उत्तराखंड के चमोली जिले में अलकनंदा नदी पर बन रही विष्णुगाड़-पीपलकोटी जल विद्युत परियोजना की सुरंग में भूस्खलन की चपेट में आने की वजह से सात मजदूरों की मौत हो गई जबकि 11 घायल बताए जा रहे हैं।

प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, सुरंग से पानी और मलबा आ जाने के बाद शुरू किए गए रेस्क्यू ऑपरेशन में कुल 22 मजदूर बाहर निकाले गए। इनमें से सात की मौत हो चुकी है। चमोली के डीएम गौरव कुमार मौके पर मौजूद हैं।

रेस्क्यू ऑपरेशन में जुटे एनडीआरएफ के इंस्पेक्टर अमृत लाल मीणा ने मीडिया को बताया कि हादसे की जानकारी मिलने के बाद उनकी टीम ने सुरंग में जाकर देखा कि पानी छाती से ऊपर है।

उन्होंने बताया कि सुरंग में जाने वाली टीम के कुछ सदस्यों के पास पानी के अंदर ऑपरेशन करने के लिए खास उपकरण थे। उन्होंने घटना वाली जगह से चार शवों को बाहर निकाला।

कब हुई घटना?

लोकल मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, चमोली की इस सुरंग में गुरुवार शाम करीब पौने सात बजे सुरंग में काम कर रहे मजदूर अचानक पानी और मलबा आ जाने की वजह से फंस गए।

इन मजदूरों में से अधिकतर बिहार, झारखंड और छत्तीसगढ़ से हैं। इस सुरंग की लंबाई करीब साढ़े तीन किमी है, जिस जगह हादसा हुआ, वह प्रवेश द्वार से 1.8 किमी अंदर बताई जा रही है।

रेस्क्यू में आर्मी भी जुटी

इससे पहले न्यूज एजेंसी ANI ने जानकारी दी कि सुरंग से मजदूरों को रेस्क्यू करने के लिए आर्मी, एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीम लगी हुई है।

गोपेश्वर स्थित जिला अस्पताल के डॉक्टर आयुष ने मीडिया को बताया कि सुरंग से निकाले गए 19 लोगों को उनके अस्पताल में लाया गया, जिनमें से सात को मृत घोषित कर दिया गया। उन्होंने बताया कि 13 मजदूरों की हालत स्थिर थी। इन मजदूरों में से दस को भर्ती किया गया है। एक युवक को श्रीनगर स्थित बेस हॉस्पिटल रेफर किया गया है।

पुष्कर सिंह धामी ने की आपात बैठक

इस हादसे के बाद राज्य के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने देहरादून में राज्य के सीनियर अधिकारियों के साथ आपात मीटिंग की। उन्होंने X पर एक पोस्ट के जरिए कहा कि सुरंग में फंसे 22 श्रमिकों में से अब तक 16 मजदूरों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया है। अन्य मजदूरों को बाहर निकालने के लिए रेस्क्यू ऑपरेशान जारी है। उन्होंने बताया कि सुरंग से रेस्क्यू किए गए कुछ मजदूरों से उन्होंने फोन पर बात की है।

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नवंबर 2023 में उत्तरकाशी के सिल्कयारा में बनाई जा रही सुरंग में मलबा आ जाने की वजह से 41 मजदूर 17 दिनों तक फंसे रहे थे। रिपोर्ट में जानिए उनका रेस्क्यू कैसे किया गया था।