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सृजन घोटाले में नाजिर अमरेंद्र कुमार की सीबीआई द्वारा गिरफ्तारी बनी पहेली

सूत्रों के मुताबिक, अमरेंद्र कुमार से सीबीआई बीते दो दिनों से पूछताछ कर रही थी लेकिन अचानक खबर फैली कि रविवार को उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया है।

सृजन घोटाले की सीबीआई जांच कर रही है।

सैकड़ों करोड़ रुपए के सृजन घोटाले में जिला नजारत शाखा के नाजिर अमरेंद्र कुमार को सीबीआई के गिरफ्तार करने की खबर फैली हुई है। सूत्रों की मानें तो इस मामले में सीबीआई की यह सबसे बड़ी और पहली कार्रवाई मानी जा रही है। लेकिन गिरफ्तारी और उसके बाद तीन दिनों के रिमांड पर लेने की खबर की अभी तक आधिकारिक पुष्टि नहीं हो पाई है। फिलहाल सीबीआई के जांच अधिकारी मीडिया से दूरी बनाए हुए हैं। सूत्रों के मुताबिक, अमरेंद्र से सीबीआई बीते दो दिनों से पूछताछ कर रही थी लेकिन अचानक खबर फैली कि रविवार को उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। इसे बाद उन्हें पटना सीबीआई अदालत में पेश कर तीन दिनों के रिमांड में ले लिया गया। अदालत के आदेश से उन्हें भागलपुर जेल लाया गया और वहां से सीबीआई अपनी हिरासत में पूछताछ के लिए सबौर के बिहार कृषि विश्वविद्यालय के गेस्ट हाउस ले गई। मालूम हो कि बीते 25 अगस्त से सीबीआई ने सृजन घपले की जांच के लिए विश्वविद्यालय को अपना दफ्तर बना रखा है।

पुलिस के एक बड़े अधिकारी ने इस बारे में पूछने पर बात को टाल दिया। दिलचस्प है कि रविवार को कोर्ट बंद रहता है और सोमवार को बिहार में सरस्वती पूजा की सरकारी छुट्टी है। इसी वजह से गिरफ्तारी की यह खबर पहेली बनी हुई है। यदि यह सच है तो सीबीआई के हाथों इस मामले की यह पहली गिरफ्तारी है। ध्यान रहे कि जिलाधीश के दस्तखत से जारी नगर विकास योजना के लिए 12 करोड़ 20 लाख 15 हजार रुपए का चेक यहां की इंडियन बैंक से बाउंस होने के बाद घोटाले का भेद उजागर हुआ था। इसकी पहली एफआईआर अमरेंद्र कुमार ने ही नाजिर (रोकड़पाल) की हैसियत से थाना तिलकामांझी में लिखवाई थी। इसके बाद पटना से आर्थिक अपराध की टीम जांच के लिए भागलपुर पहुंची और मामला सैकड़ों करोड़ रुपए के फर्जीवाड़े का निकला।

अमरेंद्र कुमार (फाइल फोटो)

इसके बाद एसएसपी मनोज कुमार ने एसआईटी का गठन कर छापामारी करन शुरू कर दिया। इस मामले में सरकारी व बैंक के अधिकारी और कर्मचारी व सृजन से जुड़े 18 लोगों को गिरफ्तार कर पूछताछ की गई। इनकी संलिप्तता जाहिर होने पर इन्हें जेल भी भेजा गया, जिनमें एक महेश मंडल की मौत न्यायिक हिरासत में ही हो गई। अमरेंद्र को भी सर्किट हाउस बुलाकर पूछताछ की गई लेकिन वह पुलिस को चकमा देकर फरार हो गया था। वह महीनों फरार रहा। इस बीच 22 अगस्त 2017 को मामला सीबीआई को सुपुर्द कर दिया गया। इसके बाद से सीबीआई जांच तो कर रही है मगर गिरफ्तारी एक भी नहीं कर पाई थी। इसी वजह से अमरेंद्र की गिरफ्तारी सीबीआई के लिए मायने रखती है। जानकार बताते हैं कि पूछताछ में इसने घोटाले से जुड़े कई राज खोले हैं।

वहीं दूसरी तरफ सीबीआई ने 2003 में भागलपुर के डीएम रहे केपी रमैय्या के समय सृजन महिला विकास सहयोग समिति लिमिटेड के पक्ष में जारी उनके पत्र की कापी मांगी है। मालूम हो कि केपी रमैय्या आईएएस अधिकारी हैं जिन्होंने नौकरी से इस्तीफा देकर सासाराम लोकसभा सीट से 2014 का चुनाव जदयू के टिकट पर लड़ा था और पराजित हुए थे। सीबीआई ने जिला परिषद व डीआरडीए से जुड़े सृजन घोटाले की जांच भी तेज कर दी है। सूत्रों के मुताबिक कई बिंदुओं पर अधिकारियों से लिखित जानकारी मांगी है।

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