सरकार ने गिनाए MSP बढ़ने के फायदे, किसान बोले- कागजों पर बढ़ाने से कुछ नहीं होगा, समझें न्यूनतम समर्थन मूल्य का पूरा खेल?

सरकार ने बुधवार को गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) 40 रुपये बढ़ाकर 2,015 रुपये प्रति क्विंटल कर दिया। इसके अलावा सरसों का MSP 400 रुपये बढ़ाकर 5,050 रुपये प्रति क्विंटल किया गया है।

MSP Modi
क्या सरकार के MSP बढ़ाने से किसानों की नाराजगी कुछ कम होगी। फाइल फोटो। सोर्स- इंडियन एक्सप्रेस

सरकार ने बुधवार को गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) 40 रुपये बढ़ाकर 2,015 रुपये प्रति क्विंटल कर दिया। इसके अलावा सरसों का MSP 400 रुपये बढ़ाकर 5,050 रुपये प्रति क्विंटल किया गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (CCEA) की बैठक में इस संबंध में फैसला लिया गया। बताते चलें कि सरकार खरीफ और रबी दोनों मौसमों में उगाई जाने वाली 23 फसलों के लिए MSP तय करती है। खरीफ (गर्मी) फसलों की कटाई के तुरंत बाद अक्टूबर से रबी (सर्दियों) फसलों की बुवाई शुरू हो जाती है। गेहूं और सरसों रबी की प्रमुख फसलें हैं।

सरकार ने गिनाए फायदे: केंद्रीय कृषि मंत्री ने इस फैसले के बाद प्रेस कांफ्रेंस कर MSP के 40 रुपये बढ़ाए जाने के फायदे गिनाए। नरेंद्र तोमर के अनुसार गेंहू के एक क्विंटल पर लागत 1008 रुपये आती है। 2022-23 की दर 1975 से बढ़कर 2015 रुपये हो गई है। सरकार के अनुसार नई दरों के लागू होने के बाद किसानों की लागत पर MSP करीब 100 फीसदी की बढ़ोतरी पर है। उन्होंने कहा कि जौ का MSP 2021-22 में 1600 रुपए क्विटंल था अब 1635 हो गया है। केंद्रीय मंत्री के अनुसार चना का MSP 2021-22 में 5100 रुपए क्विंटल था अब 5230 रुपए क्विटंल हो गया। मसूर 2021-22 में 5100 रुपए क्विंटल था अब 5500 रुपए हो गया। सरसों 4,650 रुपए क्विंटल था अब 5,050 हो गया। सूरजमुखी 2020-21 में 5,327 रुपए क्विंटल था अब 5,441 हो गया है।

किसानों ने सरकार के दावों को किया खारिज: वहीं कृषि कानून के खिलाफ आंदोलन कर रहे किसानों से जब इस बढ़ोतरी को लेकर सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि कागजों पर MSP बढ़ाने से कुछ नहीं होगा, हमारी फसलें मंडियों में MSP पर बिकनी चाहिए। करनाल के एक किसान ने कहा कि आजादी के बाद से लाल बहादुर शास्त्री ने जो एमएसपी दी थी, उसके बाद आज तक कोई न्याय नहीं मिला था। उस समय तीन कुंतल अनाज बेचकर एक तोला सोना आ जाता था। आज के जमाने के हिसाब से 40 रुपये प्रति कुंतल का भाव कुछ भी नहीं है, इतने दाम में तो आजकल पैरों की जूती भी नहीं आती है।

उन्होंने कहा कि अगर किसानों की आय बढ़ानी है तो महंगाई के हिसाब से हमारे दामों को बढ़ाया जाए, तब तो फायदा है वरना कोई फायदा नहीं। किसानों ने सरकार के लागत पर 100 फीसदी वृद्धि के दावे को भी खारिज करते हुए कहा कि किसानों की लागत 1068 रुपये नहीं आती है, सरकार के कैलकुलेशन में बहुत सारी चीजे होती ही नहीं है फिर भी एक क्टिंल पर लागत इससे ज्यादा आती है।

क्या होता है MSP (न्यूनतम समर्थन मूल्य): MSP वह दर है जिस पर सरकार किसानों से अनाज खरीदती है। मौजूदा समय में, सरकार खरीफ और रबी दोनों मौसमों में उगाई जाने वाली 23 फसलों के लिए एमएसपी तय करती है। इसको तय करने के कुछ आधार होते हैं, जिसमें उत्पाद की लागत, फसल के दाम में इस्तेमाल होने वाली चीजों के दामों में बदलाव, बाजार का रूख, डिमांड और सप्लाई की स्थिति और राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्थितियां कैसी हैं। किसानों की कंप्रहेंसिव कॉस्ट को C2 कहा जाता है। इसको जोड़ने के बाद उसका डेढ़ गुना दाम किसानों को दिया जाना चाहिए। सी-2 के तहत खाद, बीज, पानी के दाम के साथ किसान परिवार की मजदूरी, जमीन का किराया और पूंजी पर लगने वाले ब्याज को भी शामिल किया जाना चाहिए।

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