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राजस्थान: सीएम के बेटे के साथ काम कर रहे चार्जशीटेड पूर्व आईएएस, सरकार ने की केस खत्म कराने की पहल

तीन अधिकारियों जीएस संधू आईएएस (वर्तमान में रिटायर्ड), निष्कम दिवाकर (वर्तमान में रिटायर्ड, राजस्थान प्रशासनिक सेवा) और ओंकार मल सैनी (मौजूदा RAS अधिकारी) के खिलाफ साल 2015 और 2016 में चार्जशाीट दाखिल की गईं थी।

national news india newsराजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के बेटे वैभव गहलोत। (एक्सप्रेस फाइल फोटो)

राजस्थान की अशोक गहलोत सरकार ने कथित भूमि घोटाले में भ्रष्टाचार के लिए एक रिटायर्ड आईएएस सहित तीन चार्जशीटेड अधिकारियों के खिलाफ मुकदमा वापस लेने के लिए स्पेशल कोर्ट में गुहार लगाई है। राज्य सरकार ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत चल रहे इन मामलों में विशेष अदालत के समक्ष आवेदन देकर केस वापस लेने की सिफारिश की है। खास बात है कि जिन अधिकारियों के खिलाफ केस वापस लेने की पहल की गई है उनमें रिटायर्ड आईएएस राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन के सलाहकार है, जिसके प्रमुख सीएम गहलोत के बेटे वैभव गहलोत हैं।

तीन अधिकारियों जीएस संधू आईएएस (वर्तमान में रिटायर्ड), निष्कम दिवाकर (वर्तमान में रिटायर्ड, राजस्थान प्रशासनिक सेवा) और ओंकार मल सैनी (मौजूदा RAS अधिकारी) के खिलाफ साल 2015 और 2016 में चार्जशाीट दाखिल की गईं थी। तब राज्य की सत्ता पर भाजपा काबिज थी। 8 जुलाई, 2016 को भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) द्वारा दाखिल चार्जशीट में कहा गया, ‘संधू जो 2010-11 में शहरी विकास और आवास (यूडीएच) विभाग के प्रधान सचिव थे, दिवाकर इसके उप सचिव थे और सैनी, जयपुर विकास प्राधिकरण के डिप्टी कमिश्नर थे। चार्जशीट में कहा गया कि तब तीनों एक आवास निर्माण संबंधित भूमि को एक निजी कंपनी को आवंटित करने की ‘आपराधिक साजिश’ का हिस्सा थे।

इसमें संधू और सैनी पर साल 2016 की चार्जशीट में आईपीसी की धार 409, 420, 120बी के साथ भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम, 1988 की धाराओं में आरोप लगाए गए थे। चार्जशीट में दिवाकर का भी नाम शामिल था। तीनों को गिरफ्तार भी किया गया मगर बाद में जमानत मिल गई। अब 19 जनवरी, 2021 को राज्य सरकार ने स्पेशल कोर्ट में शिफारिश की है कि संधू और दो अन्यों के खिलाफ केस वापस लिया जाए।

बता दें कि कांग्रेस के सत्ता में लौटने के बाद जुलाई 2019 में संधू और दिवाकर ने सरकार का प्रतिनिधित्व किया था। UDH विभाग ने एक समिति गठित की है जिसने मामले को वापस लेने की सिफारिश की है। राज्य सरकार ने आवेदन में कहा कि तीनों नौकरशाहों में से कोई भी मूल शिकायत, प्रारंभिक जांच या प्राथमिकी में नामित नहीं किया गया। उनकी ओर से किसी विशेष व्यक्ति को गलत तरीके से लाभ या हानि नहीं पहुंचाई गई है।

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