Chandigarh News: चंडीगढ़ की जिला अदालत ने 2020 के एक लूटपाट के मामले में बड़ा फैसला सुनाया है। तीन युवकों पर मौली जागरण इलाके में एक राहगीर से 600 रुपये, एक मोबाइल और आधार कार्ड लूटने का आरोप था। कोर्ट ने तीनों को ही दोषी मानते हुए 10 साल की सजा सुनाई है।

इसके अलावा अदालत ने दो दोषियों पर 15,000 रुपये और तीसरे पर 10,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया। यह फैसला अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश सोनिका ने सुनाया, जिन्होंने राजिंदर उर्फ ​​धानी (24), शुभम उर्फ ​​बंबो (22) और काशिम उर्फ ​​मच्छी (18) को आईपीसी की धारा 395 (डकैती) और 397 (डकैती या लूटपाट के साथ हत्या या गंभीर चोट पहुंचाने का प्रयास) के तहत दोषी ठहराया।

शिकायतकर्ता ने क्या-क्या लगाए थे आरोप

कोर्ट ने राजिंदर और काशिम को धारा 411 (बेईमानी से चोरी की संपत्ति प्राप्त करना) के तहत भी दोषी ठहराया है। अभियोजन पक्ष के अनुसार यह घटना 25 जनवरी, 2020 की शाम की थी। शिकायतकर्ता पंकज ने पुलिस को बताया कि वह चंडीगढ़ रेलवे स्टेशन के पास एक ऑटो से उतरकर मौली जागरण की ओर पैदल जा रहा था, तभी रात करीब 8 बजे एक शिव मंदिर के पास पांच युवकों ने उसे रोक लिया।

उनमें से एक ने कथित तौर पर उसके पेट पर चाकू रख दिया, जबकि दूसरे ने उसकी पीठ पर पिस्तौल तान दी और शोर मचाने पर गोली मारने की धमकी दी। इसके बाद हमलावर उससे 600 रुपये का पर्स, आधार कार्ड और एक एमआई मोबाइल फोन छीनकर फरार हो गए।

बचाव पक्ष ने क्या दिए तर्क

पंकज की शिकायत पर मौली जागरण पुलिस स्टेशन में एफआईआर दर्ज की गई। जांच के दौरान पुलिस ने राजिंदर से शिकायतकर्ता का काला पर्स बरामद किया, जिसे शिकायतकर्ता ने अपना बताया। बरामदगी के समय पर्स में 200 रुपये थे, जिन्हें जब्त कर लिया गया। जांचकर्ताओं ने शुभम के पास से छीना गया मोबाइल फोन और अपराध में कथित तौर पर इस्तेमाल की गई एक खिलौना पिस्तौल भी बरामद की।

मुकदमे की सुनवाई के दौरान, बचाव पक्ष के वकीलों ने तर्क दिया कि आरोपियों को झूठा फंसाया गया था और उन्होंने अभियोजन पक्ष के गवाहों के बयानों में कथित विरोधाभासों की ओर इशारा किया। उन्होंने यह भी दावा किया कि बरामद की गई वस्तुएं जानबूझकर रखी गई थीं और जांच में खामियां थीं क्योंकि जांच अधिकारी ने किसी भी स्वतंत्र गवाह को शामिल नहीं किया था।

कोर्ट ने खारिज कर दी सारी दलीलें

बचाव पक्ष की दलीलों को खारिज करते हुए अदालत ने कहा कि स्वतंत्र पुष्टि न होने मात्र से गवाही को खारिज करना कानूनी रूप से अनिवार्य नहीं है। अदालत ने पाया कि अभियोजन पक्ष ने आरोपी को अपराध से जोड़ने वाली एक सुसंगत कड़ी स्थापित की थी और बचाव पक्ष झूठे आरोप का कोई ठोस कारण प्रस्तुत करने में विफल रहा था। अदालत ने यह भी कहा कि आरोपी ने न तो अपनी अनुपस्थिति का दावा किया और न ही उस समय अपनी उपस्थिति का स्पष्टीकरण दिया।

अदालत ने कहा कि गवाहों के बयानों में मामूली विरोधाभास घटना और अदालत में गवाही के बीच समय बीतने के कारण उत्पन्न हो सकते हैं, और ऐसी विसंगतियां अभियोजन पक्ष के मामले के मूल को प्रभावित करने के बजाय मामूली थीं।

यह भी पढ़ें: ममता के ‘खेला’ की काट: BJP का मास्टरप्लान तैयार, टिकट बंटवारे से लेकर फर्जी वोटों तक पर नज़र

bjp | bengal elections | latest news Hindi news
Bengal Elections: भाजपा ने बदली अपनी रणनीति (Photo Source: Indian Express File Photo)

पश्चिम बंगाल में होने वाले विधानसभा चुनाव में भाजपा ‘ना खेला होबे’ की रणनीति के तहत काम कर रही है। पार्टी स्थानीय इकाई ने फैसला लिया है कि इस चुनाव में ऐसे कोई कारण न बनने दिए जाएं जो पिछली बार हार के कारण बने थे। साल 2021 में हुए विधानसभा चुनाव में अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस (एआईटीसी) व राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के ‘खेला होबे’ राजनीतिक नारे में भाजपा फंस गई थी। उक्त चुनाव में अच्छा माहौल बनने के बाद भी पार्टी 38 फीसदी वोट लेकर केवल 77 सीट हासिल कर पाई थी, जबकि पार्टी को राज्य में सरकार बनने की उम्मीद थी। पढ़िए पूरी खबर