किया गया है। 1768 किलोग्राम वजन के कुल 368 आईईडी भी बरामद कर हमले के मनसूबों को विफल किया गया है। उन्होंने बताया कि इंजरम से भेजी अत्यंत नक्सल प्रभावित इलाका है, जहां सड़क निर्माण किया जा रहा है। प्रगति से क्षुब्ध होकर अपना वर्चस्व बनाए रखने के लिए घटना को अंजाम दिया गया है। राज्य शासन की आत्मसमर्पण नीति भी उपयुक्त साबित हो रही है। नीति से प्रभावित होकर वर्ष 2016 में 1214 एवं इस वर्ष 211 माओवादियों ने आत्मसमर्पण किया है। इसी तरह पुलिस के सूचना तंत्र में विकास हुआ है। इस कारण ही पिछले वर्ष की तुलना में इस वर्ष नक्सली अपराधों में 15 प्रतिशत की कमी आई है। नक्सलियों में सुरक्षा बलों के अभियानों का भय व्याप्त है।

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