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कांग्रेसी सरकार राम वन गमन रास्ते का करेगी उद्धार, प्रोजेक्ट में आधा दर्जन से ज्यादा जिलों में होंगे विकास

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य के लोगों को इस पवित्र काम में योगदान देने का अवसर देने के लिए हमने 'राम वन गमन प्रयत्न' परिपथ विकास कोष' स्थापित करने का निर्णय लिया है।

Ram Van Gaman tourist circuitछत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल। (पीटीआई)

कांग्रेस शासित छत्तीसगढ़, राज्य सरकार की महत्वकांक्षी ‘राम वन गमन टूरिस्ट सर्किट’ योजना के विकास के लिए लोगों से योगदान के लिए एक समर्पित कोष बनाएगा। राज्य के सीएम भूपेश बघेल ने शनिवार को स्वतंत्रता दिवस पर राजधानी रायपुर में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान कहा कि प्रोजेक्ट के पहले चरण 9 साइटों का चयन भी कर लिया गया है। जिन साइटों को चुना गया है उनमें सीतामढ़ी हरचौका (कोरिया), रामगढ़ (अंबिकापुर), शिवरीनारायण (जांजगीर-चांपा), तुरतुरिया (बलौदा बाजार), चंदखुरी (रायपुर), राजिम (गरियाबंद), सिहावा-सप्तऋषि आश्रम (धमतरी), जगदलपुर (बस्तर) और रामराम (सुकमा) शामिल हैं।

सीएम बघेल ने कहा, ‘भगवान राम दुनिया में अरबों-खरबों लोगों के मन-मंदिर में विराजते हैं। हम कण-कण और रग-रग में उनकी उपस्थिति महसूस करते हैं। उनका छत्तीसगढ़ से गहरा नाता है। माता कौशल्या का मायका यानी रामजी का ननिहाल छत्तीसगढ़ है। इस नाते भगवान राम हमारी लोक आस्था में ‘भांचा राम’ के रूप में बसे हैं। इसके अलावा वनवास के दौरान राम जी का काफी समय छत्तीसगढ़ में ही बीता। लव-कुश के जन्म और महर्षि वाल्मीकि की छत्र-छाया में उनकी शिक्षा-दीक्षा जैसे अनेक प्रसंगों के साक्ष्य लोक आस्था को आनंदित व गौरवान्वित करते हैं।’

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उन्होंने कहा कि माता कौशल्या, भगवान राम और उनसे जुड़े विभिन्न प्रसंगों की स्मृतियों को चिरस्थायी बनाने के लिए हमने ‘कोरिया से सुकमा’ तक ‘राम वन गमन पर्यटन परिपथ’ विकास की योजना बनाई है और उसे शीघ्रता से क्रियान्वित भी कर रहे हैं। चंदखुरी में माता कौशल्या मंदिर परिसर को भव्य स्वरूप देने का कार्य शुरू किया गया है।’

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य के लोगों को इस पवित्र काम में योगदान देने का अवसर देने के लिए हमने ‘राम वन गमन प्रयत्न’ परिपथ विकास कोष’ स्थापित करने का निर्णय लिया है। इस दौरान उन्होंने जनता के नाम संदेश में कहा कि लॉकडाउन के कारण प्रभावित शिक्षा को निरंतर जारी रखने के लिए हमने ऑनलाइन शिक्षा योजना ‘पढ़ई तुंहर दुआर’ शुरू की थी जिसका लाभ 22 लाख बच्चों को मिल रहा है तथा दो लाख शिक्षक-शिक्षिकाएं इस व्यवस्था से जुड़े हैं।’

उन्होंने कहा, ‘इस पहल को आगे बढ़ाते हुए अब हम गांवों में समुदाय की सहायता से बच्चों को पढ़ाने के लिए ‘पढ़ई तुंहर पारा’ योजना शुरू कर रहे हैं। इंटरनेट के अभाव वाले अंचलों के लिए ‘ब्लूटूथ’ आधारित व्यवस्था ‘बूल्टू के बोल’ का उपयोग किया जाएगा।’

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