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आधार कार्ड में ऑफलाइन बदलाव करवाना हुआ महंगा, एक जनवरी से लागू हुआ नियम, जानें नए शुल्क

भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण यानि यूआईडीएआई (UIDAI) समय समय पर कुछ न कुछ बदलाव करती रहती है। ऐसे में एक बार फिर यूआईडीएआई ने बदलाव किए हैं।

प्रतीकात्मक फोटो, फोटो सोर्स- इंडियन एक्सप्रेस

भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण यानि यूआईडीएआई (UIDAI) समय समय पर कुछ न कुछ बदलाव करती रहती है। ऐसे में एक बार फिर यूआईडीएआई ने बदलाव किए हैं और इसके तहत अब आपको ऑफलाइन आधार कार्ड में संशोधन के लिए अधिक शुल्क देना पड़ेगा। बता दें कि ये बढ़ी हुई फीस 1 जनवरी 2019 से लागू हो गई है। इस नियम के तहत आधार में किसी भी प्रकार के बदलाव करवाना महंगा हो गया है।

क्या हैं नए नियम: यूआईडीएआई की ओर से जारी नोटिफिकेशन के मुताबिक 1 जनवरी 2019 से आधार में होने वाले किसी भी तरह के बदलाव या अपडेट्स के लिए फीस बदल गई है।
– अब बायोमेट्रिक अपडेट के लिए उपभोक्ताओं को 100 रुपए की फीस देनी होगी।
– डेमोग्राफिक बदलाव के लिए 50 रुपए फीस देनी होगी।
– वहीं ई- केवाईसी या फिर ए 4पेज पर कलर प्रिंट आउट के लिए उपभोक्ताओं के 30 रुपए देने होंगे।
– इसके साथ ही नाम, नंबर आदि बदलवाने पर भी 50 रुपए फीस देनी पड़ेगी। बता दें पहले इस पर 25 रुपए फीस दी जाती थी। जो जीएसटी मिलाकर 30 रुपए पड़ती थी।

सुप्रीम कोर्ट ने दिया था फैसला: बता दें कि हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने आधार कार्ड की गोपनीयता देखते हुए इसके बैंक और टेलिकॉम कंपनियों द्वारा इसका उपयोग करने पर रोक लगा दी थी। जिसके बाद अब केन्द्र सरकार ने इसे कानून का रूप देने के लिए प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट और भारतीय टेलिग्राफ एक्ट में संशोधन को भी मंजूरी प्रदान कर दी थी।

तीन से दस साल तक की कैद: बता दें कि संशोधन के तहत पहचान और पते के प्रमाण के तौर पर आधार कार्ड के लिए दबाव बनाने पर बैंक और टेलिकॉम कंपनियों को एक करोड़ रुपए तक का जुर्माना भरना पड़ सकता है। यही नहीं इसके साथ ही आधार कार्ड मांगने वाले कर्मचारी अथवा जिम्मेदार व्यक्ति को तीन से दस साल तक की कैद भी हो सकती है। यानी अब आधार कार्ड की जगह पासपोर्ट, राशन कार्ड या कोई अन्य दस्तावेज भी इस्तेमाल कर सकते हैं। इसका साफ मतलब है कि अब उपभोक्ता पर निर्भर होगा कि वो बैंक खाते या सिम कार्ड के लिए आधार कार्ड देना चाहता है या नहीं।

डेटा मिसयूज पर भी जुर्माना- सजा: संशोधन में आधार का सत्यापन करने वाली संस्था की भी जिम्मेदारी तय की गई है। इसके मुताबिक अगर आधार का सत्यापन करने वाली कोई संस्था डेटा लीक के लिए जिम्मेदार पायी जाती है तो उस पर भी पचास लाख रुपए तक का जुर्माना और 10 साल तक की सजा का प्रावधान है। हालांकि इन संशोधनों को अभी संसद से मंजूरी मिलना बाकी है।

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