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डेंगू और चिकनगुनिया के इस साल 2015 की तुलना में कम मामले आए हैं: AAP

आप सरकार ने आज दिल्ली उच्च न्यायालय से कहा कि डेंगू की वजह से राष्ट्रीय राजधानी में चार मौतें हुई हैं और 1158 डेंगू के और 1057 चिकनगुनिया के मामले सामने आए हैं।
Author नई दिल्ली | September 15, 2016 18:39 pm

आप सरकार ने आज दिल्ली उच्च न्यायालय से कहा कि डेंगू की वजह से राष्ट्रीय राजधानी में चार मौतें हुई हैं और 1158 डेंगू के और 1057 चिकनगुनिया के मामले सामने आए हैं। हालांकि, इससे निपटने के लिए तैयारी रहने की वजह से यह संख्या पिछले साल की तुलना में कम है। सरकार ने उन दावों का खंडन किया कि दिल्ली ‘बदतर डेंगू संकट’ का सामना कर रही है और उन्होंने कहा कि वेक्टर जनित इन बीमारियों पर नियंत्रण के लिए कई कदम उठाए हैं। दिल्ली सरकार ने यह बात मुख्य न्यायाधीश जी रोहिणी और न्यायमूर्ति संगीता ढींगरा सहगल की पीठ के समक्ष दायर हलफनामे में कही।

सरकार ने कहा कि आगे रोकथाम के लिए और कदम उठाने के लिए तैयारियों और इन बीमारियों के प्रभाव की कड़ी निगरानी की गई है। डेंगू, चिकनगुनिया और मलेरिया जैसी बीमारियों की संख्या में जुलाई से अक्तूबर के दौरान वृद्धि होती है।
हलफनामे में कहा गया है, ‘‘जीएनसीटीडी का मुख्य आदेश अवरोध में सुधार करना, नागरिकों के मन से अनिश्चितता को कम करना और वेक्टर जनित बीमारी के लक्षणों के साथ कोई भी मरीज उपस्थित होता है तो उसे तत्काल और उच्च गुणवत्ता वाली स्वास्थ्य देखभाल सुविधा प्रदान करना है।’

हलफनामे में कहा गया है, ‘‘जीएनसीटीडी की तैयारी वाली गतिविधियों के शीघ्र शुरू करने की वजह से इस मुख्य आदेश का कारगर तरीके से निर्वहन किया गया है। डेंगू बुखार की संख्या के मामले पिछले साल की तुलना में इस साल कम हैं। ऐसा इस साल पहले और अधिक बारिश होने के बावजूद हुआ है।’

डेंगू से इस साल चार मौत होने की बात करते हुए सरकार ने कहा कि इस साल 10 सितंबर तक डेंगू के 1158 मामले सामने आए हैं। इसमें 804 मरीज दिल्ली के और 354 मरीज दिल्ली के बाहर के हैं। सरकार ने कहा कि 1057 मामले चिकनगुनिया के भी आए हैं लेकिन दक्षिण दिल्ली नगर निगम (एसडीएमसी) की रिपोर्ट के अनुसार 10 सितंबर तक इस बीमारी से मौत का एक भी मामला सामने नहीं आया है।
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता वकील शाहिद अली ने दावा किया कि चिकनगुनिया से लोगों के मरने की बात सामने आई है और दिल्ली सरकार कह रही है कि लोगों को इस बारे में उपराज्यपाल से पूछना चाहिए।

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