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फेसबुक पर घाटी के माहौल को लेकर फर्जी पोस्ट डालने के मामले में FIR दर्ज

राजौरी के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक युगल मन्हास ने कहा कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर नियमित निगरानी के दौरान राजौरी पुलिस के एक दल को फेसबुक पर पांच ऐसे लोगों का पता चला जिन्होंने ऐसी संवेदनशील टिप्पणी डाली हैं जिनसे राज्य में शांति और व्यवस्था को खतरा हो सकता है।

Author जम्मू | Updated: August 29, 2019 4:06 PM
प्रतीकात्मक तस्वीर

जम्मू कश्मीर के राजौरी और पुंछ जिलों के रहने वाले और दूसरे राज्यों में काम कर रहे पांच लोगों पर फेसबुक पर ऐसी ‘फर्जी जानकारियां तथा संवेदनशील टिप्पणियां’ डालने के सिलसिले में मामला दर्ज किया गया है जिनसे राज्य में शांति बाधित हो सकती है। राजौरी के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक युगल मन्हास ने कहा कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर नियमित निगरानी के दौरान राजौरी पुलिस के एक दल को फेसबुक पर पांच ऐसे लोगों का पता चला जिन्होंने ऐसी संवेदनशील टिप्पणी डाली हैं जिनसे राज्य में शांति और व्यवस्था को खतरा हो सकता है। पुलिस अधिकारी ने कहा कि युवकों की पहचान जहीर चौधरी, जाकिर शाह बुखारी, इमरान काजी,नाजिक हुसैन और सरदार तारिक खान के रूप में की गयी है।

मन्हास ने कहा कि पांचों आरोपी जम्मू कश्मीर के बाहर काम करते हैं। एसएसपी ने कहा कि उनके पासपोर्ट निरस्त करने की प्रक्रिया बहुत जल्द शुरू होगी।
पुलिस अधिकारी ने दूसरे राज्यों में काम कर रहे राजौरी तथा पुंछ के निवासियों से भी अपील की कि सोशल मीडिया का उचित इस्तेमाल किया जाए और कोई संविधान विरुद्ध काम नहीं किया जाए।

गौरतलब है कि कश्मीर घाटी में बाजारों के नहीं खुलने और सड़कों से सार्वजनिक वाहनों के नदारद रहने के साथ ही बृहस्पतिवार को लगातार 25 वें दिन भी सामान्य जनजीवन प्रभावित रहा। अधिकारियों के अनुसार हालांकि शहर के कई भागों में कुछ निजी गाड़ियां दौड़ती नजर आयीं और कुछ रेहड़ी पटरी वाले भी अपना काम-धंधा करते दिखाई दिये। अधिकारियों के मुताबिक सरकारी कार्यालय खुले रहे लेकिन सार्वजनिक वाहनों की कमी के चलते उनमें से कई में उपस्थिति कम रही जबकि जिला मुख्यालयों में हाजिरी सामान्य रही।

वैसे तो घाटी के कई हिस्सों में लैंडलाइन टेलीफोन सेवाएं बहाल कर दी गयी हैं लेकिन मोबाइल टेलीफोन सेवाएं और सभी इंटरनेट सेवाएं अब भी बंद है। केंद्र द्वारा पांच सितंबर को जम्मू कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 के अधिकतर प्रावधानों को निरस्त करने और राज्य को दो केंद्रशासित प्रदेशों में बांटने के बाद राज्य में कई तरह की प्रशासनिक पाबंदियां लगायी गयी थीं। ज्यादातर शीर्ष और दूसरी पीढ़ी के अलगाववादी नेताओं को एहतियान हिरासत में ले लिया गया है और तीन पूर्व मुख्यमंत्रियों– फारूक अब्दुल्ला, उमर अब्दुल्ला और महबूबा मुफ्ती समेत मुख्य धारा के नेताओं को या तो हिरासत में लिया गया है या उन्हें नजरबंद कर दिया गया है।

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