कानपुर कमिश्नरेट में उस समय विवाद खड़ा हो गया जब साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में तैनात एक इंस्पेक्टर ने यह आरोप लगाते हुए इस्तीफा दे दिया कि उन्हें सेवा नियमों के विपरीत अपने से जूनियर अधिकारी के अधीन काम करने के लिए मजबूर किया जा रहा है।
2005 बैच के इंस्पेक्टर विनय शर्मा ने गुरुवार को डीसीपी (क्राइम) श्रवण कुमार सिंह को अपना इस्तीफा सौंपा। उन्होंने कहा कि वह अब थानाध्यक्ष सतीश कुमार के अधीन काम नहीं कर सकते, क्योंकि सेवा वरिष्ठता के हिसाब से सतीश कुमार उनसे जूनियर हैं।
तय सेवा मानकों के खिलाफ
विनय शर्मा का कहना है कि नियमों के अनुसार किसी अधिकारी को अपने समकक्ष या उससे वरिष्ठ अधिकारी के अधीन ही काम करना चाहिए। उनके मुताबिक मौजूदा व्यवस्था पहले से तय सेवा मानकों के खिलाफ है।
कार्यस्थल के माहौल पर भी असंतोष जताते हुए शर्मा ने आरोप लगाया कि भले ही सतीश कुमार थानाध्यक्ष हैं, लेकिन कई बार उन्हें ही संचालन संबंधी मामलों में उनका मार्गदर्शन करना पड़ता है। उन्होंने कहा, “मुझे अक्सर उन्हें समझाना पड़ता है कि क्या सही है और क्या गलत, लेकिन इसके बावजूद डांट मुझे ही सुननी पड़ती है। इससे कार्यस्थल का माहौल खराब होता है।”
एडीसीपी ने कही जांच कराने की बात
मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए एडीसीपी (क्राइम) अंजलि विश्वकर्मा ने बताया कि पूरे मामले की जांच शुरू कर दी गई है। उन्होंने कहा कि शुक्रवार को इंस्पेक्टर विनय शर्मा का बयान दर्ज किया जाएगा, ताकि यह पता लगाया जा सके कि किन परिस्थितियों में उन्होंने इस्तीफा दिया।
अंजलि विश्वकर्मा ने यह भी कहा कि शर्मा के इस्तीफे में यह स्पष्ट नहीं है कि वह केवल साइबर सेल छोड़ना चाहते हैं, क्राइम ब्रांच से हटना चाहते हैं या फिर पूरी पुलिस सेवा से इस्तीफा देना चाहते हैं। उन्होंने कहा, “सभी तथ्यों की जांच के बाद वरिष्ठ अधिकारियों को विस्तृत रिपोर्ट सौंप दी जाएगी।”
