बाघों की मौत के बढ़े मामले, 11 माह में 113 की मौत

बाघों को बचाने की तमाम कोशिशों के बीच देश में बाघों की मौत के मामले बढ़ रहे हैं।

सांकेतिक फोटो।

बाघों को बचाने की तमाम कोशिशों के बीच देश में बाघों की मौत के मामले बढ़ रहे हैं। देश में बीते 11 माह में 113 बाघों की मौत हुई है, जो अब तक तीन साल में सामने आए मामलों में सर्वाधिक है। यह आंकड़ा नवंबर, 2021 तक सामने आया है। बीते वर्ष की तुलना में बाघों की मौत की संख्या अधिक है।

बाघों के संरक्षण के लिए राष्टÑीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) गठित किया गया है, जो बाघों की स्थिति पर निगरानी करता है। एनटीसीए की रिपोर्ट बताती है कि देश में इस साल जिन 113 बाघों की मौत हुई है, उन बाघों में से 6 बाघ ही अपनी पूर्ण आयु को पूर्ण कर सके हैं और इनकी मौत प्राकृतिक रही है। जबकि नौ बाघ अवैध शिकार की वजह से मारे गए हैं।

अभी इस वर्ष की समाप्ति में कुछ समय बाकी है, जो इस आंकड़े को और भी ऊपर ले जा सकता है। आंकड़ों के मुताबिक इस साल 61 नर बाघ और 24 मादा बाघ की मौत हो चुकी है। इसके अतिरिक्त 28 बाघों की मौत के कारणों का पता नहीं चल पाया है। जो अभी भी मंत्रालय के लिए चिंता का विषय बना हुआ है। इसके लिए संबंधित राज्यों के अधिकारी विस्तृत आंकलन कर रहे हैं और इस आंकलन के आधार पर ही सही स्थिति स्पष्ट होगी। इससे पूर्व जुलाई, 2021 तक सामने आई रिपोर्ट में भी बाघों की मौतों की जानकारी सामने आई थी।

रिपोर्ट के मुताबिक उस समय मध्य प्रदेश में सबसे अधिक 27 बाघों के मरने की खबर सामने आई थी। देश में 52 बाघ संरक्षित क्षेत्र हैं, जो कि देश के 52 राज्यों में फैले हुए हैं और यहां पर इस प्रजाति की करीब 3 हजार बिल्लियां पाई जाती हैं। एक रिपोर्ट के मुताबिक बाघों ने उत्तर और मध्य भारत के राज्यों में अपना आवास बनाया है और बाघ आस-पास के राज्यों से 300 किलोमीटर तक का लंबा सफर करके भी राज्यों में देखे गए हैं।

कई राज्यों में यह भी सामने आया है कि आम लोगों ने ही बाघ से खतरे के मद्देनजर बाघों को मारा है। एनटीसीए के सहयोग से सरकारी एजंसियों के माध्मय से बाघों की अवैध तस्करी से लेकर संभावित क्षेत्रों के अंदर लोगों को जागरूक किया जाता है कि बाघ पाए जाने की स्थिति में किस तरह के व्यवहार और प्रयोग के माध्यम से बाघों के हमले से बचा जा सकता है।

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