आईडीएफसी फर्स्ट बैंक धोखाधड़ी मामले में सीबीआई ने बड़े खुलासे किए हैं। सीबीआई की जांच के अनुसार मुख्य आरोपी रिभव ऋषि ने हरियाणा सरकार के अधिकारी नरेश कुमार के घरेलू और विदेशी ट्रिप, होटल में ठहरने का खर्च उठाया और फ्रॉड में उनकी भूमिका के बदले में उन्हें कैश भी दिया। हरियाणा के पंचायत और डेवलपमेंट डिपार्टमेंट में सुपरिंटेंडेंट नरेश कुमार को इस मामले में पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है।

सीबीआई के मुताबिक चंडीगढ़ में IDFC फर्स्ट बैंक की सेक्टर 32 ब्रांच के उस समय के ब्रांच मैनेजर रिभव ऋषि ने दूसरे आरोपियों के साथ मिलकर तय प्रक्रिया का पालन किए बिना हरियाणा सरकार के विभागों के अकाउंट खोले। एजेंसी ने आरोप लगाया कि बैंकों को फेक अकाउंट डिटेल्स, जाली चेक बुक और साइन किए हुए बैंकिंग इंस्ट्रूमेंट्स जमा किए गए, जिससे अवैध ट्रांजैक्शन हुए।

सीबीआई ने दायर की चार्जशीट

हाल ही में पंचकूला कोर्ट में फाइल की गई अपनी चार्जशीट में CBI ने आरोप लगाया कि नरेश कुमार ने पंचायत विभाग के सीनियर अधिकारियों और रिभव ऋषि के बीच एक एक्टिव बिचौलिए के तौर पर काम किया। इससे IDFC फर्स्ट बैंक और AU स्मॉल फाइनेंस बैंक में मेनटेन किए गए मुख्यमंत्री ग्रामीण आवास योजना अकाउंट्स से जुड़े फ्रॉड ऑपरेशन्स को आसान बनाने में मदद मिली। सीबीआई ने कहा कि नरेश कुमार का रोल सिर्फ़ ट्रांज़ैक्शन को आसान बनाने से कहीं ज़्यादा था। सीबीआई ने आरोप लगाया कि उसने खुद फ्रॉड ट्रांज़ैक्शन के लिए टेलीफ़ोन पर कन्फर्मेशन दिया और बदले में उसे काफ़ी आर्थिक फ़ायदे मिले।

CDR से क्या पता चला?

CBI के मुताबिक कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) एनालिसिस से पता चला कि नरेश कुमार और ऋभव ऋषि के बीच फ़ोन कॉल की संख्या मार्च 2025 से काफ़ी बढ़ गई। इसमें सबसे ज़्यादा फ़्रीक्वेंसी अक्टूबर और दिसंबर 2025 के बीच दर्ज की गई। यह वह समय था जब मुख्यमंत्री ग्रामीण आवास योजना अकाउंट में कथित फ्रॉड ट्रांज़ैक्शन अपने पीक पर थे।

चार्जशीट में कहा गया है कि नरेश कुमार को M/s स्वास्तिक देश प्रोजेक्ट्स के ज़रिए क्राइम से हुई कमाई से डायरेक्ट ट्रांसफ़र के ज़रिए 1 करोड़ रुपये मिले। इन ट्रांसफ़र में 13 नवंबर, 2025 को 40 लाख रुपये, 15 नवंबर को 40 लाख रुपये, 27 नवंबर को 10 लाख रुपये और उसी दिन उसके यूनियन बैंक और HDFC बैंक अकाउंट में 10 लाख रुपये और ट्रांसफ़र हुए थे।

टोयोटा फॉर्च्यूनर की खरीद के लिए पैसे हुए ट्रांसफर

सीबीआई ने आगे आरोप लगाया कि नरेश कुमार के नाम पर टोयोटा फॉर्च्यूनर की खरीद के लिए 6 दिसंबर 2025 को मेसर्स स्वास्तिक देश प्रोजेक्ट्स के एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक खाते से एक ऑटोमोबाइल फर्म को सीधे 25 लाख रुपये का भुगतान किया गया था। सीबीआई ने यह भी आरोप लगाया कि 29 अगस्त 2025 को स्वास्तिक देश प्रोजेक्ट्स के एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक खाते से कुमार की बेटी के एचडीएफसी बैंक खाते में 10 लाख रुपये ट्रांसफर किए गए थे।

अधिकारी की विदेशी यात्राओं का खर्च उठाया

इन लाभों के अलावा सीबीआई ने आरोप लगाया कि ऋभव ऋषि ने नरेश कुमार के लिए कई यात्राओं और होटल में ठहरने का खर्च भी उठाया। इनमें 8-9 मई 2025 को 20,000 रुपये की लागत वाले जेडब्ल्यू मैरियट, जयपुर में ठहरना, 12 से 17 अगस्त 2025 के बीच बैंकॉक और मकाऊ की एक पारिवारिक यात्रा (लागत 2,29,010 रुपये थी), 5-6 जुलाई, 2025 को मुंबई ट्रिप, जिसमें नरेश कुमार ने कथित तौर पर रिभव ऋषि (अभय कुमार और अरुण शर्मा के साथ यात्रा की) जिसकी बुकिंग ऋषि के मोबाइल नंबर से जुड़ी थी, 2 अगस्त, 2025 को हैदराबाद से चंडीगढ़ की यात्रा (खर्च 16,700 रुपये था) जो उन्होंने अपनी पत्नी के साथ की, 19 से 22 अगस्त, 2025 तक पुणे के होटल नोवोटेल में तीन रात रुकना, जिसका खर्च 1,13,000 और 21 से 24 नवंबर, 2025 तक दुबई के होटल जुमेराह बुर्ज अल अरब में रुकना, जिसका खर्च 7,16,055 था रुपये शामिल था। इसका पेमेंट CBI ने आरोप लगाया कि रिभव ऋषि ने M/s फाइव स्टार ट्रैवल के ज़रिए किया था।

सीबीआई ने कहा कि इन पेमेंट की पुष्टि ट्रैवल एजेंसी के रिकॉर्ड, होटल के रिकॉर्ड और M/s डिवाइन ट्रैवल्स और M/s फाइव स्टार ट्रैवल के टैली अकाउंट से हुई है।

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