उत्तराखंड के चमोली जिले में सोमवार को अतिवृष्टि के कारण नीति घाटी में चीन की सीमा को जोड़ने वाला एक लोहे का पुल बह गया। साथ ही पुल से बहने से घाटी के 12 सीमांत गांवों के साथ ही सेना और आईटीबीपी की चौकियों का संपर्क टूट गया है। अचानक आए पानी के तेज बहाव के कारण नीति-मलारी रोड पर तमक घाटी के पास बना वैली ब्रिज, एक डोजर और एक गाड़ी बह गया।

हालांकि प्रशासन ने आनन-फानन में अस्थायी रूप से एक वैकल्पिक मार्ग बना दिया है, जिससे लोगों की परेशानी कम हो सके।

तमक नाले में आया उफान

न्यूज एजेंसी एएनआई के मुताबिक चमोली पुलिस ने बताया कि मलारी के पास तमक नाले के उफान होने से उस पर बना पुल (वैली पुल) बह गया है, जिससे चीन के सीमा से जुड़ा रास्ता बाधित हो गया है। हालांकि अभी तक किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है। पुलिस, प्रशासन, SDRF और NDRF की टीमों को घटनास्थल पर भेजा गया है। चमोली पुलिस स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है।

बीआरओ की गाड़ी और ड्राइवर बहे

इस घटना को लेकर चमोली के ADM विवेक प्रकाश ने कहा, “वहाँ एक ‘तमक नाला’ है और आज शाम 5:30 बजे वहाँ पानी का तेज बहाव आया। इस वजह से वहाँ बना वैली ब्रिज बह गया। BRO के अधिकारी और कर्मचारी आस-पास ही मौजूद थे। BRO का एक वाहन और उसका ड्राइवर लापता हो गए हैं। तलाशी अभियान चल रहा है और SDRF की एक टीम को वहाँ भेजा गया है।

एडीएम ने आगे बताया, “पुल के दूसरी तरफ करीब 15-16 गाँव हैं। हम संपर्क बहाल करने के लिए तेजी से कोशिश कर रहे हैं ताकि कल तक सेवाएँ फिर से शुरू की जा सकें। मैं BRO के लगातार संपर्क में हूँ और उन्हें जरूरी मदद या संसाधन उपलब्ध कराने की कोशिश कर रहा हूँ। हम ITBP के साथ भी तालमेल बिठा रहे हैं ताकि दूसरी तरफ के हालात का पता लगाया जा सके और यह जाना जा सके कि वहाँ कितने पर्यटक हो सकते हैं, ताकि उस इलाके में मौजूद लोगों के लिए जरूरी कदम उठाए जा सकें।”

वैकल्पिक इंतजाम किया गया

उत्तरकाशी जिला प्रशासन ने बताया कि PMGSY पुरोला डिवीन के तहत आने वाली सांकरी-ओसला मोटर रोड पर गाड़ियों और पैदल चलने वालों की आवाजाही एक वैकल्पिक इंतजाम के जरिए बहाल कर दी गई है। गियागाड धारा का जलस्तर बढ़ने से यहाँ बना एक अस्थायी पुल बह गया था।

आवाजाही हुई बहाल

गियागाड पर बना अस्थायी पुल जलस्तर में अचानक बढ़ोतरी के कारण बह गया था, जिससे ओसला और आस-पास के गाँवों से संपर्क टूट गया था। स्थिति का तुरंत संज्ञान लेते हुए, जिला मजिस्ट्रेट प्रशांत आर्य ने संबंधित विभाग को तत्काल वैकल्पिक इंतजाम करने के निर्देश दिए। अब पैदल चलने और आने-जाने के लिए एक अस्थायी रास्ता बना दिया गया है, जिससे आवाजाही फिर से शुरू हो गई है और धारा पार करने में मुश्किलों का सामना कर रहे ग्रामीणों को राहत मिली है।

जिला प्रशासन प्रभावित इलाके में स्थिति पर लगातार नजर रख रहा है और स्थानीय निवासियों की सुरक्षा और सुविधा को प्राथमिकता देते हुए जरूरी इंतजाम सुनिश्चित कर रहा है। प्रशासन ने लोगों से यह भी अपील की है कि जब भी नदियों और धाराओं का जलस्तर बढ़े तो वे सावधानी बरतें और सिर्फ सुरक्षित रास्तों का ही इस्तेमाल करें।

मुख्यमंत्री ने लिया संज्ञान

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने चमोली ज़िले में ज्योतिर्मठ-मलारी मोटर रोड पर तमक नाले में तेज पानी के बहाव के कारण वैली ब्रिज के बह जाने की घटना का संज्ञान लिया है। मुख्यमंत्री ने हालात का जायजा लेने के लिए आपदा प्रबंधन और पुनर्वास सचिव विनोद कुमार सुमन से बात की।

मुख्यमंत्री धामी ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे राहत और बचाव कार्यों को सबसे अधिक प्राथमिकता दें, निचले इलाकों में जरूरी एहतियाती उपाय करें, जोखिम वाली जगहों पर रहने वाले लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करें और हालात सामान्य होने तक प्रभावित सड़क पर आवाजाही रोक दें।

यह भी पढ़ें: उत्तराखंड हाईकोर्ट ने पुलिस की कार्रवाई को बताया ‘गुंडागर्दी’, कहा- विरोध-प्रदर्शन में शामिल होना गलत नहीं

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने मंगलवार, 21 जुलाई 2026 को उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी (यूपीपी) के अध्यक्ष प्रभात ध्यानी को ऋषिकेश रेलवे स्टेशन पर रोककर हिरासत में लेने के मामले में पुलिस की कार्रवाई पर कड़ी नाराजगी जताई। अदालत ने साफ कहा कि किसी नागरिक को शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन में शामिल होने से रोकना और बिना वैध कानूनी आधार के हिरासत में लेना संवैधानिक व्यवस्था के खिलाफ है। कोर्ट ने पुलिस से पूछा कि क्या उसका काम लोगों के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा करना है या सरकार की छवि बचाना। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें