दक्षिण भारत के कुछ राज्यों में परिसीमन को लेकर चिंता और विरोध के बीच आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने केंद्र सरकार के रुख का खुलकर समर्थन किया है। उन्होंने साफ कहा है कि उनका दल तेलुगू देशम पार्टी (TDP) इस मुद्दे पर पूरी तरह सरकार के साथ खड़ी है और इस फैसले को देश के हित में मानती है।
गुरुवार को संसद में महिला आरक्षण से जुड़े नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर चर्चा के लिए तीन दिन का विशेष सत्र शुरू हुआ। इसमें सरकार की ओर से पेश परिसीमन विधेयक राजनीतिक बहस का बड़ा मुद्दा बन गया है। कई दलों और खासकर दक्षिण भारत के कुछ नेताओं ने इस पर सवाल उठाए हैं और इसे लेकर चिंता जताई है। उनका कहना है कि अगर सीटों का पुनर्वितरण जनसंख्या के आधार पर हुआ तो दक्षिणी राज्यों का राजनीतिक प्रतिनिधित्व कम हो सकता है।
लेकिन इन आशंकाओं के बीच चंद्रबाबू नायडू ने एक अलग और सकारात्मक रुख अपनाया है। उन्होंने कहा है कि केंद्र सरकार ने यह स्पष्ट कर दिया है कि भविष्य में लोकसभा और विधानसभा सीटों की संख्या बढ़ाई जाएगी और किसी भी राज्य के प्रतिनिधित्व को कम नहीं किया जाएगा। नायडू के अनुसार यह फैसला संतुलित और सभी राज्यों के हितों को ध्यान में रखकर लिया गया है।
उन्होंने यह भी कहा कि सीटों का निर्धारण केवल आबादी के आधार पर करना उचित नहीं है। उनका मानना है कि देश के अलग-अलग राज्यों की सामाजिक और आर्थिक परिस्थितियां अलग हैं, इसलिए एक समान और संतुलित फॉर्मूला जरूरी है। नायडू लंबे समय से यह बात उठाते रहे हैं कि सिर्फ जनसंख्या को आधार बनाने से दक्षिण भारत जैसे राज्यों के साथ असंतुलन हो सकता है, क्योंकि वहां जनसंख्या वृद्धि दर अपेक्षाकृत कम रही है।
परिसीमन को सीधे जनगणना से जोड़ना सही नहीं
इकोनॉमिक टाइम्स को दिए एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि परिसीमन को सीधे जनगणना से जोड़ना सही नहीं होगा। अगर ऐसा किया गया तो कुछ राज्यों को नुकसान होने की आशंका पैदा हो सकती है, जो देश की एकता और संतुलन के लिए अच्छा नहीं होगा। उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी राज्य को उसकी जनसंख्या नियंत्रण नीति के लिए “सजा” जैसा महसूस नहीं होना चाहिए।
नायडू ने जोर देकर कहा कि अगर केंद्र सरकार सीटों के पुनर्वितरण का सही और संतुलित फॉर्मूला लागू करती है, तो इससे किसी राज्य का प्रतिनिधित्व कम नहीं होगा, बल्कि लोकतंत्र और मजबूत होगा। उन्होंने विपक्ष के उन आरोपों को भी खारिज किया जिनमें कहा जा रहा है कि सरकार परिसीमन के जरिए दक्षिण भारत का राजनीतिक हिस्सा कम करना चाहती है।
दूसरी तरफ तमिलनाडु में मुख्यमंत्री एम. के. स्टालिन ने परिसीमन को लेकर कड़ा विरोध जताते हुए इसे ‘काला कानून’ तक कह दिया है। वहीं ओडिशा के पूर्व मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने भी चिंता जताई है कि भले ही उनकी सीटें बढ़ें, लेकिन राष्ट्रीय अनुपात में उनका प्रभाव कम हो सकता है। इन सबके बीच दक्षिण भारत से आने के बावजूद चंद्रबाबू नायडू का समर्थन केंद्र सरकार के लिए एक बड़ा राजनीतिक सहारा माना जा रहा है।
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तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन ने गुरुवार (16 अप्रैल) को परिसीमन विधेयक की एक प्रति जलाई। तमिलनाडु के सीएम ने इस कानून को ‘काला कानून’ करार दिया और आरोप लगाया कि यह विधेयक तमिल लोगों को उनकी अपनी ही भूमि में ‘शरणार्थी’ बनाने का प्रयास है। महिला आरक्षण संशोधन अधिनियम पर संसद के बजट सत्र की विशेष बैठक से कुछ घंटे पहले स्टालिन ने काला झंडा दिखाया। केंद्र सरकार द्वारा उपलब्ध कराई गई परिसीमन विधेयक की एक प्रति जलाई और नारे लगाए। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां पर करें क्लिक
