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छत्तीसगढ़ः जब बीच सड़क पर जज ने लगा दी अदालत, दिव्यांग फरियादी को दिलाए 20 लाख रुपये

लोक अदालत के दौरान कोरबा के सेशन जज को जब खबर लगी कि सुनवाई के लिए पहुंचा दिव्यांग युवक चल नहीं सकता तो वह खुद उसके पास चले गए। सड़क पर मामले की सुनवाई की। राजीनामा कराकर 20 लाख रुपये की क्षतिपूर्ति आवेदक को दिलाई हई।

छत्तीसगढ़ः जब बीच सड़क पर जज ने लगा दी अदालत, दिव्यांग फरियादी को दिलाए 20 लाख रुपये
छत्तीसगढ़ के कोरबा में सेशन जज ने बीच सड़क पर सुनाया फैसला। (फोटोः स्क्रीनशॉट MPTAK VIDEO)

मामला चौंकाने वाला है लेकिन है सोलह आने सच। लोक अदालत के दौरान कोरबा के सेशन जज को जब खबर लगी कि सुनवाई के लिए पहुंचा दिव्यांग युवक चल नहीं सकता तो वह खुद उसके पास चले गए। सड़क पर मामले की सुनवाई की। राजीनामा कराकर 20 लाख रुपये की क्षतिपूर्ति आवेदक को दिलाई हई। फिलहाल ये मामला चर्चा का विषय बना है।

मामले के अनुसार 3 दिसंबर 2018 को सुबह लगभग 5 बजे द्वारिका प्रसाद कंवर गाड़ी से कोरबा जा रहा था। मानिकपुर के पास सुनील कुमार यादव के ट्रेलर के ड्राइवर राजकुमार ने उसको टक्कर मारकर घायल कर दिया गया। दुर्घटना के बाद आवेदक के गर्दन के पास रीढ़ की हड्डी टूट गई। शरीर के इस हिस्से में ऑपरेशन कर रॉड डाला गया, लेकिन हादसे के बाद से ही द्वारिका प्रसाद का पूरा शरीर अपंग हो गया था।

3 साल पहले दिव्यांग हुए युवक ने बीमा कंपनी के खिलाफ अर्जी लगाई थी। बीती 11 सितंबर को कोरबा में लगाई गई लोक अदालत में युवक के मामले की सुनवाई थी। वहीं, सुनवाई के लिए पहुंचा दिव्यांग युवक चल नहीं सकता था, लिहाजा वह अदालत में नहीं पहुंच सका। सेशन जज बीपी वर्मा को जानकारी मिली कि फरियादी चलने से लाचार है तो वे खुद उसकी कार के पास पहुंच गए। वहीं पर मामले की सुनवाई की।

जज ने केस से संबंधित दस्तावेज व मामले से जुड़े पक्ष को कार के पास ही बुला लिया। सुनवाई के बाद फरियादी दिव्यांग युवक और बीमा कंपनी के बीच समझौता कराया गया। राजीनामा के बाद युवक को 20 लाख रुपए की मुआवजा राशि देने का फैसला कोर्ट ने सुनाया। बीते शनिवार को जज द्वारा फैसला सुनाए जाने के बाद दिव्यांग फरियादी द्वारिका प्रसाद ने खुशी जाहिर की। कोर्ट की इस पहल पर आभार जताया।

उधर, सोशल मीडिया पर जज की इस पहल की सराहना की जा रही है। लोगों का कहना है कि ये वाकई बेहतरीन काम था। अपंग को न्याय दिलाने खुद जज उसके पास पहुंचे और दूध का दूध पानी का पानी करके उसे न्याय दिलाया। लोगों का कहना है कि न्यायपालिका ने दिखाया कि उसके लिए फरियादी को न्याय दिलाना कितना अहम है। ये सबको आत्मसात करना चाहिए।

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