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मायावती ने कांग्रेस को दिया झटका, छत्तीसगढ़ में अजित जोगी की पार्टी से किया गठबंधन

बसपा ने मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान तीनों राज्यों में चुनाव पूर्व गठबंधन की शर्त रखी थी।

Author September 21, 2018 8:23 AM
बसपा ने मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान तीनों राज्यों में चुनाव पूर्व गठबंधन की शर्त रखी थी। (फाइल फोटो)

आगामी विधान सभा चुनावों और लोकसभा चुनावों के लिए प्रस्तावित महागठबंधन बनने से पहले ही बसपा सुप्रीमो मायावती ने कांग्रेस को जोरदार झटका दिया है। मायावती ने छत्तीसगढ़ विधान सभा चुनावों के लिए अजित जोगी की जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ से गठबंधन किया है। दोनों दलों के बीच हुए समझौते के मुताबिक 90 सदस्यीय विधान सभा के लिए अजित जोगी की पार्टी 55 सलीटों पर उम्मीदवार खड़ा करेगी जबकि मायावती की पार्टी 35 सीटों पर उम्मीदवार उतारेगी। अगर गठबंधन जीता तो अजित जोगी राज्य के मुख्यमंत्री होंगे। समाचार एजेंसी एएनआई से मायावती ने खुद कहा कि उनकी पार्टी बसपा और जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ में गठबंधन हो गया है। इससे पहले अंदेशा जताया जा रहा था कि मायावती कांग्रेस के साथ गठबंधन करेंगी। अजित जोगी के साथ बसपा के गठबंधन से महागठबंधन के भविष्य पर सवाल उठने लगे हैं क्योंकि मायावती पिछले कई दिनों से यह कहती आ रही हैं कि सम्मानजनक सीटें मिलने पर ही गठबंधन करेंगी। बसपा ने मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान तीनों राज्यों में कांग्रेस से चुनाव पूर्व गठबंधन की शर्त रखी थी।

उधर, राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री और जनता पार्टी छत्तीसगढ़ के चीफ अजित जोगी ने कहा कि पिछले 15 वर्षों से राज्य में बीजेपी की रमन सिंह सरकार है जो सत्ता, पैसे और प्रशासनिक तंत्र का दुरुपयोग कर फिर से सत्ता में वापस आना चाहती है। उन्होंने कहा, “अब हमारा गठबंधन हो गया है। मायावती जी और हमलोग मिल कर बीजेपी को रोक लेंगे।” बता दें कि कि इस साल के अंत तक दिसंबर में छत्तीसगढ़ में विधान सभा चुनाव होने हैं। 2013 के विधान सभा चुनावों में बीजेपी को 49, कांग्रेस को 39 सीटें मिली थीं। बसपा को एक सीट पर संतोष करना पड़ा था। हालांकि, अजित जोगी की पार्टी का एक भी उम्मीदवार वहां नहीं जीत सका था।

राज्य में दलित वोट बैंक को लेकर पिछले कुछ महीनों से राजनीति चरम पर है। पिछले दिनों बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर के पोते प्रकाश आंबेडकर ने ङी अजित जोगी से मुलाकात की थी और उनसे बीजेपी के खिलाफ एकजुट होकर लड़ने की अपील की थी। वहां करीब 12 फीसदी आबादी दलितों की है और 10 सीटें अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित हैं। इनके अलावा 29 सीटें अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित हैं। एससी-एसटी एक्ट को लेकर जिस तरह से पिछले दिनों दलित समुदाय में बीजेपी के खिलाफ गुस्सा बढ़ा है, उसका फायदा इन दलों को मिलने की संभावना है।

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