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गलत जांच करने पर सीबीआई चीफ पर लगा जुर्माना, पीड़ित को देने होंगे 15 लाख

महाराष्ट्र राज्य मानवाधिकार आयोग (एमएसएचआरसी) ने केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) के निर्देशक पर 15 लाख रुपए का जुर्माना लगाया है। सीबीआई चीफ पर यह कार्रवाई एक मामले में गलत जांच करने को लेकर की गई है। अब एमएसएचआरसी के निर्देश पर उन्हें पीड़ित पक्ष को यह रकम चुकानी पड़ेगी। यह मामला यहां एक एम.बी.ए. छात्र की रहस्यमयी मौत से जुड़ा है।

महाराष्ट्र का यह मामला एक एम.बी.ए. छात्र की रहस्यमयी मौत से जुड़ा हुआ है। (फाइल फोटो)

महाराष्ट्र राज्य मानवाधिकार आयोग (एमएसएचआरसी) ने केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) के निर्देशक पर 15 लाख रुपए का जुर्माना लगाया है। सीबीआई चीफ पर यह कार्रवाई एक मामले में गलत जांच करने को लेकर की गई है। अब एमएसएचआरसी के निर्देश पर उन्हें पीड़ित पक्ष को यह रकम चुकानी पड़ेगी। यह मामला यहां एक एम.बी.ए. छात्र की रहस्यमयी मौत से जुड़ा है। कमीशन ने इस बारे में कहा कि मृतक का पिता इस मामले में सात सालों से न्याय का इंतजार कर रहा है। मजिस्ट्रेट कोर्ट में सीबीआई चीफ के खिलाफ निकली जानकारियां इस मामले में हुई जांच और उसकी कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान लगाती है। एमएसएचआरसी की ओर से यह निर्देश सीबीआई मुखिया को विजय सिंह की शिकायत के जवाब में आए हैं। बिहार में पटना निवासी विजय उसी एम.बी.ए.छात्र के पिता हैं। 15 जुलाई 2011 को खरगर में उनके बेटे की रहस्यमी हालत में मौत हो गई थी। ऐसे में कमीशन ने कहा है कि छह हफ्तों के भीतर पीड़ित पक्ष को मुआवजा दिया जाना चाहिए और गलत जांच करने वाले अफसरों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।

एमएसएचआरसी के सदस्य एम.ए.सईद ने अपने आदेश में सीबीआई से यह भी कहा कि वह अपने अफसरों को सही जांच करने को लेकर संवेदनशील बनाए, ताकि नियमों-कानून और प्रणाली का पालन हो सके। मृतक के पिता ने साल 2011 में आयोग को शिकायत दी थी, जिसमें पांच सालों के बाद अतिरिक्त सबूतों के साथ संशोधन हुआ। सीबीआई ने हाईकोर्ट के आदेश पर इस मामले को हत्या की नजर से जांचा था। लेकिन निष्कर्ष निकला की यह हत्या नहीं बल्कि खुदकुशी थी। पनवेल में एक मजिस्ट्रेट कोर्ट में इस मामले में क्लोजर रिपोर्ट फाइल कर दी गई थी। हालांकि, कोर्ट ने उस रिपोर्ट को स्वीकारने के इन्कार कर दिया था और आरोपी को गिरफ्तार करने के आदेश जारी किया था।

संतोष जर्नादन सदन बिल्डिंग में तीन दोस्तों के साथ रहता था, जिनमें विकास कुमार, जीतेंद्र कुमार और धीरज कुमार थे। 15 जुलाई 2011 को संतोष की लाश पहले माले के फ्लैट की बाल्कनी में पड़ी मिली। पुलिस ने तब जीतेंद्र के बयान के आधार पर दुर्घटना में मौत का मामला दर्ज किया था, जिसमें कहा गया था कि संतोष ने नशे में बाथरूम की खिड़की से कूद कर खुदकुशी की। हालांकि, मृतक के पिता स्थानीय पुलिस की जांच से संतुष्ट नहीं थे। 2012 में उन्होंने इसके बाद हाईकोर्ट में याचिका दी, जिसके बाद जांच के आदेश दो बार सीबीआई को दिए गए। सीबीआई ने इसी के बाद हत्या का मामला दर्ज किया था और क्लोजर रिपोर्ट फाइल की थी।

कोर्ट ने माना कि मृतक को कई चोटें किसी नुकीली चीज से लगी थीं। सबूतों के आधार पर कोर्ट को लगा कि आरोपी ने संतोष को मारा और खुदकुशी दिखाने के लिए उसकी लाश नीचे फेंक दी। रहस्यमयी मौत को खुदकुशी बताने को लेकर मजिस्ट्रेट ने सीबीआई को दुरुस्त किया कि सबूतों के आधार पर हत्या का मामला मालूम पड़ता है। फिलहाल तीनों आरोपी न्यायिक हिरासत में हैं।

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