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सोहराबुद्दीन शेख मामले में कोर्ट ने सभी 22 आरोपियों को किया बरी, 13 साल बाद आया फैसला

सोहराबुद्दीन शेख-तुलसीराम प्रजापति कथित फर्जी मुठभेड़ मामले में शुक्रवार को CBI की अदालत ने सभी आरोपियों को बरी कर दिया है। इस पूरे मामले पर कोर्ट ने कहा कि पुलिसवालों पर आरोप साबित नहीं हुए।

सोहराबुद्दीन शेख (फोटो: इंडियन एक्सप्रेस)

देश के चर्चित सोहराबुद्दीन शेख-तुलसीराम प्रजापति कथित फर्जी मुठभेड़ मामले में शुक्रवार को CBI की अदालत ने सभी आरोपियों को बरी कर दिया है। इस पूरे मामले पर कोर्ट ने कहा कि पुलिसवालों पर आरोप साबित नहीं हुए। सीबीआई ने 22 पुलिसवालों को बरी कर दिया है। बता दें, ये पूरा मामला साल 2005 का है। इस पूरे मामले की सुनवाई विशेष सीबीआई कोर्ट कर रही थी। इस मामले में लगभग 22 लोगों पर मुकदमा चल रहा था जिनमें से अधिकतर पुलिसवाले थे।

कोर्ट ने क्या कहा?

इसके साथ की सीबीआई की अदालत ने कहा ‘तुलसीराम प्रजापति की हत्या का आरोप सही नहीं है’। कोर्ट ने कहा ‘साजिश के तहत तुलसीराम प्रजापति की हत्या की गई थी, ये आरोप सही नहीं है। पेश किए गए सबूत और गवाह संतोषजनक नहीं है।’ मामले सी सुनवाई करते हुए विशेष CBI जज एसजे शर्मा ने कहा कि सभी गवाह और सबूत संतोषजनक नहीं हैं और ये साबित नहीं हो पा रहा है कि हत्या में किसी तरह की साजिश रची गई थी। इसके साथ ही कोर्ट ने कहा, ‘सरकार और एजेंसियों ने इस मामले की जांच करने में काफी मेहनत की उनके तरफ से 210 गवाहों को पेश किया गया लेकिन किसी भी तरह का सबूत सामने नहीं आ सका।’

क्या था मामला-

इस मामले में सीबीआई का कहना था कि कथित गैंगेस्टर सोहराबुद्दीन शेख, उसकी पत्नी कौसर बी और उसके सहयोगी प्रजापति को गुजरात पुलिस ने एक बस से उस वक्त अगवा कर लिया था, जब वे लोग 22 और 23 नवंबर 2005 की रात हैदराबाद से महाराष्ट्र के सांगली जा रहे थे। CBI के मुताबिक शेख की 26 नवंबर 2005 को अहमदाबाद के पास कथित फर्जी मुठभेड़ में हत्या कर दी गई थी। वहीं शेख की पत्नी को भी तीन दिन बाद मार डाला गया था। उसके एक साल बाद दिसंबर 2006 को प्रजापति की गुजरात और राजस्थान पुलिस ने गुजरात – राजस्थान सीमा के पास चापरी में कथित फर्जी मुठभेड़ में गोली मार कर हत्या कर दी थी। इस मामले में 210 गवाहों से पूछताछ की थी जिसमें से 92 मुकर गए थे।

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