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केंद्र ने राजस्व सेवा के 11 अफसरों को किया बर्खास्त

सरकार ने बिना अनुमति पांच साल से अधिक समय तक अनुपस्थित रहने वाले भारतीय राजस्व सेवा (आइआरएस) के 11 अधिकारियों को बर्खास्त कर दिया है

Author नई दिल्ली | January 18, 2016 2:58 AM
केन्द्रीय उत्पाद एवं सीमा शुल्क बोर्ड (सीबीईसी)

सरकार ने बिना अनुमति पांच साल से अधिक समय तक अनुपस्थित रहने वाले भारतीय राजस्व सेवा (आइआरएस) के 11 अधिकारियों को बर्खास्त कर दिया है और कहा है कि वे किसी तरह का सेवानिवृत्ति लाभ पाने के हकदार नहीं होंगे। केंद्रीय उत्पाद एवं सेवा शुल्क बोर्ड (सीबीइसी) ने चार जनवरी को 11 अधिकारियों को बर्खास्त करने के आदेश एक साथ जारी किए। बोर्ड का कहना है कि लंबे समय तक उनकी अनुपस्थिति को राजस्व सेवा (सीमा शुल्क एवं उत्पाद शुल्क) से इस्तीफा मान लिया गया है।

आदेश में कहा गया कि इस्तीफा उसी तारीख से माना जाएगा जिससे वे अनुपस्थित हैं। जिन वरिष्ठ अधिकारियों को बर्खास्त किया गया है उनमें दो संयुक्त आयुक्त, पांच उपायुक्त और तीन सह आयुक्त हैं। बर्खास्त अधिकारियों में सबसे ऊपर सह आयुक्त स्मिता रावत को 18 साल से अनुपस्थित रहने के लिए बर्खास्त किया गया है। वे आखिरी बार जून 1997 में कार्यालय आई थीं। इसी तरह संयुक्त आयुक्त मीनूजी कृष्णन 2003 से और राजेश कुमार झा 2005 से दफ्तर नहीं आ रहे हैं।

बर्खास्त किया गया है: बर्खास्त होने वाले उपायुक्तों में एनके प्रसाद व राज्यश्री वाघरे क्रमश: 2000 व 2001 से कार्यालय नहीं आ रहे थे। उपायुक्त बिजिलमाला वेंकट रमेश 2005 से जबकि अंकुर अग्रवाल 2007 से और डीके धवन 2000 से कार्यालय नहीं आ रहे थे और इन्हें सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है। अतिरिक्त आयुक्त संदीप आहूजा 2007 से दफ्तर से गायब थे।

इन 11 अधिकारियों के खिलाफ केंद्रीय प्रशासनिक सेवा (आचार) नियम के तहत कार्रवाई की गई है और राष्ट्रपति ने निरंतर अनुपस्थिति को भारतीय राजस्व सेवा (सीमा शुल्क एवं केंद्रीय उत्पाद शुल्क) से इस्तीफा मानते हुए इस पर सहमति जता दी। सीसीएस (छुट्टी) नियम, 1972 में कहा गया है कि कोई सरकारी अधिकारी यदि विदेश सेवा के अलावा पांच साल से अधिक समय तक छुट्टी या छुट्टी के बगैर अनुपस्थित रहता है तो इसे सरकारी सेवा से इस्तीफा माना जाएगा। सीबीइसी ने कहा कि बर्खास्त अधिकारियों को सेवानिवृत्ति का लाभ नहीं मिलेगा।

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