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मुरैना की प्यास बुझाएगा चंबल का पानी

पानी की कमी के कारण अपने जलचरों की प्यास बुझाने में असफल हो रही चंबल नदी पर अब मुरैना शहर के लोगों की प्यास बुझाने का भी बोझ डालने की तैयारी है..

Author मुरैना | December 24, 2015 23:17 pm
चंबल की घाटी। (फाइल फोटो)

पानी की कमी के कारण अपने जलचरों की प्यास बुझाने में असफल हो रही चंबल नदी पर अब मुरैना शहर के लोगों की प्यास बुझाने का भी बोझ डालने की तैयारी है। चंबल अपने पानी से पहजे ही धौलपुर और भरतपुर की प्यास बुझा रही है। मुरैना शहर को चंबल के पानी की आपूर्ति के जिए नगर निगम राजघाट से मुरैना शहर के बीच जगभग 20 किमी. लंबी पाइप जाइन बिछाने की तैयारी में है। केंद्र की अमृत योजना से इस योजना के लिए 135 करोड़ रुपए का बजट भी मंजूर हो गया है।

चंबल पहले केवल अपने किनारे बसे धौलपुर शहर की प्यास बुझाती थी। इससे उसका जलस्तर प्रभावित नहीं होता था। कुछ साल पहजे 100 से ज्यादा किमी. दूर भरतपुर की प्यास बुझाने के जिए चंबल से पानी जे जाया गया तब नदी की सेहत पर नजर रखने वालों ने चेताया था कि गर्मी में जब भी नदी का जलस्तर कम हो जाता है तब इसमें से पानी खींचकर पीने के लिए ले जाने से इसमें पलने वाले जलचरों को पानी का संकट हो सकता है। विशेष तौर पर चंबल अभ्यारण्य के इलाके से पानी लेना यहां चल रही घड़ियाल संरक्षण परियोजना घड़ियालों, कछुओं और डॉल्फिन मछलियों के अस्तित्व के लिए खतरनाक हो सकता है। लेकिन राजस्थान सरकार सरकारी, गैर सरकारी संस्थाओं की आपत्तियों को अनदेखा करके राजघाट पर इंटकवेल बनाकर पाइप लाइन से पानी भरतपुर ले गई। इसके चलते चंबल का जलस्तर गर्मियों में बहुत कम हो जाता है। चंबल सफारी के जिए राजस्थान-मध्यप्रदेश की सरकारें जो मोटर बोट चलाती हैं वे भी पानी की कमी से जूझती हुई पर्यटकों को केवल बीच नदी में घुमाकर घुमाने की खानापूर्ति कर रही हैं।

मुरैना से चंबल का राजघाट लगभग 20 किमी. दूर है, जबकि मुरैना शहर के 5 किमी. के दायरे में आसन, सांक और क्वारी नदियां हैं, इनमें पानी भी रहता है। देखरेख के अभाव में गर्मियों में इनका जलस्तर कम हो जाता है। लेकिन तरकीबों का उपयोग करके इसे बढ़ाया जा सकता है। इन नदियों का पानी मुरैना की प्यास बुझा सकता था। लेकिन नगर निगम और जिला प्रशासन ने केंद्र की अमृत योजना के तहत चंबल से पानी लाने के प्रोजेक्ट की मंजूरी हासिज कर जी। इसके लिए केंद्र ने 135 करोड़ का बजट मंजूर किया है। इस पैसे से चंबल पर इंटैक वैज के अलावा अल्लाहबेजी पुजिल चौकी के पास पानी साफ करने का प्लांट लगाया जाएगा। इस साफ पानी को फिर पाइप के जरिए मुरैना शहर जाकर ओवरहैड टैंकों के माध्यम से मोहल्लों में घर-घर भेजा जाएगा।

मुरैना शहर में भूजल का स्तर बहुत ज्यादा खराब नहीं है, फिर जलचरों को प्यासा मारकर शहर में चंबल का पानी लाने की योजना क्यों बनी इसका जवाब नगर निगम प्रशासन ही दे सकता है।

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