खेती के लिए पानी की पाइलाइन लगाने के काम ने बलिया के चार लोगों को करीब दो साल पहले एक-दूसरे से मिलाया था। उस समय शायद किसी ने नहीं सोचा होगा कि यही चार लोग बाद में एक चर्चित हत्याकांड की जांच के केंद्र में आ जाएंगे। ये चारों उन सात लोगों में शामिल हैं जिन्हें केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने पश्चिम बंगाल के माध्यामग्राम में 6 मई को हुई चंद्रनाथ रथ की हत्या के मामले में गिरफ्तार किया है। चंद्रनाथ रथ पश्चिम बंगाल भाजपा नेता और वर्तमान मुख्यमंत्री सुभेंदु अधिकारी के करीबी सहयोगी बताए जाते हैं। यह हत्या विधानसभा चुनाव में भाजपा की बड़ी जीत के तुरंत बाद हुई थी।

बलिया के ये चारों आरोपी अलग-अलग गांवों के रहने वाले हैं, जो एक-दूसरे से करीब 50 किलोमीटर के दायरे में स्थित हैं। गिरफ्तार आरोपियों के परिवारों के अनुसार, उनकी पहचान करीब दो साल पहले काम के दौरान हुई थी और बाद में वे कभी-कभार संपर्क में रहते थे। परिवारों का कहना है कि उन्हें समझ नहीं आ रहा कि उनके परिजन इस हाई-प्रोफाइल मामले में कैसे फंस गए।

सीबीआई ने बलिया के चार लोगों के अलावा बिहार के बक्सर जिले के मयंक राज मिश्रा और विक्की मौर्य व उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले के विनय राय उर्फ पंपम को भी गिरफ्तार किया है। सभी से पूछताछ की जा रही है।

संपन्न किसान परिवारों से आते हैं चारों

द इंडियन एक्सप्रेस ने जब उनके घरों का दौरा किया गया तो पता चला कि चारों आरोपी अपेक्षाकृत संपन्न किसान परिवारों से आते हैं। उनके परिवार बड़े घरों में रहते हैं और मुख्य रूप से खेती पर निर्भर हैं। कुछ लोगों ने छोटे कारोबार भी शुरू किए थे, जिनके जरिए उनकी आपस में पहचान बनी। परिवारों का दावा है कि उन्हें यह भी नहीं पता कि ये लोग कभी पश्चिम बंगाल गए भी थे या नहीं।

सीबीआई सूत्रों का कहना है कि इन गिरफ्तारियों से जांच मुख्य आरोपी तक पहुंचने के करीब पहुंची है, जिसे हत्या का मास्टरमाइंड माना जा रहा है। एक अधिकारी ने कहा, “हम यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि किसने किसे काम पर रखा और हत्या के पीछे असली वजह क्या थी।”

चारों बलिया निवासियों में से केवल एक को छोड़कर बाकी सभी का किसी न किसी तरह क्रिमिनल रिकॉर्ड रहा है। हालांकि, इनमें से सिर्फ एक आरोपी का आपराधिक रिकॉर्ड बड़ा है – ज्ञानेंद्र सिंह उर्फ मन्नू।

हत्याकांड में सबसे चर्चित आरोपी 48 वर्षीय ज्ञानेंद्र सिंह उर्फ मन्नू हैं, जो सीतल दवानी गांव के रहने वाले हैं। पुलिस रिकॉर्ड में वह हिस्ट्रीशीटर हैं और उनके खिलाफ झारखंड, बिहार, वाराणसी और बलिया में कुल 12 मामले दर्ज हैं। इनमें हत्या, हत्या के प्रयास और आर्म्स एक्ट से जुड़े मामले शामिल हैं। लेकिन ज्ञानेंद्र की पत्नी महिमा सिंह ने उन्हें आदतन अपराधी मानने से इनकार किया। उन्होंने कहा कि 12 में से 11 मामलों में उनके पति बरी हो चुके हैं।

राजनीतिक रूप से निशाना बनाया

महिमा ने कहा, “सिर्फ एक हत्या के प्रयास का मामला अभी लंबित है, जो जमीन विवाद से जुड़ा है।” बाकी सभी मामलों में फैसला उनके पक्ष में आया है। उनका आरोप है कि ग्राम प्रधान का चुनाव लड़ने की घोषणा के बाद उनके पति को राजनीतिक रूप से निशाना बनाया जाने लगा। ज्ञानेंद्र ने इंटरमीडिएट तक पढ़ाई की है और 2015 में महिमा से शादी की थी।

गांव में अभी भी उनके चुनाव प्रचार के पोस्टर और होर्डिंग लगे हुए हैं, जो उनकी राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं की याद दिलाते हैं।
ज्ञानेंद्र के बड़े भाई दया शंकर सिंह लगभग 30 साल तक पश्चिम बंगाल की एक निजी कंपनी में हेल्पर के रूप में काम कर चुके हैं। करीब एक साल पहले वे बलिया लौट आए थे। दया शंकर ने कहा, “मुझे नहीं पता कि ज्ञानेंद्र का इस मामले से क्या संबंध है। मैं पश्चिम बंगाल में अपने जाननेवालों से बात करके मामले की जानकारी जुटाने की कोशिश कर रहा हूं।”

गांव वालों के अनुसार, ज्ञानेंद्र खेती के साथ-साथ जमीन से जुड़े काम भी करते थे। हाल ही में उन्हें एक फूड प्रोडक्ट कंपनी की डिस्ट्रीब्यूटर्शिप मिली थी। उन्होंने इसी काम के लिए गोलू सिंह को रखा था, जो इस मामले का एक अन्य आरोपी है। वह ज्ञानेंद्र के घर आया-जाया करता था।

सिंचाई पाइपलाइन लगाने का करता था काम

मामले में एक अन्य आरोपी 34 वर्षीय नवीन सिंह थमनपुरा गांव के रहने वाले हैं और चारों आरोपियों में सबसे ज्यादा पढ़े-लिखे हैं। वे ग्रेजुएट हैं और किसानों के लिए सिंचाई पाइपलाइन लगाने और उसकी देखरेख का कारोबार चलाते हैं। नवीन के पिता अनिल सिंह, जो बलिया में सरकारी कर्मचारी हैं, उनका कहना है कि बाकी आरोपी नवीन के इसी काम के जरिए उनसे जुड़े।

उन्होंने बताया, “दो गिरफ्तार लोग कुछ बार हमारे घर आए थे, लेकिन सिर्फ काम के सिलसिले में। राज कुमार ने कुछ समय नवीन के साथ काम सीखा था, जबकि ज्ञानेंद्र ने अपने खेत में पाइपलाइन लगवाने के बाद दो-तीन बार घर पर मुलाकात की थी। वे काम के सिलसिले में एक दूसरे को जानते थे, कोई करीबी दोस्त नहीं थे।” अनिल सिंह ने कहा कि उन्हें समझ नहीं आ रहा कि बलिया से इतनी दूर कानूनी लड़ाई कैसे लड़ी जाएगी।

वहीं, 28 वर्षीय गोलू सिंह बसुदेवपुर गांव के रहने वाले हैं और चारों आरोपियों में सबसे युवा हैं। उन्होंने इंटरमीडिएट तक पढ़ाई की और पिछले साल शादी के बाद कारोबार में उतर गए। उनकी 65 वर्षीय मां विद्यार्थी देवी ने कहा कि परिवार ने उनकी हृदय संबंधी बीमारी के कारण गिरफ्तारी की खबर उनसे छिपाने की कोशिश की थी। उन्होंने कहा, “मुझे लोगों से पता चला कि गोलू को गिरफ्तार कर लिया गया है।”

गोलू के चाचा सुनील सिंह ने बताया कि उनके पिता रामजी सिंह सेना में थे और 2008 में सेवानिवृत्त हुए। बच्चों की परवरिश की जिम्मेदारी मुख्य रूप से उनकी मां ने संभाली।

रोजगार की तलाश में गए थे मुंबई

21 वर्षीय राज कुमार सिंह रटोपुर गांव के रहने वाले हैं और इस मामले में सबसे पहले गिरफ्तार किए गए आरोपी बताए जाते हैं।
उन्होंने कुछ समय तक नवीन सिंह के साथ पाइपलाइन का काम सीखा था। बाद में बेहतर रोजगार की तलाश में मुंबई चले गए, जहां उन्होंने एक प्राइवेट कंपनी में काम किया। गिरफ्तारी से कुछ दिन पहले ही वे अपने गांव लौटे थे।

CBI का दावा है कि राज कुमार को मुजफ्फरनगर से गिरफ्तार किया गया, जब वह कथित तौर पर उत्तराखंड भागने की कोशिश कर रहे थे। उनके पिता त्रिभुवन नारायण सिंह, जो पेशे से इलेक्ट्रीशियन हैं, उन्होंने बताया कि नवीन और ज्ञानेंद्र पहले उनके घर आ चुके थे और पिछले साल राज कुमार के जन्मदिन समारोह में भी शामिल हुए थे।

उन्होंने कहा, “राज कुमार ने इंटरमीडिएट के बाद काफी समय खाली बिताया था। इसलिए हमने उसे काम सीखने और बाहर रोजगार तलाशने के लिए प्रेरित किया।” त्रिभुवन ने बताया कि पिछले कुछ वर्षों में राज कुमार परिवार से कम बातचीत करने लगे थे और अपनी गतिविधियों के बारे में ज्यादा नहीं बताते थे। उन्होंने कहा, “हमने फैसला किया है कि चार्जशीट दाखिल होने तक किसी नतीजे पर नहीं पहुंचेंगे।”

नवीन और राज कुमार के खिलाफ पहले मारपीट से जुड़े मामलों में नाम आने की बात उनके परिवारों ने स्वीकार की है, जबकि स्थानीय पुलिस के अनुसार गोलू सिंह का कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है।