चारधाम या केदारनाथ जाने की सोच रहे हैं और हेलीकॉप्टर बुक करना चाहते हैं तो सावधान हो जाएं क्योंकि हाल ही में साइबर अपराधियों ने एक अधिकारी को निशाना बना लिया। 12 मई को एक सरकारी अधिकारी ने एक वेबसाइट के जरिए कुछ ही मिनटों में अपराधियों ने ठग लिया।
दरअसल, सरकारी अधिकारी केदारनाथ के लिए हेलीकॉप्टर बुकिंग करना चाहते थे और इसके लिए उन्होंने गूगल पर सर्च किया उन्हें गूगल सर्च में अधिकृत बुकिंग वेबसाइट से मिलती-जुलती वेबसाइट मिली। उन्होंने कुछ ही मिनटों में भुगतान कर बुकिंग किया और जब परिवार फाटा हेलीपैड पहुंचा तो उन्हें पता चला कि टिकट नकली है।
लोगों को गुमराह करने के लिए बनाई वेबसाइट
मामले की जांच कर रहे अधिकारियों ने बताया कि यह वेबसाइट लोगों को गुमराह कर धोखाधड़ी से तीर्थयात्रियों से पैसे ऐंठने के लिए बनाई गई थी। इस मामले में तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया है।
पुलिस के अनुसार, सरकारी अधिकारी ने गूगल लिंक ‘irctc-heliyatra.com’ पर क्लिक किया था। पोर्टल पर चार पवित्र हिमायली धामों की दिव्य यात्रा टैगलाइन के साथ-साथ 4 धाम, 5 रात/6 दिन,89,999 रुपये से शुरू नामक एक पैकेज का विज्ञापन और चारों तीर्थ स्थलों की तस्वीरें भी थीं।
अधिकारी ने Book Now पर क्लिक किया और उसे फिर ट्रांस भारत एविएशन केदारनाथ हेलीकॉप्टर टिकट बुकिंग 2026 कैप्शन वाले एक अन्य पेज पर ले गया। जिसमें एक हेलीकॉप्टर की इमेज और एक मोबाइल नंबर था।
उसने नंबर पर क्लिक किया और फिर एक व्हाट्सऐप चैट खुल गए, जहां उन्हें तुरंत हेलीकॉप्टर के किराए की डिटेल मिली- देहरादून से केदारनाथ, 23000 रुपये, सिरसी से केदारनाथ 6,390 रुपये, फाटा से केदारनाथ 10164 रुपये और गुप्तकाशी से केदारनाथ 12,762 रुपये।
पुलिस ने बताया कि अधिकारी ने उस नंबर पर कॉल किया और आरोपी ने फोन उठा कर पूछा कि वे कौन से पैकेज बुक करना चाहते हैं। अधिकारी ने अपने परिवार के दो सदस्यों के लिए फाटा-केदारनाथ हेलीकॉप्टर सर्विस को चुना। कॉल करने वाले ने उन्हें भरोसा दिया कि बुकिंग लिंक जल्द ही भेज दी जाएगी।
दो टिकट भेजे, जो नकली साबित हुए
बुकिंग लिंक के जरिए भुगतान कर दिया गया और अधिकारी के जीमेल और व्हाट्सऐप के माध्यम से 20,328 रुपये मूल्य के दो ई-टिकट प्राप्त हुए।
इसके बाद परिवार दिल्ली से रवाना हुआ और फाटा हेलीपैड पर ट्रांस भारत एविएशन के सुरक्षाकर्मियों ने उन्हें बताया कि टिकट फर्जी हैं।
क्या है ऑफिशियल वेबसाइट का पता?
एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि पीड़िता ने irctc-heliyatra.com नामक डोमेन के जरिए टिकट बुक किया वे ऑफिशियल वेबसाइट http://www.heliyatra.irctc.co.in से काफी मिलता-जुलता है। अधिकारी ने बताया कि फाटा से सरकारी अधिकारी ने राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) पर शिकायत दर्ज कराई, जिसके बाद इसे दक्षिण दिल्ली के साइबर पुलिस स्टेशन में ट्रांसफर कर दिया गया।
पुलिस उपायुक्त (दक्षिण) अनंत मित्तल ने बताया कि अतिरिक्त डीसीपी (ऑपरेशन) अरविंद कुमार की देखरेख में साइबर पुलिस थाने के एसएचओ इंस्पेक्टर हंसराज स्वामी के नेतृत्व में एक विशेष टीम गठित की गई थी। शुरूआती जांच के बाद एफआईआर दर्ज की गई। पुलिस को जल्द ही एहसास हो गया कि यह मामला एक घटना से कहीं अधिक बड़ा था।
कई राज्यों में फैला हुआ नेटवर्क
अनंत मित्तल ने कहा, “जो शुरू में ऑनलाइन धोखाधड़ी का एक अकेला मामला लग रहा था, वह कई राज्यों में फैला हुआ एक नेटवर्क निकला।”
बैंक अकाउंट, धन के लेन-देन, डोमेन रजिस्ट्रेशन, जीमेल रिकॉर्ड, आईपी लॉग और तकनीक सबूतों के विस्तृत विश्लेषण के जरिए पुलिस ने इन आरोपियों की पहचान की और 2 जून को बिहार के नालंदा से ओमप्रकाश कुमार, रोहित कुमार नाम के दो लोगों को गिरफ्तार किया।
नोएडा से बीटेक छात्र भी गिरफ्तार
पूछताछ के दौरान पुलिस ने बताया कि उन्होंने तीसरे आरोपी श्रेयांश तिवारी उर्फ शिवम की भूमिका का खुलासा किया, जो यूपी के जौनपुर का रहना वाला बीटेक का छात्र है। उसे बाद में नोएडा से गिरफ्तार कर लिया गया।
पुलिस ने बताया कि ओमप्रकाश ने श्रेयांश से टेलीग्राम के जरिए संपर्क किया, जब उसे पता चला कि श्रेयांश वेबसाइट बना सकता है और कथित तौर पर उसे फर्जी बुकिग पोर्टल बनाने के लिए 40000 रुपये की पेशकश की।
पुलिस ने श्रेयांश को उस ऑपरेशन का तकनीकी मास्टरमाइंड बताया। आरोप है कि उसने फर्जी वेबसाइटें बनाईं और उन्हें चालू रखा, जबकि रोहित ने ग्राहकों के फोनकॉल संभाले, व्हाट्सऐप पर संभावित पीड़ितों से बातचीत की और कई बैंक खातों के जरिए भुगतान करके लेन-देन को मैनेज किया।
आधिकारिक वेबसाइटों की नकल बनाता था गिरोह
उन्होंने बताया कि गिरोह आधिकारिक दिखने वाली वेबसाइटों की नकल बनाता था, मेटा प्लेटफॉर्म पर सशुल्क विज्ञापनों के जरिए उनका प्रचार भी करता था। साथ ही पीड़ितों को व्हाट्सऐप बातचीत के जरिए गाइड करता था। किराया चार्ट पैकेज विवरण और बुकिंग लिंक साझा करते विश्वास बनाने के बाद पीड़ितों को पैसे भेजने के लिए राजी करता था।
अब तक की जांच से पता चला कि यह गिरोह कई राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों से एनआरसीपी में दर्ज लगभग 30 शिकायतों से जुड़ा हुआ है, जिनमें धोखाधड़ी से करीब 10 लाख रुपये की राशि शामिल हैं।
पुलिस ने बताया कि ओमप्रकाश इससे पहले 2022 में उत्तर-पश्चिम दिल्ली के साइबर पुलिस थाने में साइबर जॉब धोखाधड़ी मामले में गिरफ्तार किया गया था और जमानत मिलने और नालंदा लौटने से पहले उसने कुछ महीने जेल में बिताए थे। अन्य दो आरोपियों को कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है और वे कथित तौर पर ओमप्रकाश के निर्देशों पर काम कर रहे थे।
पुलिस ने आठ मोबाइल, दो लैपटॉप, एक आईपैड, कई एटीएम और डेबिट कार्ड बरामद किए और एक बैंक अकाउंट में जमा 20,328 रुपये को फ्रीज कर दिया है।
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उत्तराखंड के चार धामों में आजकल श्रद्धालुओं की भारी भीड़ आ रही है। खास तौर से केदारनाथ धाम में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ जमा हो रही है और जिसने पिछले चार वर्षों के रिकार्ड तोड़ दिए हैं। केदारनाथ मंदिर पैदल जाने वाले रास्ते में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखने को मिल रही है। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें
