छत्तीसगढ़ में BJP ने तय की चुनावों की रणनीति, OBC को साधकर सत्ता तक पहुंचने की तैयारी

दरअसल छत्तीसगढ़ में 47 प्रतिशत ओबीसी आबादी है और करीब 45 सीटों पर इनका प्रभाव है। साथ ही करीब 25 विधायक ओबीसी समाज से आते हैं। इसलिए बीजेपी ओबीसी वोट बैंक को अपने पक्ष में करने की कोशिश कर रही है।

भाजपा अभी से ही साल 2023 में होने वाली छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव की तैयारियों में जुट गई है। (एक्सप्रेस फाइल फोटो)

देश में इन दिनों जातिगत जनगणना का मुद्दा जोरों शोरों पर है। कई राजनीतिक पार्टियां केंद्र सरकार से इस बार होने वाली जनगणना में पिछड़ी जातियों की गिनती करने की भी मांग कर रही है। वहीं भाजपा भी छत्तीसगढ़ में ओबीसी वोटों के सहारे ही अगला विधानसभा चुनाव जीतने की कोशिश में जुटी हुई है। साथ ही भाजपा अभी से ही साल 2023 में होने वाली विधानसभा चुनाव की रणनीतियां बनाने में जुट गई है।

पिछले दिनों बस्तर में हुई चिंतन बैठक के बाद भाजपा ने आगामी विधानसभा चुनावों के लिए रणनीति तय करनी शुरू कर दी है। इसके लिए बीजेपी ओबीसी वर्ग को साधने की कोशिश कर रही है। भाजपा नेताओं को ओबीसी समाज को जोड़ने का टास्क भी दिया गया है। साथ ही भाजपा इन वर्गों के लोगों को प्रतिनिधित्व देने की बात भी कर रही है। पिछले दिनों छत्तीसगढ़ पहुंचे भाजपा ओबोसी मोर्चा के अध्यक्ष डॉ के लक्ष्मण ने भी ओबीसी वोट बैंक को साधने के लिए ओबीसी आरक्षण का राग अलापा। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में बीजेपी की सरकार आई तो हम ओबीसी आरक्षण को और बढ़ाने पर फैसला लेंगे।  

दरअसल छत्तीसगढ़ में 47 प्रतिशत ओबीसी आबादी है और करीब 45 सीटों पर इनका प्रभाव है। साथ ही करीब 25 विधायक ओबीसी समाज से आते हैं। इसलिए बीजेपी ओबीसी वोट बैंक को अपने पक्ष में करने की कोशिश कर रही है। ओबीसी वोट बैंक को साधने में भाजपा के साथ साथ कांग्रेस भी जुटी हुई है। छत्तीसगढ़ की कांग्रेस सरकार के मुखिया भूपेश बघेल ने ओबीसी वर्ग की जनगणना भी शुरू कर दी है और इसके लिए एक मोबाइल एप भी लांच किया गया है। हालांकि एप के जरिए ओबीसी के साथ साथ आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों की भी गिनती की जा रही है। इसके लिए सरकार ने आयोग का भी गठन किया है।

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने 4 सितंबर 2019 को एक अध्यादेश जारी करके अन्य पिछड़ा वर्ग का आरक्षण 14 प्रतिशत से बढ़ाकर 27 प्रतिशत कर दिया था। जिसके बाद राज्य सरकार के इस आदेश को कोर्ट में चुनौती दी गई थी। कोर्ट ने इस मामले पर सुनवाई के दौरान राज्य सरकार को आरक्षण देने का आधार और आंकड़े जुटाने के लिए कहा था। अदालत के आदेश पर ही सरकार यह सर्वे कर रही है।

बता दें कि छत्तीसगढ़ में करीब 95 जातियां ओबीसी में शामिल हैं। इनमें मुख्य रूप से कसार, कुर्मी, कलार, श्रीवास, साहू, बैरागी, विश्वकर्मा, हलवाई, यादव, केवट, चौरसिया, निर्मलकर, धनगर, देवांगन, मौर्य, राजगीर, गोस्वामी, सोनी, कुम्हार, पनका, लोधी, रौतिया, कोटवार, तंवर, रजवार, अघरिया, तूरी, राजभर आदि शामिल हैं। साथ ही इसमें मुस्लिम धर्म की कुछ जातियां भी शामिल हैं।

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