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सीबीसीआइडी करेगी तरुण विजय पर हमले की जांच, हरीश रावत ने माना प्रशासनिक चूक हुई

हरीश रावत ने कहा कि तरुण विजय पर हमले पर हमले की सीबीसीआइडी जांच पुलिस महानिरीक्षक (आइजी) की देखरेख में होगी। इस जांच में उन सभी कारणों को खोजा जाएगा, जिस वजह से यह हिंसक घटना हुई।

Author देहरादून | May 23, 2016 00:04 am
भाजपा के राज्यसभा सांसद तरुण विजय (FILE PHOTO)

चकरौता तहसील के पुनाह-पोखरी गांव में दलितों के साथ शिल्गुर देवता के मंदिर से दर्शन कर लौट रहे राज्यसभा सांसद और भाजपा नेता तरुण विजय पर हुए हमले की जांच सीबीसीआइडी करेगी। मुख्यमंत्री हरीश रावत ने रविवार (22 मई) को अपने आवास पर पत्रकार सम्मेलन में यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि इस मामले में अब तक चार लोगों को गिरफ्तार किया गया है। अन्य हमलावरों को पुलिस तलाश रही है। इससे पहले रावत ने इस घटना को लेकर सूबे के आला अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक भी की।

रावत ने कहा कि सीबीसीआइडी की जांच पुलिस महानिरीक्षक (आइजी) की देखरेख में होगी। इस जांच में उन सभी कारणों को खोजा जाएगा, जिस वजह से यह हिंसक घटना हुई। उन्होंने कहा कि चकरौता तहसील में एक और एसडीएम की तैनाती की जाएगी। जिससे प्रशासन की पकड़ मजबूत हो सके। रावत ने कहा कि तरुण विजय पर हुए हमले की जांच गढ़वाल मंडल के आयुक्त अलग से करते रहेंगे। उन्होंने इस घटना की निंदा करते हुए कहा कि प्रदेश के मंदिरों में किसी भी समुदाय के व्यक्ति के जाने पर कोई पाबंदी नहीं है।

रावत ने माना कि इस मामले में प्रशासनिक चूक हुई है। हम इस चूक को सुधारने के लिए दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करेंगे। किसी को भी प्रदेश में संप्रदायिक माहौल खराब नहीं करने दिया जाएगा। सभी जिला अधिकारियों व पुलिस अधीक्षकों को ऐसे तत्त्वों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। इस घटना के बाद राज्य के गृह मंत्री प्रीतम सिंह चकरौता में डेरा डाले हुए हैं। उन्होंने कहा कि इस मामले में सभी पहलुओं की जांच की जा रही है। देहरादून के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक सदानंद दाते ने कहा कि इस मामले में अब तक पुनाह-पोखरी गांव के निवासी राजेंद्र सिंह, सरदार सिंह, बिजनू गांव के निवासी नैन सिंह और गुड्डू समेत चार लोगों को गिरफ्तार किया गया है।

भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष अजय भट्ट ने इस घटना के लिए रावत सरकार को दोषी ठहराते हुए कहा कि राज्य में कानून व्यवस्था ठप हो चुकी है। एक सांसद पर हमले की घटना यह जाहिर करती है कि सूबे की सरकार इस संवेदनशील मामले को लेकर कतई गंभीर नहीं थी। भाजपा प्रवक्ता और विकासनगर जौनसार क्षेत्र के पूर्व विधायक मुन्ना सिंह चौहान ने कहा कि यह घटना रावत सरकार की प्रशासनिक चूक है।

चकरौता तहसील के पोखरी गांव में 20 मई को हुई इस घटना को लेकर स्थानीय लोगों में पुलिस की सख्त कार्रवाई के बाद दहशत है। पुनाह-पोखरी गांव को पुलिस छावनी में तब्दील कर दिया गया है। राजस्व पुलिस और सिविल पुलिस के जवान गांव में डेरा डाले हुए हैं। देहरादून के जिलाधिकारी और एसएसपी भी मौके पर कैंप किए हुए हैं। फरार हमलावरों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस जगह-जगह दबिश दे रही है। उधर भाजपाइयों ने रविवार को इस घटना के विरोध में मुख्यमंत्री हरीश रावत और गृह मंत्री प्रीतम सिंह का पुतला फूंका। भाजपा और अन्य दलित संगठनों ने इस मुद्दे को लेकर रावत सरकार की घेराबंदी करनी शुरू कर दी है।

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