छत्तीसगढ़ के सक्ती जिले में वेदांता लिमिटेड के पावर प्लांट में हुए धमाके में मरने वालों की संख्या बढ़कर अब 21 हो गई है। 21वीं मौत रायपुर के काल्डा अस्पताल में एक और मजदूर ने चोटों के कारण हुई है। डाक्टरों ने कहा कि पांच अन्य की हालत गंभीर बनी हुई है और नौ लोग भी देखरेख में हैं।

शुक्रवार को विधानसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस के विधायक चरण दास महंत ने वेदांता समूह के अधिकारियों के लिए खिलाफ हत्या की श्रेणी में न आने वाले मानव वध का मामला दर्ज करने की मांग की।

छत्तीसगढ़ में अत्याधुनिक बर्न अस्पताल की जरूरत

प्रेस कांफ्रेंस के दौरान चरण दास महंत ने कहा, “मामले में हमें एसडीएम स्तर की जांच के बजाय एक न्यायिक जांच की जरूरत है। जो घायल हैं, उनका मुंबई या कोयंबतूर के स्पेशल बर्न यूनिट में इलाज कराया जाना चाहिए। छत्तीसगढ़ में एक अत्याधुनिक बर्न अस्पताल ज़रूर होना चाहिए।”

छत्तीसगढ़ विधानसभा में पेश किए गए आंकड़ों का हवाला देते हुए प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रभारी दीपक बैज ने कहा, “पिछले तीन सालों में राज्य में औद्योगिक दुर्घटनाओं में लगभग 300 (296) मजदूरों की मौत हुई और 248 मजदूर घायल हुए हैं।”

एक वेंटिलेटर सपोर्ट पर

गुरुवार रात रायपुर के काल्डा अस्पताल में एक और मजदूर ने अपनी चोटों के कारण दम तोड़ दिया। मृतक किस्मत बरकत अली, मध्य प्रदेश के सिंगरौली का रहने वाला था। किस्मत बरकत अली और तीन अन्य मजदूरों को बुधवार तड़के काल्डा अस्पताल ले जा गया था, जहां पहुंचते ही दो को मृत घोषित किया गया है। चौथा मजदूर, झारखंड के गढ़वा का उपेंद्र साह, 90 प्रतिशत से अधिक जलने की चोटों के साथ वेंटिलेटर सपोर्ट है।

यह घटना मंगलवार दोपहर करीब 2.30 बजे हुई, जब वेदांता पावर प्लांट के बॉयलर-01 में एक जोरदार धमाका हुआ। बॉयलर के मुख्य निरीक्षक की शुरुआती तकनीकी रिपोर्ट में कहा गया कि भट्टी के भीतर ईंधन के अधिक जमा हो जाने से दबाव ज्यादा बढ़ गया, जिसके कारण यह धमाका हुआ। रिपोर्ट के मुताबिक, इस दबाव के कारण बॉयलर का निचला पाइप अपनी तय जगह से हट गया, जिससे यह हादसा हुआ। शक्ति स्थित फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी की एक रिपोर्ट ने भी इस बात की पुष्टि की है कि ईंधन का जमा होना और उससे पैदा हुआ दबाव ही धमाके के मुख्य कारण थे।

लापरवाही हुई उजागर

आधिकारिक बयान में कहा गया, “जांच के दौरान यह बात सामने आई है कि वेदांता कंपनी और एनजीएसएल ने मशीनरी और उपकरणों के रखरखाव तथा संचालन से जुड़े मानकों का ठीक से पालने नहीं किया। उपकरणों के रखरखाव में लापरवाही और संचालन में हुई चूक के कारण बॉयलर के दबाव में अचानक उतार-चढ़ाव हुआ, जिसके कारण यह हादसा हुआ। मिले सबूतों और तकनीकी रिपोर्टों के आधार पर, इस घटना में साफ-साफ लापरवाही उजागर हुई है।”

गुरुवार को बीएनएस की धाराओं के तहत लापरवाही से हुई मौत और अन्य प्रावधानों के तहत वेदांता कंपनी के डायरेक्टर अनिल अग्रवाल, कंपनी के मैनेजर देवेंद्र पटेल और अन्य जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ प्रथम दृष्टया लापरवाही के आरोप में एफआईआर दर्ज की गई है।

वेदांता ने भी शुरू की जांच

मामले को लेकर वेदांता लिमिटेड छत्तीसगढ़ थर्मल पावर प्लांट ने कहा कि उसकी तत्काल प्राथमिकता प्रभावित लोगों को सबसे बेहतर चिकित्सा सहायता और इलाज कराना है।

बयान में कहा गया, हम घायलों को पूरा सहयोग दे रहे हैं और डॉक्टरों की टीम तथा स्थानीय अधिकारियों के साथ मिलकर काम कर रहे हैं। हम घटना की जानकारी जुटा रहे हैं और अपने साझेदारों तथा संबंधित अधिकारियों के समन्वय से एक विस्तृत जांच शुरू कर दी गई है।

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वेदांता के सिंहितराई पावर प्लांट में बॉयलर ट्यूब फटने से कुल 20 लोगों की मौत हो गई और 16 लोग घायल हो गए। सक्ति कलेक्टर अमृत विकास तोपनो ने बताया कि घटना की मजिस्ट्रियल जांच के आदेश दे दिए गए हैं और घायलों को बेहतर इलाज उपलब्ध कराया जाएगा। शवों को पोस्टमार्टम के लिए रायगढ़ लाया गया है। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें