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गृह मंत्रालय का अधिकारी बनकर 85 लाख ठगने वाला गिरफ्तार

अपराध शाखा के संयुक्त आयुक्त रवींद्र यादव के मुताबिक, बाराखंभा रोड, निर्मल टावर स्थित भारत इंटरप्राइजेज के प्रधान भारत भूषण गुप्ता की शिकायत पर ठग जॉय शॉ उर्फ मुकेश शॉ को दबोचा गया।

Author नई दिल्ली | June 12, 2016 1:48 AM
इस तस्वीर का इस्तेमाल केवल प्रतीक के तौर पर किया गया है।

दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा ने खुद को केंद्रीय गृह मंत्रालय और सीबीआइ अधिकारी बताकर एक व्यापारी से 85 लाख रुपए ठगने वाले एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार ठग से इन दोनों विभागों के फर्जी पहचान पत्र, केंद्रीय गृह मंत्रालय के स्टीकर वाली लालबत्ती की लग्जरी कार, लैपटॉप, आधार कार्ड सहित अन्य महत्त्वपूर्ण दस्तावेज बरामद किए गए हैं। इस ठग के निशाने पर भोपाल और भुवनेश्वर के बेरोजगार युवा थे।

अपराध शाखा के संयुक्त आयुक्त रवींद्र यादव के मुताबिक, बाराखंभा रोड, निर्मल टावर स्थित भारत इंटरप्राइजेज के प्रधान भारत भूषण गुप्ता की शिकायत पर ठग जॉय शॉ उर्फ मुकेश शॉ को दबोचा गया। शॉ ने खुद को गृह मंत्रालय का सहायक निदेशक बताकर गुप्ता के कई प्रोजेक्ट पास कराने के नाम पर 85 लाख रुपए ठग लिए। नागेंद्र त्रिपाठी नाम के एक ब्रोकर ने मई 2015 में दिल्ली के एक होटल में गुप्ता की शॉ से मुलाकात कराई थी। होटल ओबराय में हुई यह मुलाकात रिलायंस, एस्सार जैसी कंपनियों के साथ पार्टनरशिप दिलाने के लिए हुई थी। फिर शॉ की गुप्ता के साथ दिल्ली, भोपाल और भुवनेश्वर के कई होटलों में मुलाकात हुई। इन्हीं मुलाकातों के दौरान गुप्ता से 85 लाख रुपए ठगे गए। ठगी के शिकार गुप्ता ने इस साल 7 मई को अपराध शाखा में रिपोर्ट दर्ज कराई।

विभिन्न होटलों में जांच के बाद कड़कड़दूमा के होटल जिंजर से आधार कार्ड की कापी बरामद की गई तो पता चला कि यह मुकेश शॉ नाम के व्यक्ति की करतूत है। पुलिस टीम पहुंचती इससे पहले ही मुकेश भुवनेश्वर और भोपाल के अपने घरों से गायब हो चुका था और उसका फोन भी बंद था। वह भोपाल के ही अयोध्यानगर में किराए के एक घर में छुपकर रह रहा था। पुलिस ने जाल बिछाया और वीआइपी स्टीकर वाली कार के साथ उसे भोपाल से ही दबोच लिया गया। वहां से ल्ैेपटॉप, एस्सार, रिलायंस की मुहरें व अन्य कागजात बरामद किए गए। पूछताछ में पता चला कि अयोध्यानगर भोपाल निवासी मुकेश ने इंजीनियरिंग में स्नातक किया है। बंगाली परिवार से ताल्लुक रखने वाले मुकेश के पिता फैक्टरी में मजदूरी करते थे। पैसे कमाने की चाहत में उसने पहले खुद को भेल का सीनियर इंजीनियर बताकर लोगों को चूना लगाया और बाद में गृह मंत्रालय और सीबीआइ के नाम का दुरुपयोग किया।

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