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कोलकाता: नेता प्रतिपक्ष का पद कैबिनेट मंत्री जैसा, शुभेंदु के घर लगे CCTV पर HC ने बंगाल सरकार से कही ये बात

Subhendu Adhikari: शुभेंदु अधिकारी के घर के पास रात आठ बजे के बाद लॉउडस्पीकर बजाने पर हाईकोर्ट ने रोक लगा दी है।

Suvendu adhikari, calcutta high court
शुभेंदु अधिकारी की याचिक पर हाईकोर्ट ने ममता सरकार पर की सख्त टिपप्णी (एक्सप्रेस फाइल फोटो)

पश्चिम बंगाल में चुनाव को खत्म हुए भले ही महीनों बीत गए हों, लेकिन राज्य में टीएमसी और बीजेपी के बीच सियासी तकरार अभी भी जारी है। अब इसी से संबंधित एक मामले की सुनवाई के दौरान कलकत्ता हाईकोर्ट ने ममता सरकार पर बड़ी टिप्पणी कर दी है।

कलकत्ता उच्च न्यायालय ने गुरुवार को कहा कि राज्य में विपक्ष के नेता को कैबिनेट मंत्री के समान विशेषाधिकार प्राप्त हैं। बार एंड बेंच के अनुसार न्यायमूर्ति राजशेखर मंथा ने पश्चिम बंगाल विधानसभा में भारतीय जनता पार्टी के नेता और एलओपी शुभेंदु अधिकारी द्वारा दायर एक याचिका पर सुनवाई करते हुए यह टिप्पणी की है।

शुभेंदु अधिकारी ने ममता बनर्जी की सरकार के खिलाफ शिकायत की है कि उनकी सुरक्षा से समझौता किया जा रहा है। अधिकारी ने यह कहते हुए उच्च न्यायालय का रुख किया था कि उनकी सुरक्षा व्यवस्था में खामियों का फायदा उठाकर लोग लगातार उनके कामकाज में बाधा डाल रहे हैं और उन्हें परेशान कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि पुलिस की तरफ से उनके घर में सीसीटीवी कैमरे लगाने से उनकी गोपनीयता भंग हो रही है। उनके घर के आसपास रात दो बजे तक लाउडस्पीकर बजाए जाते हैं, जिससे ध्वनि प्रदूषण पैदा होता है, साथ ही वो डिस्टर्ब होते हैं। उनके घर के पास होने वाले राजनैतिक रैलियों से भी वो परेशान हैं।

अधिकारी की इसी याचिका पर सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि रात आठ बजे के बाद उनके घर के आसपास लॉउडस्पीकर नहीं बजाए जाएं। कोर्ट ने कहा कि उनका घर एक संवेदनशील इलाके में है। कोर्ट ने कहा कि रैलियों की अनुमति किन मानदंडो पर दी जा रही है, वो प्रशासन कोर्ट को बताए। इसके साथ ही कोर्ट ने सीसीटीवी के मुद्दे पर कहा कि राज्य पुलिस और अधिकारी की सुरक्षा में तैनात सीआरपीएफ की टीम मिलकर यह तय करे कि कहां सीसीटीवी कैमरे लगने है। इस मामले की अगली सुनवाई 14 फरवरी को होगी।

बता दें कि पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले शुभेंदु अधिकारी टीएमसी में ही थे और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के काफी करीब माने जाते थे, लेकिन चुनाव से पहले अधिकारी बीजेपी में शामिल हो गए और ममता के खिलाफ मैदान में उतर गए थे।

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