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16 अक्तूबर 2016 से लापता नजीब मामले की जांच के लिए जेएनयू पहुंचा CBI का दल

सीबीआई का एक दल 16 अक्तूबर 2016 को अपने हॉस्टल से रहस्यमय तरीके से लापता हो गए छात्र नजीब अहमद के मामले की जांच के लिए जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) पहुंचा।
Author नई दिल्ली | June 19, 2017 17:17 pm
जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय

सीबीआई का एक दल 16 अक्तूबर 2016 को अपने हॉस्टल से रहस्यमय तरीके से लापता हो गए छात्र नजीब अहमद के मामले की जांच के लिए जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) पहुंचा। सीबीआई दल जेएनयू के माही-मांडवी हॉस्टल में अहमद और एबीवीपी छात्रों के बीच हुए झगड़े के आरोपों और उन परिस्थितियों की जांच कर रहा है जिसके कारण शायद यह झगड़ा हुआ। साथ ही उनके लापता होने से पहले की घटनाओं की भी जांच की जा रही है। सूत्रों ने बताया कि सीबीआई दल के उन संदिग्धों और लोगों से मिलने की संभावना है जिनका नाम इस मामले में सामने आया है।

नजीब की मां फातिमा नफीस ने इस मामले की जांच कर रहे सीबीआई अधिकारियों से हाल ही में मुलाकात की थी। उन्होंने अपने बेटे के हॉस्टल से गायब होने से पहले के घटनाक््र>म के बारे में जानकारी दी। नजीब छुट्टियों के बाद 13 अक्तूबर 2016 को विश्वविद्यालय लौटे थे। उन्होंने 15-16 अक्तूबर की मध्यरा ाि को उन्होंने अपनी मां को फोन करके कहा कि सबकुछ ठीक नहीं है। हॉस्टल में नजीब के एक ही कमरे में रहने वाले छात्र ने फातिमा को बताया वह झगड़े में घायल हो गए थे।
बातचीत के बाद फातिमा उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर से बस से दोपहर को दिल्ली पहुंची। आनंद विहार पहुंचने के बाद फातिमा ने अपने बेटे से फोन पर बात की और हास्टल में उनसे मिलने के लिए कहा।

फातिमा ने अपनी शिकायत में कहा कि जब वह माही हॉस्टल में नजीब के कमरा नंबर 106 में पहुंची तो नजीब वहां नहीं थे। दिल्ली पुलिस उनके बेटे को ढूंढने में नाकाम रही जिसके बाद फातिमा ने सीबीआई जांच की मांग करते हुए दिल्ली उच्च न्यायालय का रूख किया। उल्लेखनीय है कि 16 मई को न्यायमूर्ति जी एस सिस्तानी और न्यायमूर्ति रेखा पल्ली ने सीबीआई को इस मामले की जांच सौंपते हुए निर्देश दिया कि इसकी निगरानी ऐसा अधिकारी करेगा जो डीआईजी से नीचे की रैंक का नहीं होगा। इस मामले पर अगली सुनवाई 17 जुलाई को होगी।

उच्च न्यायालय ने कई महीनों की जांच के बाद भी छात्र का पता लगाने में नाकाम रहने पर पुलिस को फटकार लगाई थी। अदालत ने पुलिस के आचरण पर सवाल उठाते हुए कहा था कि वह मामले को सनसनीखेज बनाने की कोशिश कर रही है क्योंकि वह रिपोर्टों को सीलबंद लिफाफे में दायर कर रही है जबकि इनमें ‘ ‘कुछ भी गोपनीय, नुकसान पहुंचाने वाला या अहम ‘ ‘ नहीं है।

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