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छत्तीसगढ़ की कांग्रेस सरकार ने माफ किया टाटा पर लगा 200 करोड़ का जुर्माना

इंडियन एक्सप्रेस की तरफ से की गई जांच में पता लगा कि यह जुर्माना कंपनी और राज्य के बीच समझौते के अनुसार था। साथ ही इस जुर्माने की पुष्टि एक मुख्य सचिव के नेतृत्व वाली समिति द्वारा की गई थी।

Author Edited By Anil Kumar रायपुर | Updated: October 29, 2020 8:06 AM
Chhattisgarh, Bhupesh Baghel, congress govt, tata project, 200 coroe penaltyभारतनेट द्वितीय चरण के तहत फाइबर इंटरनेट कनेक्शन के इंतजार में कोरबा जिले में एक कॉमन सर्विस सेंटर । (एक्सप्रेस फोटो: गार्गी वर्मा)

छत्तीसगढ़ में भूपेश बघेल की अगुवाई वाली कांग्रेस सरकार ने टाटा प्रोजेक्ट्स पर 200 करोड़ रुपये का जुर्माना माफ कर दिया। सरकार की तरफ से यह फैसला परियोजना के ब्रॉडबैंड परियोजना की नोडल एजेंसी से जुड़े दो आईएएस के फैसलों को दरकिनाकर कर किया गया।

यह जुर्माना 3,057 करोड़ रुपये की ग्रामीण ब्रॉडबैंड परियोजना की समयसीमा को दो बार पूरा नहीं करने पर लगाया गया था। इंडियन एक्सप्रेस की तरफ से की गई जांच में पता लगा कि यह जुर्माना कंपनी और राज्य के बीच समझौते के अनुसार था। साथ ही इस जुर्माने की पुष्टि एक मुख्य सचिव के नेतृत्व वाली समिति द्वारा की गई थी। सिर्फ यही नहीं, राज्य सरकार ने टाटा प्रोजेक्ट्स को दो वर्षों में दो बार विस्तार की मंजूरी देने के बाद 28.79 करोड़ रुपये का जुर्माना वापस कर दिया।

जुलाई 2018 में कंपनी को दी गई भारतनेट छत्तीसगढ़ परियोजना को मूल रूप से एक वर्ष में पूरा किया जाना था। इसमें राज्य के 27 जिलों में 85 ब्लॉक और 5,987 ग्राम पंचायतों को जोड़ने के लिए 32,466 किलोमीटर की दूरी पर एक ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क बिछाना शामिल है। इंटरनेट के साथ छत्तीसगढ़ में ग्राम पंचायतों में उजियारा करना राष्ट्रव्यापी भारतनेट परियोजना का हिस्सा है।

यह प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी की डिजिटल इंडिया योजना के तहत फ्लैगशिप परियोजनाओं में से एक है। इसका उद्देश्य 2.5 लाख गांवों को आपस में जोड़ना है। 25 सितंबर, 2020 तक, टाटा प्रोजेक्ट्स केवल 1,394 ग्राम पंचायतों (लक्ष्य का 24 प्रतिशत) में ब्रॉडबैंड-तैयार बुनियादी ढांचे को सुनिश्चित कर सका था।

26 अप्रैल को टाटा प्रोजेक्ट्स लिमिटेड को भेजे गए विस्तृत सवालों की सूची पर कोई जवाब नहीं दिया।  मालूम हो कि समीर विश्नोई को 26 जनवरी को छत्तीसगढ़ इन्फोटेक प्रमोशन सोसाइटी (ChIPS) के सीईओ नियुक्त किया गया था। सीएचआईपीएस  राज्य की एक नोडल एजेंसी थी जिसने परियोजना की निगरानी करनी थी।

इसने अपने दो पिछले सीईओ – एलेक्स पॉल मेनन और केसी देवसेनापति के निर्णयों को दरकिनार किया।  पहले दो सीईओ ने टाटा प्रोजेक्ट्स पर आपसी सहमति के साथ तय समयसीमा के पूरा नहीं होने पर जुर्माना लगाया था।

यह पूछे जाने पर कि उन्होंने जुर्माना वापस लेने से रोक दिया और पहले से लगाई गई राशि वापस कर दी, विश्नोई ने द इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि पहले, प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया था। मैंने रोक दिया ताकि हम दंड प्रक्रिया को फिर से शुरू कर सकें। ” उन्होंने कहा कि पेनल्टी लागू करने के लिए एक नया नोटिस अब टाटा प्रोजेक्ट्स को जारी किया गया है।

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