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3 अस्पतालों के स्टाफ ने गर्भवती महिला को भर्ती करने से किया मना, मजबूरन छप्पर के नीचे दिया बच्चे को जन्म

मुस्कान को बहुत पीड़ा हो रही थी लेकिन अस्पताल के डॉक्टरों ने यह नजर अंदाज कर दिया।
Author बिलासपुर | May 20, 2017 15:54 pm
इस तस्वीर का इस्तेमाल केवल प्रतीक के तौर पर किया गया है।

एक तरफ तो प्रदेश में प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान चलाया जा रहा है वहीं दूसरी तरफ राज्य के जिले के अस्पतालों का यह हाल है कि वे गर्भवती महिला को एडमिट ही नहीं करते हैं। इस अभियान का उद्देश्य है कि मां-बच्चे की हर प्रकार से सुरक्षा की जाए और उन्हें हर रूप से स्वस्थ्य रखा जाए लेकिन छत्तीसगढ़ में इस अभियान की धज्जियां उड़ रही हैं। राज्य पुलिस ने बिलासपुर जिले के तीन अस्पतालों के स्टाफ को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया है। इन तीनों अस्पतालों पर आरोप है कि इन्होंने एक गर्भवती विधवा को प्रसव पीड़ा के दौरान अस्पताल में भर्ती नहीं किया, जिसके कारण महिला को मजबूरन 47 डिग्री तापमान में बिना किसी मेडिकल सुविधा के एक छप्पर के नीचे अपने बच्चे को जन्म देना पड़ा। यह मामला जिले के बिल्हा ब्लॉक का है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार सिरगीट्टी गांव की रहने वाली 27 वर्षीय मुस्कान को 17 मई को प्रसव पीड़ा हुई। मुस्कान के पड़ोसियों ने उसकी मदद के लिए महतारी एक्सप्रेस एंबुलेंस को फोन कर आना के लिए कहा लेकिन करीब डेढ़ घंटे इंतजार करने के बाद भी एंबुलेंस नहीं आई। काफी इंतजार करने के बाद स्थानीय लोग मुस्कान को पास के सामुदायिक चिकित्सिक केंद्र ले गए। ग्रामीणों ने कहा कि वहां पहुंचने के बाद पहले तो सुरक्षाकर्मी ने उन लोगों के साथ गाली-गलौच की और वहां के डॉक्टरों ने मुस्कान को बिलासपुर स्थित छत्तीसगढ़ इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस ले जाने के लिए कहा। ग्रामीणों ने बताया कि वहां गए तो डॉक्टरों ने मुस्कान को भर्ती करने से इंकार कर दिया।

डॉक्टरों ने ग्रामीणों से कहा कि हमारे पास खाली बेड नहीं है। इसके बाद ग्रामीण मुस्कान को जिला अस्पताल लेकर गए लेकिन वहां के स्टाफ नें भी मुस्कान को भर्ती नहीं किया। मुस्कान को बहुत पीड़ा हो रही थी लेकिन अस्पताल के डॉक्टरों ने यह नजर अंदाज कर दिया। ग्रामीणों ने कहा कि हमारे पास राज्य मंत्री अमर अग्रवाल का रेफ्रेंस वाला पत्र भी था लेकिन तीनों अस्पतालों ने मुस्कान को भर्ती करने से इनकार कर दिया। इस बीच मुस्कान को ज्यादा दर्द होने लगा तो गांव की कुछ औरतों ने एक छप्पर के नीचे उसकी डिलीवरी कराई। मीडिया में इस मामले के तूल पकड़ने के बाद जिला अस्पताल ने मुस्कान को भर्ती किया। इस बारे में जब जिला अस्पताल से पूछा गया तो उन्होंने कहा कि जो स्टाफ उस समय ड्यूटी पर था उनसे गलती हो गई। इस मामले की जांच की जाएगी।

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