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छत्तीसगढ़: कोरोना मरीजों के लिए 8 बेड्स की ICU फैसिलिटी, एक्टिव केस 10 हजार पार, इस छोटे शहर में कहर बरपा रही संक्रमण की दूसरी लहर

दुर्ग और रायपुर के बीच में एक जंक्शन की तरह मौजूद होने की वजह से बेमेतरा में लोगों की आवाजाही लगातार जारी है, जिसके चलते कोरोना के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं।

Author Edited By कीर्तिवर्धन मिश्र बेमेतरा | Updated: April 14, 2021 8:59 AM
Coronavirus, Chhattisgarh, Bemetaraछत्तीसगढ़ के बेमेतरा में सरकारी अस्पताल में नहीं हैं कोरोना मरीजों के लिए बेहतर व्यवस्था। (एक्सप्रेस फोटो- गार्गी वर्मा)

भारत में कोरोनावायरस के केस तेजी से बढ़ रहे हैं। इन सबसे ऊपर महाराष्ट्र है। हालांकि, छोटे राज्यों की बात की जाए, तो छत्तीसगढ़ के हालात काफी खराब हैं। यहां फिलहाल एक्टिव केसों की संख्या एक लाख के पार जा चुकी है, जो कि महाराष्ट्र (5.93 लाख) के बाद सबसे ज्यादा है। हालांकि, दोनों राज्यों की स्वास्थ्य व्यवस्थाओं के फर्क को देखते हुए छत्तीसगढ़ के हालात सबसे खराब कहे जा सकते हैं। दरअसल, दूसरी लहर के बीच कोरोनावायरस अब राज्य के छोटे जिलों में भी घुस चुका है। इनमें सबसे खराब हालात बेमेतरा के हैं।

आंकड़ों के मुताबिक, पिछले साल अक्टूबर में जब देश में कोरोना के केस लगातार नए रिकॉर्ड बना रहे थे, तब छत्तीसगढ़ के बेमेतरा में एक हजार केस रिकॉर्ड हुए थे। लेकिन दूसरी लहर के बीच इस साल एक अप्रैल तक जिले में एक्टिव केसों की संख्या 6300 पहुंच गई। 12 अप्रैल तक सक्रिय मरीजों की संख्या 9700 तक आ गई है। इन सबके बीच चौंकाने वाली बात यह है कि जिले में कोरोना के गंभीर मरीजों के इलाज के लिए सरकारी अस्पताल में सिर्फ 8 बेड्स की एक फैसिलिटी है।

डॉक्टर बोले- कोरोना के प्रति लापरवाह हो गए आम लोग: बता दें कि छत्तीसगढ़ में फिलहाल कोरोना के 1 लाख 9 हजार केस हैं। एक जिला स्वास्थ्य अधिकारी ने बताया कि बेमेतरा में हमें हर दिन 200 केस मिल रहे हैं, ये सभी इलाकों से आ रहे हैं। सभी मरीजों में एक जैसे ही लक्षण मिल रहे हैं। कुछ महीनों की कोताही की वजह से लोगों का लगा कि कोरोनावायरस खत्म हो गया। यहां तक कि जब लोगों में कोरोना के लक्षण दिखने भी शुरू हुए तो उन्हें लगा कि यह आम सर्दी-जुकाम के लक्षण हैं और स्थिति गंभीर होने से पहले कोई भी अस्पताल नहीं आया।

बेेमेतरा जैसे छोटे जिले में कैसे बढ़े केरोना केस?: जिले के स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि बेमेतरा दुर्ग और रायपुर के बीच में एक जंक्शन की तरह है। ऐसे में यहां आए कई मामले दूसरे जिलों की वजह से बढ़े हैं। यहां के जो लोग इन दोनों जिलों में काम करते हैं, बीमार होने के बाद वे भी बेमेतरा लौट रहे हैं। ऐसे में जिले में कोरोना का बढ़ना तय है। जिला अस्पताल के डॉक्टरों के मुताबिक, कोरोना में आई तेजी की वजह से सभी लोग 75 प्रतिशत सप्लाई के साथ ही काम कर रहे हैं और अस्पताल में कोरोना विशेषज्ञ तक नहीं है। सभी डॉक्टर और स्टाफ के सदस्य अलग-अलग भूमिकाएं निभा रहे हैं, ताकि संसाधनों को खराब होने से रोका जा सके।

कोविड फैसिलिटी में भर्ती मरीजों की जान बचाना भी चुनौती: अफसरों का कहना है कि अस्पताल में एक नया ऑक्सीजन प्लांट भी बना है। लेकिन यहां रेमडेसिविर की कमी है। ऐसे में डॉक्टरों को फैसला करना पड़ रहा है कि किसे रेमेडेसिविर का डोज देना है और किसे नहीं। जल्द ही सप्लाई आने की संभावनाएं हैं। हालांकि, 8 बेड्स की फैसिलिटी के बीच डॉक्टरों को मरीजों की जान बचाने के लिए भी मशक्कत करनी पड़ रही है।

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