चंडीगढ़ में बीजेपी हेडक्वार्टर पर हुए हमले में पंजाब पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। पुलिस की काउंटर इंटेलिजेंस विंग ने ब्लास्ट के सिलसिले में हरियाणा के रेवाड़ी के पास एक ट्रेन से दो मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार किया है। डीजीपी गौरव यादव ने इसकी जानकारी देते हुए कहा कि अब इस मामले में गिरफ्तार आरोपियों की कुल संख्या सात हो गई है। एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में नई गिरफ्तारी के बारे में जानकारी देते हुए डीजीपी गौरव यादव ने कहा कि नई गिरफ्तारी शनिवार रात को हरियाणा पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स (STF) के साथ एक जॉइंट ऑपरेशन में की गईं।
रैपिडो के लिए बाइक ऑपरेटर का काम करते थे हमलावर
डीजीपी ने गिरफ्तार किए गए दो आरोपियों की पहचान गुरतेज सिंह और अमनप्रीत सिंह के रूप में की है। DGP ने कहा, “दोनों पंजाब के रूपनगर जिले के रतनगढ़ गांव के रहने वाले हैं। वे रैपिडो के लिए बाइक ऑपरेटर के तौर पर काम कर रहे थे। नई गिरफ्तारी के साथ इस मामले में शामिल सभी सात आरोपी अब पुलिस कस्टडी में हैं।”
पुलिस ने बताया कि इन दोनों को इस मामले में पांच लोगों (जिनकी पहचान बलविंदर लाल उर्फ शमी, जसवीर सिंह उर्फ जस्सी, चरणजीत सिंह उर्फ चन्नी, रूबल चौहान और मंदीप उर्फ अभिजोत शर्मा के तौर पर हुई है) को गिरफ्तार करने के एक दिन बाद दोनों को गिरफ्तार किया गया। उनके पास से एक हैंड ग्रेनेड और एक .30 बोर की जिगाना पिस्टल भी जब्त की गई। ब्लास्ट के बाद से दोनों आरोपी फरार थे और पंजाब पुलिस की टीमें उनकी मूवमेंट पर नजर रख रही थीं। डीजीपी ने बताया कि उन्हें हरियाणा में रेवाड़ी के पास एक ट्रेन में ट्रेस किया गया और गिरफ्तार कर लिया गया।
ISI से कनेक्शन
डीजीपी ने कहा कि आरोपी अमनप्रीत सिंह का पहले का क्रिमिनल रिकॉर्ड है। उसके खिलाफ हिमाचल प्रदेश के SAS नगर और बिलासपुर में चोरी और स्नैचिंग की FIR दर्ज हैं। डीजीपी ने कहा, “गिरफ्तार आरोपियों को ISI के सपोर्ट वाले विदेश में मौजूद हैंडलर बलजोत सिंह उर्फ जोत (पुर्तगाल) और हरजीत सिंह लाडी (जर्मनी) ने मोटिवेट और गाइड किया गया था और उन्हें हमला करने के लिए 2 लाख रुपये का इनाम देने का वादा किया गया था। अपने विदेशी हैंडलर के निर्देशों पर काम करते हुए आरोपियों ने हमले की डिलीवरी और उसे अंजाम देने के लिए कोऑर्डिनेट किया। आरोपियों ने हमले को अंजाम देने के लिए कई कटआउट और सब-मॉड्यूल का इस्तेमाल किया। शुरुआती पूछताछ में गुरतेज ने बताया कि वह लगभग छह महीने पहले सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिए एक विदेश में मौजूद हैंडलर के संपर्क में था। हैंडलर के निर्देशों पर काम करते हुए, गुरतेज और उसके साथी आरोपी रूबल चौहान और मंदीप उर्फ अभिजोत शर्मा ने 28 मार्च को एसबीएस नगर के भारापुर गांव में जसवीर उर्फ जस्सी से हथियारों और ग्रेनेड की खेप ली। इसके बाद गुरतेज ने हमला करने के लिए अमनप्रीत को साथ लिया।”
डीजीपी ने आगे बताया कि 1 अप्रैल को रेकी करने के बाद अमनप्रीत ने ग्रेनेड फेंका, जबकि गुरतेज ने अपने हैंडलर्स के लिए अपने मोबाइल फोन पर इस हरकत को रिकॉर्ड किया और दोनों मौके से भाग गए। डीजीपी ने कहा, “इस घटना के पीछे पाकिस्तान की इंटर सर्विस इंटेलिजेंस (ISI) का हाथ है। ISI के इंटेलिजेंस ऑफिसर भारत में अपने एजेंटों के जरिए आरोपियों की सभी एक्टिविटीज को कोऑर्डिनेट कर रहे थे।”
पंजाब के डीजीपी ने चंडीगढ़ और हरियाणा पुलिस के डायरेक्टर जनरल्स को धन्यवाद दिया और पूरी साज़िश को उजागर करने और आरोपियों को पकड़ने में चंडीगढ़ पुलिस और हरियाणा पुलिस STF की अहम भूमिका की सराहना की। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि जर्मनी और पुर्तगाल से हमले की कथित तौर पर कैसे प्लानिंग की गई थी, और नेटवर्क में और कौन शामिल हो सकता है।
छह आरोपियों को 3 दिन की पुलिस रिमांड
डीजीपी ने कहा, “आने वाले दिनों में और अहम खुलासे होने की उम्मीद है।” छह आरोपियों को 3 दिन की पुलिस रिमांड पर भेजा गया। रविवार को पंजाब पुलिस की स्टेट स्पेशल ऑपरेशन्स सेल (SSOC) टीम ने छह आरोपियों को सिविल जज (जूनियर डिवीज़न)-कम-ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट फर्स्ट क्लास किरणदीप सिंह के सामने पेश किया। सातवें आरोपी को शनिवार को ही कोर्ट में पेश किया गया था। सुनवाई के बाद कोर्ट ने सभी छह आरोपियों को तीन दिन की पुलिस कस्टडी में भेज दिया। इस दौरान पुलिस हमले से जुड़ी और जानकारी और इसके पीछे किसी बड़ी साज़िश का पता लगाने के लिए उनसे पूछताछ करेगी।
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