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सृजन घोटाला: जांच में तेजी लाने के लिए दिल्ली से भागलपुर भेजे गए CBI एसपी समेत आधा दर्जन अधिकारी

भागलपुर के जिलाधिकारी के अनुरोध पर बिहार सरकार ने वित्त विभाग की जांच टीम बुधवार को भेजी है।
सृजन घोटाले की सीबीआई जांच कर रही है।

सैकड़ों करोड़ रुपए के सृजन घोटाले की जांच कर रही सीबीआई टीम को सहयोग करने और जांच में तेजी लाने के लिए दिल्ली से सीबीआई के एक एसपी कुलदीप बालियान समेत आधा दर्जन अधिकारी भागलपुर आए हैं। इधर, सीबीआई के विशेष जज अजय कुमार श्रीवास्तव ने बुधवार को बैंक ऑफ बड़ौदा के रिटायर मुख्य प्रबंधक अरुण कुमार सिंह की नियमित जमानत अर्जी खारिज कर दी। ये सृजन घोटाले के आरोपी हैं और भागलपुर की जेल में बंद है। वहीं, इसी मामले के आरोपी भागलपुर जेल में बंद एडीएम रैंक के कल्याण अधिकारी अरुण कुमार को पटना की बेऊर जेल में अदालत के आदेश के बाद शिफ्ट कर दिया गया है। बिहपुर ब्लॉक के बीडीओ सत्येंद्र सिंह की अर्जी पर थाना कोतवाली ने सृजन से जुड़े मामले की एक और एफआईआर दर्ज की है। भागलपुर के जिलाधीश के अनुरोध पर बिहार सरकार ने वित्त विभाग की दस सदस्यी जांच टीम बुधवार को भेजी है। यह टीम शुरू से अबतक सृजन से जुड़े सरकारी राशि के गबन का आंकलन करेगी।

मसलन सृजन घोटाले के उजागर होने को पांच महीने से ज्यादा हो गए हैं फिर भी सही-सही यह आंकलन नहीं हो पाया कि आखिर कितने करोड़ रुपए की सरकारी खजाने को चपत लगी। वित्त विभाग की टीम भूअर्जन, जिला परिषद, कल्याण विभाग, डीआरडीए, जिला नजारत वगैरह विभागों के बही खातों की जांच करने के बाद पर निष्कर्ष पर पहुंचेंगी। उपविकास आयुक्त आंनद शर्मा के मुताबिक, महालेखकार की टीम भी अंकेक्षण का काम निपटाकर जा चुकी है लेकिन अभी रिपोर्ट आनी बाकी है। वहीं, घोटाले से जुड़े फरार एडीएम राजीव रंजन सिंह के खिलाफ कार्रवाई करने की इजाजत पटना से सामान्य विभाग ने दे दी है। राजीव सृजन घोटाला उजागर होते ही फरार हो गर थे और 31 अगस्त को फरार रहते ही पद से अवकाश ग्रहण कर गए हैं। राजीव भूअर्जन अधिकारी रह चुके हैं। इन्हें हाजिर होने के लिए प्रशासन की ओर से कई नोटिस भेजे गए लेकिन वे अबतक गायब हैं।

सृजन फर्जीवाड़े से जुड़े बिहपुर ब्लॉक में ढाई करोड़ रुपए का मामला इंदिरा आवास योजना से जुड़ा था जो बैंक ऑफ बड़ौदा में जमा किया गया था। बैंक से यह धन सृजन के खाते में ट्रांसफर हुआ था। इस तरह सृजन से जुड़े अबतक 27 मामले दर्ज हुए हैं। इनमें एक सहरसा, दो बांका और 24 एफआईआर भागलपुर जिले में दर्ज हुई हैं। इनमें से सहरसा, बांका और भागलपुर समेत 15 मामले सीबीआई के सुपुर्द किए जा चुके हैं। सूत्रों के मुताबिक, बाकी भागलपुर के 12 मामले भी जल्द सीबीआई को सौपने की तैयारी चल रही है। ध्यान रहे कि सृजन घपले की जांच 22 अगस्त से सीबीआई ने संभाली हुई है। इससे पहले पुलिस की एसआईटी ने 18 सरकारी बैंकों व सृजन के अधिकारियों और कर्मचारियों को हिरासत में लेकर गहन पूछताछ की थी। इसके बाद सबूत जुटाकर इन्हें जेल भेज दिया गया था।

मालूम हो कि जेल गए लोगों में से महेश मंडल की न्यायिक हिरासत में ही मौत हो गई। यहां यह बताना जरूरी है कि 90 दिन गुजर जाने के बाद भी सीबीआई जेल में बंद केवल 9 आरोपियों के खिलाफ ही आरोप पत्र दायर कर पाई है। जांच को गति देने के लिए ही दिल्ली से सीबीआई के और अधिकारी भेजे गए हैं। इस बीच आठ लोगों की जमानत भी हुई है। इनमें जिलाधीश के सहायक प्रेम कुमार भी हैं। जेल से रिहा होने के बाद डीएम ने इनकी गुजारिश पर निलंबन वापस ले एसडीओ दफ्तर तबादला कर दिया था। सूत्रों के मुताबिक, सीबीआई जांच दल अबतक भागलपुर में पदस्थापित रहे आईएएस, डिप्टी कलेक्टर, सरकारी कर्मचारियों, बैंक के प्रबंधकों और कर्मचारियों, सृजन संस्था से जुड़े और इससे फायदा लेने वाले तकरीबन एक सौ से ज्यादा लोगों से पूछताछ कर चुकी है। जानकार बताते हैं कि जल्द ही और मामलों में आरोप पत्र दाखिल कर आरोपियों की गिरफ्तारी सीबीआई द्वारा की जाएगी।

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