एक डॉक्टर ने सात घंटों की शिफ्ट में किया 101 महिलाओं की नसबंदी का ऑपरेशन, विभाग ने बिठाई जांच

छत्तीसगढ़ में एक डॉक्टर द्वारा एक ही शिफ्ट में 101 महिलाओं की नसबंदी करने के मामले ने तूल पकड़ लिया है। जिसको देखते हुए राज्य के स्वास्थ्य विभाग ने जांच के आदेश दिए हैं।

101 sterilisations within 7 hrs Chhattisgarh
तस्वीर का इस्तेमार प्रतीकात्मक प्रस्तुतीकरण के लिए किया गया है। सोर्स- Pixabay

छत्तीसगढ़ में एक डॉक्टर द्वारा एक ही शिफ्ट में 101 महिलाओं की नसबंदी करने के मामले ने तूल पकड़ लिया है। जिसको देखते हुए राज्य के स्वास्थ्य विभाग ने जांच के आदेश दिए हैं। मामला सरगुजा जिले का है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने शनिवार को पत्रकारों से बात करते हुए बताया कि जिले के मैनपाट के नर्मदापुर गांव स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में 27 अगस्त को कथित रूप से सात घंटे की शिफ्ट में 101 महिलाओं की नसबंदी की गई थी। घटना की जानकारी मिलने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने जांच के आदेश दिए हैं।

सात घंटे की शिफ्ट में न सिर्फ इतनी नसबंदी करना बेहद मुश्किल है बल्कि नियमों का भी उल्लंघन है। ऐसे में इसकी सही जानकारी निकाली जा रही है। विभाग को इस आंकड़े पर संदेह मालूम पड़ रहा है। राज्य के स्वास्थ्य विभाग के प्रमुख सचिव डॉक्टर आलोक शुक्ला ने बताया कि नसबंदी कैंप में गड़बड़ी की जानकारी के बाद स्वास्थ्य विभाग ने इस मामले में जांच के आदेश दिए हैं।

शुक्ला ने बताया कि नसबंदी कैंप में एक ही दिन में 101 महिलाओं की नसबंदी होने की जानकारी मिली है। हालांकि यह भी जानकारी मिली है कि महिलाओं की स्थिति सामान्य है। अधिकारी ने बताया कि शासन के निर्देशों के तहत शिविर में एक दिन में एक डॉक्टर मैक्सिमम 30 महिलाओं की नसबंदी कर सकता है। इस बात की जांच की जा रही है कि किस स्थिति में वहां मौजूद अधिकारियों ने नियमों का उल्लंघन करने दिया है।

गौरतलब है कि सरगुजा क्षेत्र के स्थानीय अखबारों में नसबंदी कैंप में अनियमितताओं की खबर छपने के बाद जिले के चीफ हेल्थ एंड मेडिकल ऑफिसर पी. एस. सिसोदिया ने 29 अगस्त को नसबंदी करने वाले चिकित्सक डॉक्टर जिबनूस एक्का और ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर आर. एस. सिंह को कारण बताओ नोटिस जारी किया। अधिकारी ने इस मामले की जांच के लिए तीन सदस्यों की कमेटी भी बनाई है।

छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले में नवंबर 2014 में आयोजित एक नसबंदी कैंप में एक ही दिन में 83 महिलाओं की नसबंदी कर दी गई थी। बाद में तबीयत बिगड़ने के कारण इनमें से 13 महिलाओं की मौत हो गई थी।

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