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सरकारी जांच में फर्जी निकली छत्तीसगढ़ के पहले सीएम की जाति, बेटे अमित जोगी की विधायकी भी खतरे में

कोर्ट में इस मामले को लेकर दो अलग-अलग याचिका दाखिल होने के बाद उच्च स्तरीय कमेटी का गठन किया गया था।

Author रायपुर | July 3, 2017 20:41 pm
छत्तीसगढ़ के पूर्व सीएम अजीत जोगी। (Photo Source: Facebook@ajitjogi)

छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा गठित की गई उच्च स्तरीय कमेटी ने अपनी एक जांच में पाया है कि राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी आदिवासी समुदाय से नहीं आते हैं। कमेटी ने जोगी का अनुसूचित जनजाति का होने से इनकार कर दिया है। कमेटी का कहना है कि जोगी संवैधानिक जाति का लाभ प्राप्त नहीं कर सकते हैं क्योंकि वे कंवर जाति से ताल्लुक नहीं रखते हैं। सरकार द्वारा इस रिपोर्ट को सार्वजनिक नहीं किया गया है क्योंकि सरकार नहीं चाहती कि इस मामले को राजनीतिक मुद्दा बनाया जाए। वहीं इस मामले की रिपोर्ट अजीत जोगी को भी भेजी गई है जिसके बाद जोगी इसके खिलाफ कोर्ट जाने की तैयारी कर रहे हैं।

बता दें कि जब छत्तीसगढ़ राज्य का गठन हुआ था तब से ही अजीत जोगी के आदिवासी जाति से होने पर सवाल खड़े होते रहे हैं। उनके राजनीतिक दुश्मनों ने इस मामले की याचिका कोर्ट में दाखिल की जिसमें कहा गया कि जोगी का परिवार बिना एसटी कोटे में आए हुए इसका लाभ ले रहा है। कोर्ट में इस मामले को लेकर दो अलग-अलग याचिका दाखिल होने के बाद उच्च स्तरीय कमेटी का गठन किया गया था। इस मामले के सामने आने के बाद अजीत जोगी के बेटे अमित जोगी की विधायकी भी खतरे में पड़ सकती है। छत्तीसगढ़ गठन के बाद कांग्रेस सरकार ने अजीत जोगी को राज्य का मुख्यमंत्री बनाया था। इसके बाद से ही बीजेपी जोगी की जाति को लेकर उनपर सवाल उठाती रही है।

हालांकि एक साल पहले अजीत जोगी कांग्रेस से अलग हो गए थे और उन्होंने अपनी नई पार्टी बना ली। पिछले दो सालों से अजीत जोगी की जाती को लेकर सुनवाई चल रही थी। कमेटी द्वारा जारी किए गए इस निर्देश पर अमित जोगी ने इंडियन एक्सप्रेस से कहा कि वे इस रिपोर्ट के खिलाफ हाई कोर्ट में जाएंगे। अमित ने कहा कि कमेटी ने सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन्स को फॉलो नहीं किया है क्योंकि यह कमेटी सरकार द्वारा बनाई गई है। अमित ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा इस प्रकार के मामलों को सुलझाने के लिए 7 सदस्यी कमेटी का गठन करने का उदाहरण दिया गया है लेकिन इस कमेटी में केवल चार सदस्य हैं जो कि अलग-अलग पद पर नियुक्त हैं। यह सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का स्पष्ट तौर पर उल्लंघन है और इससे सरकार का इरादा पता चलता है। इसके बाद अमित ने कहा कि अगर हम आदिवासी नहीं हैं तो कमेटी हमें बताए कि हमारी जाति क्या है। यह मामला उस समय क्यों नहीं उठाया गया जब मेरे पिता एक आईएएस अधिकारी के तौर पर देश की सेवा कर रहे थे।

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