छत्तीसगढ़ के कवर्धा के पंडारिया में गुरुवार को आदिवासी समुदाय के 200 सदस्य अपने मूल धर्म में लौट आए। भाजपा विधायक भावना बोहरा ने पारंपरिक रीति-रिवाजों और धार्मिक अनुष्ठानों के साथ आदिवासी समुदाय के लोगों का स्वागत और सम्मान किया और उनके पैर धोकर उनकी घर वापसी कराई। यह सभी आदिवासी लोग ईसाई धर्म अपना चुके थे।

इससे पहले न्यूर के वन क्षेत्र के आसपास के गांवों से 115, कुई-कुकदुर क्षेत्र से 70, दमगढ़ गांव से 50 और कुलहिदोंगरी गांव से 140 आदिवासी भी अपने मूल धर्म में लौट चुके हैं।

विधायक भावना बोहरा ने कहा, “पंडारिया विधानसभा क्षेत्र में स्थानीय लोगों की मदद से एक बड़ा अभियान चल रहा है। प्रधानमंत्री मोदी के जन्मदिन के बाद से हमने लोगों की ‘घर वापसी’ शुरू की थी। हमें खुशी है कि यह अभियान जारी है। आज फिर 150-200 लोग अपने मूल धर्म में लौट आए हैं। हम सभी बहुत खुश हैं। अब तक 700-750 लोग अपने मूल धर्म में लौट चुके हैं। आज अपने मूल धर्म में लौटने वाले एक व्यक्ति चर्च के पादरी थे।’

विधायक बोहरा ने कहा कि हमारा अभियान तब तक जारी रहेगा जब तक लोग अपने मूल धर्म में नहीं लौट आते। इस दौरान वहां मौजूद लोगों ने इसे आदिवासी संस्कृति और परंपरा के संरक्षण की दिशा में अहम कदम बताया।

विधायक ने कहा कि लालच देकर गरीब आदिवासियों का धर्म परिवर्तन कराया गया था और वर्षों से गरीब और अशिक्षित आदिवासियों को लालच देकर धर्म परिवर्तन करने के लिए भ्रमित किया गया। उन्होंने कहा कि अब समाज अपनी संस्कृति व मूल आस्था की ओर लौट रहा है।

‘ईसाई बनने से… कैंसर ठीक हो सकता है’

मध्य प्रदेश के गुना जिले में पुलिस ने दो पादरियों और उनके साथियों के खिलाफ धर्म परिवर्तन का मामला दर्ज किया है। उनपर आरोप है कि ये सभी मोहनपुर खुर्द गांव में ‘प्रार्थना से इलाज’ के नाम पर लोगों को बहलाकर उनका धर्म बदलवा रहे थे। यहां क्लिक कर पढ़ें पूरी खबर।